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दूरदर्शन श्रीनगर के पूर्व निदेशक डॉ. मसूदी की याचिका खारिज
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श्रीनगर। दूरदर्शन केंद्र श्रीनगर के पूर्व वरिष्ठ निदेशक डॉ. रफीक मसूदी की दिक्कतें बढ़ गई हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को मसूदी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके खिलाफ मामले की मंजूरी आरोप तय करने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति संजय धर की एकल पीठ ने वीरवार को डॉ. मसूदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मसूदी के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने वाले प्राधिकारी ने अपने विवेक का प्रयोग करते हुए मौजूद साक्ष्यों के आधार पर याचिकाकर्ता की भूमिका को स्पष्ट रूप से चित्रित करती है। इसलिए विशेष न्यायाधीश के पास उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री थी। अदालत ने कहा कि आरोप तय करते समय किसी आरोपी के खिलाफ एक मजबूत संदेह भी आरोप तय करने का सटीक आधार होता है।
सीबीआई ने 2013 में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि अब्दुल कयूम वडेरा, उप महानिदेशक (डीडीजी) दूरदर्शन केंद्र श्रीनगर ने श्रीनगर दूरर्शन केंद्र श्रीनगर के कार्यक्रम अधिकारी गुलाम मोहिउद्दीन और कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। साजिश के तहत चार कार्यक्रमों टोटे गोव कोल, रूड काया बाकी, घर से बॉलीवुड तक और रम गयाम शीश के निर्माण और प्रसारण के लिए 22 काल्पनिक कलाकारों को 18.81 लाख रूपये का फर्जी भुगतान कर दिया गया। सीबीआई द्वारा मामले की जांच के बाद सक्षम अधिकारी ने 20 मई, 2015 को अपने आदेश में डॉ. रफीक मसूदी और सात अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
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न्यायमूर्ति संजय धर की एकल पीठ ने वीरवार को डॉ. मसूदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मसूदी के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने वाले प्राधिकारी ने अपने विवेक का प्रयोग करते हुए मौजूद साक्ष्यों के आधार पर याचिकाकर्ता की भूमिका को स्पष्ट रूप से चित्रित करती है। इसलिए विशेष न्यायाधीश के पास उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री थी। अदालत ने कहा कि आरोप तय करते समय किसी आरोपी के खिलाफ एक मजबूत संदेह भी आरोप तय करने का सटीक आधार होता है।
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सीबीआई ने 2013 में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि अब्दुल कयूम वडेरा, उप महानिदेशक (डीडीजी) दूरदर्शन केंद्र श्रीनगर ने श्रीनगर दूरर्शन केंद्र श्रीनगर के कार्यक्रम अधिकारी गुलाम मोहिउद्दीन और कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। साजिश के तहत चार कार्यक्रमों टोटे गोव कोल, रूड काया बाकी, घर से बॉलीवुड तक और रम गयाम शीश के निर्माण और प्रसारण के लिए 22 काल्पनिक कलाकारों को 18.81 लाख रूपये का फर्जी भुगतान कर दिया गया। सीबीआई द्वारा मामले की जांच के बाद सक्षम अधिकारी ने 20 मई, 2015 को अपने आदेश में डॉ. रफीक मसूदी और सात अन्य आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
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