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Leh Violence: लद्दाख में हालात सामान्य होने का सरकार का दावा, एलएबी बोली- सब कुछ सिर्फ दिखावा

Mon, 06 Oct 2025 04:48 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क लेह
अमर उजाला, नेटवर्क लेह Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 06 Oct 2025 04:48 PM IST
सार

लद्दाख प्रशासन ने दावा किया कि हालात सामान्य हैं, स्कूल‑दफ्तर खुल चुके हैं, जबकि एलएबी ने इसे सिर्फ एक दिखावा करार देते हुए कहा कि गिरफ्तारियां जारी हैं और इंटरनेट बंदी बनी हुई है।

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Government claims normalcy in Ladakh, LAB says it's all just a sham
लेह - फोटो : एजेंसी

विस्तार

लद्दाख प्रशासन ने सोमवार को दावा किया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हालात सामान्य हैं, स्कूल, दफ्तर और बाजार खुल चुके हैं। वहीं, लेह एपेक्स बॉडी  ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामान्य दिख रहा है, वो केवल एक भ्रम है। एलएबी  ने सभी गिरफ्तारियों को तुरंत खत्म करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की।

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एलएबी के सह-अध्यक्ष चेयरिंग दोरजे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, इंटरनेट अब भी बंद है, लोगों की मास गिरफ्तारी हो रही है। ऐसे में हालात कैसे सामान्य कहे जा सकते हैं?
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24 सितंबर को एलएबी और केडीए द्वारा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान के छठे शेड्यूल के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत और कई घायल हुए थे। इसके बाद क्षेत्र में कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी।

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हालांकि, प्रशासन ने धीरे-धीरे कर्फ्यू हटाया और 3 अक्तूबर से कक्षा 8 तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन धारा 144 अब भी लागू है और मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल नहीं की गई है।

एलजी ऑफिस ने एक आधिकारिक पोस्ट में कहा, लद्दाख अब शांत है। स्कूल, दफ्तर और बाजार दोबारा खुल चुके हैं। एलजी कविंदर गुप्ता लगातार सुरक्षा की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

दूसरी ओर, एलएबी ने प्रशासन पर गांव के मुखियाओं को डराने-धमकाने और हिरासत में लेने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ लोगों को जानकारी दे रहे थे, उन्होंने कोई भड़काऊ कार्य नहीं किया।

एलएबी ने मांग की कि सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए, इंटरनेट सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं और न्यायिक जांच शुरू की जाए, ताकि लोगों का विश्वास दोबारा बहाल हो सके।

प्रशासन की ओर से मुख्य सचिव पवन कोटवाल ने कहा कि 70 में से 30 युवकों को रिहा किया जा चुका है और शेष को भी न्यायालय के आदेश के अनुसार रिहा किया जाएगा। सरकार युवाओं को किसी भी तरह की परेशानी नहीं देना चाहती और जल्द ही संवाद प्रक्रिया शुरू करने को तैयार है।

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