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राजोरी ने विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन आने लगा सामने
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राजोरी। जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और उससे उत्पन्न हुई बाढ़ की स्थिति से हुए नुकसान का आकलन जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सामने आना शुरू हो गए हैं। जानकारी के अनुसार प्रशासन द्वारा गठित टीमों द्वारा जमीनी स्तर पर जांच के बाद पता चला है कि अब तक एक पक्का घर, 28 कच्चे घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 4 पक्के और 14 कच्चे घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इसके अलावा 24 कच्चे घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि 6 मवेशी शेड क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगातार बारिश के कारण 4 दिन में 15 मवेशियों की मौत हो हुई है, जबकि तेज नदी नालों में बहने से 3 लोगों की मौत हुई है। जिले में अचानक आई बाढ़। हाल ही में लगातार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने जिले के कोटरंका में फसलों और कच्चे घरों (मिट्टी के घरों) को भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के पीड़ित लोगों और पंचों सरपंचों ने एलजी सरकार से प्रभावित गरीब लोगों के लिए उपयुक्त मुआवजे एवं राहत की अपील की है। पांच दिन के दौरान मूसलाधार बारिश ने फसलों, फलों के पेड़ों और संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने बताया कि राजस्व टीमों को नुकसान का पूरा ब्योरा तैयार करने में बहुत समय लगेगा, जबकि प्रभावित गरीब लोगों को राज्य सरकार से तत्काल मदद की जरूरत है। सबसे अधिक प्रभावित तहसीलों में चासाना, बुद्धल और कोटरंका शामिल हैं, इन पंचायतों में मूसलाधार बारिश, बाढ़, भूस्खलन से प्रभावित लोगों को प्रशासन से तत्काल मदद की जरूरत है। लोगों ने राजस्व अधिकारियों द्वारा प्रभावित लोगों का निष्पक्ष और पारदर्शी सर्वेक्षण करने की मांग की। इन क्षेत्रों में लगभग 80 प्रतिशत परिवार पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं और भारी बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, किसान भारी चिंता में हैं।
ये प्रभावित लोग फसलों और फलों के पेड़ों को भारी नुकसान के अलावा देश के अन्य राज्यों में मजदूर के रूप में काम करने वाले अपने परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए भी चिंतित हैं। उन्होंने एलजी प्रशासन से जल्द प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा, राहत देने की अपील की है।
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मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
पतराडा गांव में नाले में आई बाढ़ से एक भैैंस बह गई
सुंदरबनी । शनिवार दोपहर शुरू हुई मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मूसलाधार बारिश के बीच लोग घरों के अंदर दुबके रहने को मजबूर हुए। बाजारों में भी सन्नाटा छा गया। बारिश के कारण क्षेत्र के सभी छोटी-मोटी नदियां नाले उफान पर रहे। वहीं पतराडा गांव में एक नाले में आई बाढ़ में किसान विजय कुमार की एक भैंस बह गई। संवाद
मेेंढर में दिन भर होती रही बारिश
मेंढर। उपजिले में शनिवार सुबह से ही रुक रुक कर वर्षा का सिलसिला चलता रहा। बीच-बीच में भारी बारिश भी होने से मेंढर के नदी नालों में पानी का स्तर बढ़ गया है। मेंढर के नक्का मंझारी इलाके में बारिश से एक रिहायशी मकान को कुछ नुकसान भी पहुंचा। मगर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। मेंढर निवासी महेश कुमार, राजेश कुमार, राम कुमार, मुहम्मद इस्माइल और बंसी लाल का कहना था कि इस बार सावन माह में काफी देर के बाद इतनी ज्यादा बारिश हो रही है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया। लोग काफी डरे हुए हैं। क्योंकि बाकी के इलाकों में हो रहे नुकसान को देख कर डर बना हुआ है। शाम होने तक मौसम में कुछ हद तक बदलाव आया और आसमान साफ भी हुआ और उमस भी महसूस होने लगी। संवाद
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इसके अलावा 24 कच्चे घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि 6 मवेशी शेड क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगातार बारिश के कारण 4 दिन में 15 मवेशियों की मौत हो हुई है, जबकि तेज नदी नालों में बहने से 3 लोगों की मौत हुई है। जिले में अचानक आई बाढ़। हाल ही में लगातार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने जिले के कोटरंका में फसलों और कच्चे घरों (मिट्टी के घरों) को भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के पीड़ित लोगों और पंचों सरपंचों ने एलजी सरकार से प्रभावित गरीब लोगों के लिए उपयुक्त मुआवजे एवं राहत की अपील की है। पांच दिन के दौरान मूसलाधार बारिश ने फसलों, फलों के पेड़ों और संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने बताया कि राजस्व टीमों को नुकसान का पूरा ब्योरा तैयार करने में बहुत समय लगेगा, जबकि प्रभावित गरीब लोगों को राज्य सरकार से तत्काल मदद की जरूरत है। सबसे अधिक प्रभावित तहसीलों में चासाना, बुद्धल और कोटरंका शामिल हैं, इन पंचायतों में मूसलाधार बारिश, बाढ़, भूस्खलन से प्रभावित लोगों को प्रशासन से तत्काल मदद की जरूरत है। लोगों ने राजस्व अधिकारियों द्वारा प्रभावित लोगों का निष्पक्ष और पारदर्शी सर्वेक्षण करने की मांग की। इन क्षेत्रों में लगभग 80 प्रतिशत परिवार पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं और भारी बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, किसान भारी चिंता में हैं।
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ये प्रभावित लोग फसलों और फलों के पेड़ों को भारी नुकसान के अलावा देश के अन्य राज्यों में मजदूर के रूप में काम करने वाले अपने परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए भी चिंतित हैं। उन्होंने एलजी प्रशासन से जल्द प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा, राहत देने की अपील की है।
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मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
पतराडा गांव में नाले में आई बाढ़ से एक भैैंस बह गई
सुंदरबनी । शनिवार दोपहर शुरू हुई मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मूसलाधार बारिश के बीच लोग घरों के अंदर दुबके रहने को मजबूर हुए। बाजारों में भी सन्नाटा छा गया। बारिश के कारण क्षेत्र के सभी छोटी-मोटी नदियां नाले उफान पर रहे। वहीं पतराडा गांव में एक नाले में आई बाढ़ में किसान विजय कुमार की एक भैंस बह गई। संवाद
मेेंढर में दिन भर होती रही बारिश
मेंढर। उपजिले में शनिवार सुबह से ही रुक रुक कर वर्षा का सिलसिला चलता रहा। बीच-बीच में भारी बारिश भी होने से मेंढर के नदी नालों में पानी का स्तर बढ़ गया है। मेंढर के नक्का मंझारी इलाके में बारिश से एक रिहायशी मकान को कुछ नुकसान भी पहुंचा। मगर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। मेंढर निवासी महेश कुमार, राजेश कुमार, राम कुमार, मुहम्मद इस्माइल और बंसी लाल का कहना था कि इस बार सावन माह में काफी देर के बाद इतनी ज्यादा बारिश हो रही है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया। लोग काफी डरे हुए हैं। क्योंकि बाकी के इलाकों में हो रहे नुकसान को देख कर डर बना हुआ है। शाम होने तक मौसम में कुछ हद तक बदलाव आया और आसमान साफ भी हुआ और उमस भी महसूस होने लगी। संवाद