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इनडोर केसर की खेती एक हकीकत, कश्मीर में दिखा सकारात्मक परिणाम

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श्रीनगर। ऐसे समय में जब कश्मीर में बाहरी केसर की खेती तीन प्रमुख चुनौतियों - सिंचाई सुविधाओं की कमी, केसर भूमि का रूपांतरण और केसर कॉर्न की कमी का सामना कर रही है तब कश्मीर में केसर का कटोरा कहलाने वाले पांपोर में किसान घर के अंदर (इनडोर) केसर उगा रहे हैं। हाल ही में इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पांपोर के शारशाली क्षेत्र के एक उत्पादक माजिद फारूक ने बताया कि उनका परिवार क्षेत्र में पहला ऐसा परिवार है, जिसने इनडोर खेती शुरू की है और परिणाम अभूतपूर्व रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कि इनडोर केसर की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है।
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केसर ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वानी ने बताया कि इनडोर केसर की खेती एक वास्तविकता है और यह अब तक बहुत सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। इनडोर केसर पर जलवायु परिवर्तन, व्यापक बारिश या गर्मी का शून्य प्रभाव है। उन्होंने कहा कि इससे केसर का उत्पादन बढ़ेगा। मांग आसानी से पूरी की जा सकती है। जिनके पास जमीन नहीं है वे भी अपने घरों में केसर उगा सकते हैं।
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सैफरन (केसर) और सीड स्पाइसिस के लिए एडवांस रिसर्च स्टेशन के प्रमुख डॉ. बशीर अहमद अलाई ने कहा कि जिस तरह जलवायु परिवर्तन के कारण हमारी हर फसल प्रभावित हो रही है और अब इसने केसर की खेती पर अपना प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। अब हमें इसके लिए सिंचाई की जरूरत है जो पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में इनडोर केसर मांग और आपूर्ति को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से हम इस प्रयोग पर काम कर रहे हैं और दो साल बाद हमने इसे किसानों के बीच प्रदर्शन के लिए वितरित किया। डॉ. अलाई ने कहा कि किसानों के घरों में लगभग 12 इनडोर केसर इकाइयां शुरू की गई हैं और वे परिणाम से खुश हैं। नई बहु-स्तरीय पद्धति के माध्यम से कॉर्न को ट्रे में डाल दिया जाता है और उपज की कटाई से पहले उन्हें लगभग 100 दिनों के अंधेरे की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया अगस्त में शुरू होती है। फूल 10 से 15 अक्तूबर के बीच खिलते हैं, इसके बाद नवंबर के महीने में कटाई होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य कमरे में अधिक से अधिक कॉर्न को समायोजित करना और अधिक उपज प्राप्त करना है। उन्होंने कहा, जून में कॉर्न को जड़ों से उखाड़ा जाता है। डॉ. अलाई ने बताया कि तापमान, आर्द्रता और रोशनी उपज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अगर किसान इन बातों का ध्यान रखेंगे तो अच्छी और अधिक उपज होगी।
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