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प्रमोशन में आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले पर रोक
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 20 Mar 2016 10:27 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट्र
- फोटो : Reuters
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प्रमोशन में आरक्षण के संबंध में हाईकोर्ट की ओर से जारी एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर आरक्षित वर्ग के सरकारी मुलाजिमों को राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण की सरकारी नीति पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत 2005 से कई कर्मचारियों को प्रमोशन मिला है।
जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस अभय वी मनोहर साप्रे की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) की सुनवाई करते हुए जेएंडके हाईकोर्ट की ओर से 9 अक्तूबर 2015 को दिए फैसले के आदेश पर रोक लगाई। खंडपीठ ने जम्मू कश्मीर सरकार व अन्य को एसएलपी के साथ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। तब तक हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे रहेगा।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ की ओर से नौ अक्तूबर 2015 को 50 पेज का फैसला सुनाया गया था। इसमें कहा गया था कि रियासत में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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खंडपीठ ने जेएंडके रिजर्वेशन एक्ट की धारा 6, आरक्षण नियम 9,10 और 34 को ‘अपमानजनक और गैर संवैधानिक’ करार दिया था। अदालत ने पाया था कि जम्मू कश्मीर में प्रमोशन में आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि 77वें संवैधानिक संशोधन के तहत अधिनियम 16 के साथ जोड़ा गई धारा (4ए) रियासत में मान्य नहीं है। खंडपीठ के फैसले को कुछ लोगों द्वारा एसएलपी के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस अभय वी मनोहर साप्रे की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) की सुनवाई करते हुए जेएंडके हाईकोर्ट की ओर से 9 अक्तूबर 2015 को दिए फैसले के आदेश पर रोक लगाई। खंडपीठ ने जम्मू कश्मीर सरकार व अन्य को एसएलपी के साथ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। तब तक हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे रहेगा।
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उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ की ओर से नौ अक्तूबर 2015 को 50 पेज का फैसला सुनाया गया था। इसमें कहा गया था कि रियासत में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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खंडपीठ ने जेएंडके रिजर्वेशन एक्ट की धारा 6, आरक्षण नियम 9,10 और 34 को ‘अपमानजनक और गैर संवैधानिक’ करार दिया था। अदालत ने पाया था कि जम्मू कश्मीर में प्रमोशन में आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि 77वें संवैधानिक संशोधन के तहत अधिनियम 16 के साथ जोड़ा गई धारा (4ए) रियासत में मान्य नहीं है। खंडपीठ के फैसले को कुछ लोगों द्वारा एसएलपी के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।