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बांध विरोधियों और पक्षधरों में तीखी नोंकझोंक

Sat, 10 Dec 2016 09:16 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर Updated Sat, 10 Dec 2016 09:16 PM IST
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Dam opponents and advocates sharp rattling.
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की विशेष टीम देवप्रयाग संगम पर तीर्थ पुरोहितों और प्रभावितों की राय लेते हुए - फोटो : amar ujala.

जून 2013 में आए जलप्रलय के बाद बंद पड़ी निर्माणाधीन कोटली जल विद्युत परियोजना (प्रथम) की पुन: समीक्षा के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित विशेष दल यहां पहुंचा। इस दौरान दल के समक्ष अपनी अपनी राय रखते हुए कई बार परियोजना के पक्षधर और विरोधियों में हाथापाई की नौबत भी आ गई।

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शनिवार को निदेशक एस करकेटा की अगुवाई में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की सात सदस्यीय टीम संगम नगरी देवप्रयाग पहुंची। टीम ने तीर्थ पुरोहित, परियोजना प्रभावितों और बांध समर्थकों की राय जानी। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र नेगी ने कहा कि गंगा अविरल बहती रहे और तीर्थ की महता बरकरार रहनी चाहिए।
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कहा कि गंगा में रन आफ द रीवर परियोजना का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग संगम पर प्राचीन काल से पिंडदान, तर्पण व स्नान सहित अंतिम संस्कार की परंपरा रही है। इनको किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया जा सकता है। वहीं अत्रेश ध्यानी ने कहा कि बांध बनने से जनता को रोजगार मिलेगा।
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कहा कि उक्त लोग विकास रोकने के लिए खड़े रहते हैं। कुछ लोग परियोजना के पक्ष में बोले तो कुछ विरोध में। ऐसे में कई बार पक्ष और विरोधियों के बीच हाथापाई की नौबत आई। टीम ने बताया कि जनता से मिले सुझावों को सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा जाएगा। टीम में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक डा. हरीश बहुगुणा, ऊर्जा निगम के महाप्रबंधक डा. सुरेश बलूनी, डा. एनसी बडोनी, प्रो. उमेश पटनायक व प्रबंधक मनजीत सिंह शामिल थे। 

रायशुमारी में व्यापार संघ अध्यक्ष मेघंद्र रावत, उदय प्रकाश टोडरिया, नटवर लाल, विनोद टोडरिया, सुदर्शन असवाल और त्रिलोक तड़ियाल आदि मौजूद थे।

यह था मामला
जून 2013 में आई दैवीय आपदा के बाद एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में निर्माणाधीन लगभग 4 हजार मेगावाट की 24 जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने परियोजनाओं की समीक्षा के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को विशेषज्ञ दल का गठन कर पुन: समीक्षा के आदेश दिए थे। इस आदेश से टिहरी जिले के अंतर्गत एनएचपीसी की कोटली-भेल जल विद्युत परियोजना का कार्य बंद हो गया।  

गंगा में कूदने की धमकी
देवप्रयाग।
टीम के जाने के बाद बांध के विरोधी व पक्षधर में दो लोग आपस में भिड़ गए। नोंकझोंक इतनी बढ़ गई कि दोनों ने गंगा में छलांग में मारने की बात कह दी। लोगों के समझाने-बुझाने पर वह शांत हुए।


वही टीम के दौरे की सूचना मिलने पर श्रीनगर से कुछ लोग देवप्रयाग पहुंच गए,  जिस पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब श्रीनगर बांध बन रहा था और धारी देवी मंदिर डूब रहा था, तब उन्हें बोलना चाहिए था। कहा कि ये सुनवाई देवप्रयाग क्षेत्र के निवासियों के लिए है।

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