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Jammu Kashmir: कश्मीर की सियासत ने खोई बेबाक आवाज, नहीं रहे डॉ. शेख मुस्तफा कमाल

Wed, 15 Jul 2026 12:58 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 15 Jul 2026 12:58 PM IST
सार

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का लंबी बीमारी के बाद श्रीनगर में 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

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End of an era in the NC; senior leader Dr. Sheikh Mustafa Kamal passes away.
डॉ. शेख मुस्तफा कमाल के जनाजे की नमाज में शामिल सीएम उमर, डॉ. फारूक व अन्य और इनसेट में डॉ. शेख मुस - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की राजनीति ने मंगलवार को अपनी सबसे जानी-मानी और बेबाक आवाज में से एक को खो दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का श्रीनगर के पारस अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। डॉ. कमाल को रात करीब 8:30 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

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डॉ. शेख मुस्तफा पूर्व मुख्यमंत्री मोहम्मद अब्दुल्ला और बेगम अकबर जहान अब्दुल्ला के बेटे थे। उन्होंने कश्मीर के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के शुरुआती दौर को करीब से देखा और बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस के बैनर तले सार्वजनिक जीवन में कदम रखा, जहां वे पार्टी के सबसे मुखर  और अडिग नेताओं में से एक के रूप में उभरे।

हालांकि उन्होंने मेडिकल डॉक्टर के तौर पर प्रशिक्षण लिया था लेकिन जल्द ही राजनीति उनका पूर्णकालिक पेशा बन गई। चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्हें डॉक्टर की उपाधि मिली। डॉ. कमाल 1980 के दशक की शुरुआत में चुनावी राजनीति में आए और 1983 में जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के सदस्य बने।  चार साल बाद वे गुलमर्ग निर्वाचन क्षेत्र से जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए और कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। डॉ. शेख मुस्तफा ने 1983, 1987 और 1996 में कैबिनेट मंत्री के तौर पर काम किया और अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। राजनीति के अलावा डॉ. कमाल अपनी सुलभता और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंधों के लिए जाने जाते थे। ऊंचे पद पर होने के बावजूद वे आसानी से उपलब्ध रहते थे और जम्मू-कश्मीर भर से आए प्रतिनिधिमंडलों से मिलकर उनकी शिकायतें सुनते थे।

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डॉ. फारूक के थे भरोसेमंद सलाहकार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर डॉ. कमाल को डॉ. फारूक अब्दुल्ला का भरोसेमंद सलाहकार माना जाता था। उन्होंने जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और नीतिगत चर्चाओं, चुनावी रणनीतियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों में गहराई से शामिल रहे।

डॉ. मुस्तफा के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ, एलजी
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि वरिष्ठ नेता डॉ. मुस्तफा कमाल के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ है। इस दुखद अवसर पर उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति हार्दिक शोक संवेदनाएं हैं।

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सीएम उमर ने दी निधन की जानकारी
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने चाचा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी दी। उमर ने लिखा, मेरे पिता के छोटे भाई डॉ. मुस्तफा कमाल का आज शाम श्रीनगर के पारस अस्पताल में निधन हो गया। चाचा मुस्तफा कुछ महीनों से बीमार थे लेकिन चार दिन पहले उनकी हालत और बिगड़ गई। उन्होंने मुश्किल हालात में भी बहादुरी से संघर्ष किया। उनका इलाज करने वाले डॉक्टर और स्टाफ बहुत अच्छे थे लेकिन अल्लाह ने उन्हें अपनी अंतिम यात्रा के लिए बुला लिया। अल्लाह चाचा मुस्तफा को जन्नत में सर्वोच्च स्थान दे।

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