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डिमेंशिया ग्रस्त आरोपी पर जारी रखें ट्रायल: हाईकोर्ट
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने वैसकुलर डिमेंशिया बीमारी से ग्रस्त एक आरोपी के खिलाफ अभियोजन जारी रखने को कहा है। भ्रष्टाचार रोधी विशेष अदालत श्रीनगर ने इस मामले में हाईकोर्ट से अभियोजन संबंधी आदेश का आग्रह किया था। विशेष अदालत ने कहा था कि आरोपी इस स्थिति में नहीं है कि वह अभियोजन की प्रक्रिया को समझ सके। ऐसे में क्या उसके खिलाफ ट्रायल जारी रखा जाना चाहिए।
विशेष अदालत ने जम्मू-कश्मीर कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर की धारा 341 का हवाला देकर हाईकोर्ट से आदेश का आग्रह किया था। विशेष अदालत ने कहा कि आरोपी गुलाम रसलू जू के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है लेकिन वह वैसकुलर डिमेंशिया से पीड़ित है। वह अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया को समझने में सक्षम नहीं है। डॉक्टरों के बोर्ड ने भी आरोपी को ट्रायल के लिए सक्षम नहीं बताया। इस पर हाईकोर्ट में न्यायाधीश संजय धर की पीठ ने कहा कि धारा 341 के तहत इस तरह के मामले में कोर्ट अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। न्यायाधीश धर ने कहा कि अभियोजन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें अभी तक आरोपी को दोषी या निर्दोष साबित नहीं किया गया है। इस मामले में महज धारा 341 का हवाला देकर ट्रायल को रोका नहीं जा सकता। विशेष अदालत जब इस मामले में किसी नतीजे पर पहुंचेगी तो आरोपी की स्वास्थ्य परिस्थितियों का हवाला भी दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट इस पर कोई आदेश नहीं देगी। आरोपी के खिलाफ चल रहा ट्रायल जारी रखा जाए।
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विशेष अदालत ने जम्मू-कश्मीर कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर की धारा 341 का हवाला देकर हाईकोर्ट से आदेश का आग्रह किया था। विशेष अदालत ने कहा कि आरोपी गुलाम रसलू जू के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है लेकिन वह वैसकुलर डिमेंशिया से पीड़ित है। वह अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया को समझने में सक्षम नहीं है। डॉक्टरों के बोर्ड ने भी आरोपी को ट्रायल के लिए सक्षम नहीं बताया। इस पर हाईकोर्ट में न्यायाधीश संजय धर की पीठ ने कहा कि धारा 341 के तहत इस तरह के मामले में कोर्ट अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। न्यायाधीश धर ने कहा कि अभियोजन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें अभी तक आरोपी को दोषी या निर्दोष साबित नहीं किया गया है। इस मामले में महज धारा 341 का हवाला देकर ट्रायल को रोका नहीं जा सकता। विशेष अदालत जब इस मामले में किसी नतीजे पर पहुंचेगी तो आरोपी की स्वास्थ्य परिस्थितियों का हवाला भी दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट इस पर कोई आदेश नहीं देगी। आरोपी के खिलाफ चल रहा ट्रायल जारी रखा जाए।
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