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जम्मू-कश्मीर के हालात के लिए केंद्र जिम्मेदार : उमर
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राजोरी। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए जम्मू-कश्मीर के वर्तमान हालात के लिए उसे जिम्मेदार बताया है। वह कालाकोट में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
पुंछ-राजोरी के दौरे पर निकले उमर ने जनसभा के बाद कालाकोट में पत्रकारों से कहा कि कश्मीर घाटी में लक्षित हत्याओं के लिए सरकार जिम्मेदार है। यह बात सरकार से पूछी जानी चाहिए कि घाटी में अल्पसंख्यक नागरिकों की लक्षित हत्याएं कब रुकेंगी, क्योंकि जब सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया तो बड़े-बड़े सपने दिखाए कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन यहां के हालात 5 अगस्त 2019 से पहले से भी बदतर हो चुके हैं। सरकार को जनता के इन सवालों के जवाब देने होंगे कि यदि 370 को हटाए ढाई साल हो गए हैं तो आज भी घाटी में हत्याएं क्यों हो रही है।
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पिता के बयान का किया समर्थन
उमर ने पिता डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि फ़ारूक़ साहब ने कहा था कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म का इस्तेमाल यहां नफरत फैलाने के लिए हो रहा है और यह सही है। उमर ने कहा कि ऐसे कश्मीरी पंडित हैं जो मानते हैं कि उनके कश्मीर वापस जाने में फिल्म रुकावट बन चुकी है।
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चुनाव पर फैसला आयुक्त लेंगे
प्रदेश में होने वाले चुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर ने कहा कि चुनाव का निर्णय आयुक्त को लेना है। हमें पता है कि जनता चाहती है कि चुनाव जल्दी हो, ताकि उनको अपनी मर्जी की सरकार मिले, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग अब उपराज्यपाल प्रशासन से तंग आ चुके हैं। वह स्थिर सरकार चाहते हैं।
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आम जनता महंगाई से परेशान
आज बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार चरम पर है, लोग परेशानी के मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, परंतु सरकार को आम लोगों की चिंता नहीं है। कश्मीर के वर्तमान हालात तब भी इतने खराब नहीं थे जब 5 अगस्त 2019 से पहले यहां अनुच्छेद 370 लागू था।
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पुंछ-राजोरी के दौरे पर निकले उमर ने जनसभा के बाद कालाकोट में पत्रकारों से कहा कि कश्मीर घाटी में लक्षित हत्याओं के लिए सरकार जिम्मेदार है। यह बात सरकार से पूछी जानी चाहिए कि घाटी में अल्पसंख्यक नागरिकों की लक्षित हत्याएं कब रुकेंगी, क्योंकि जब सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया तो बड़े-बड़े सपने दिखाए कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन यहां के हालात 5 अगस्त 2019 से पहले से भी बदतर हो चुके हैं। सरकार को जनता के इन सवालों के जवाब देने होंगे कि यदि 370 को हटाए ढाई साल हो गए हैं तो आज भी घाटी में हत्याएं क्यों हो रही है।
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पिता के बयान का किया समर्थन
उमर ने पिता डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि फ़ारूक़ साहब ने कहा था कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म का इस्तेमाल यहां नफरत फैलाने के लिए हो रहा है और यह सही है। उमर ने कहा कि ऐसे कश्मीरी पंडित हैं जो मानते हैं कि उनके कश्मीर वापस जाने में फिल्म रुकावट बन चुकी है।
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चुनाव पर फैसला आयुक्त लेंगे
प्रदेश में होने वाले चुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर ने कहा कि चुनाव का निर्णय आयुक्त को लेना है। हमें पता है कि जनता चाहती है कि चुनाव जल्दी हो, ताकि उनको अपनी मर्जी की सरकार मिले, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग अब उपराज्यपाल प्रशासन से तंग आ चुके हैं। वह स्थिर सरकार चाहते हैं।
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आम जनता महंगाई से परेशान
आज बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार चरम पर है, लोग परेशानी के मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, परंतु सरकार को आम लोगों की चिंता नहीं है। कश्मीर के वर्तमान हालात तब भी इतने खराब नहीं थे जब 5 अगस्त 2019 से पहले यहां अनुच्छेद 370 लागू था।
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