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पीएचई और आईएफ़सी के आयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू ने राजोरी का दौरा किया।
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पीएचई और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी राजोरी दौरे के दौरान बैठक कर समीक्?
- फोटो : RAJOURI
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राजोरी। जल जीवन मिशन और पीएचई परियोजनाओं और सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की प्रगति की व्यापक समीक्षा करने के लिए पीएचई और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के आयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू ने राजोरी का दौरा किया।
इस दौरान आयोजित बैठक में डीसी राजोरी मोहम्मद नजीर शेख ने बताया कि 13.27 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) की वर्तमान पानी की मांग के बदले जिले में वर्तमान पानी की उपलब्धता 6.75 एमजीडी है, मतलब मौजूदा समय में राजोरी को 6.55 एमजीडी पानी कम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पीने के पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपलब्ध जल संसाधनों को टैप करने की आवश्यकता है। वहीं पीएचई (सिविल) की साहसी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए साहू को बताया गया कि जिले में पीएचई (सिविल) की 61 योजनाएं हैं, जिसमें राजोरी डिवीजन में 29 और नौशेरा डिवीजन में 32 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से राजोरी जिले में 25 योजनाओं पर काम चल रहा है। वहीं पीएचई मकेनिकल के बारे में बताया गया कि 43 योजनाओं पर काम किया जा रहा है जिसमें से 32 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। बाकी योजनाओँ का काम मशीनरी की खरीद के बाद शुरू होगा।
बुद्धल में बनाई जा रही अनस सिंचाई नहर के बारे में बताया गया कि नहर की कुल लंबाई 6933 मीटर है और इस परियोजना पर वर्ष 2020 तक काम पूरा हो जाएगा। बैठक के दौरान कर्मचारियों और मशीनरी की कमी, खराब हो चुके पाइपों के प्रतिस्थापन के लिए धन की कमी सहित विभाग के प्रमुख मुद्दों के संबंध में एक विस्तृत चर्चा भी की गई। बैठक के दौरान साहू ने कहा कि राजौरी जिला जल जीवन मिशन के तहत तीन चरणों में कवर किया जाएगा और जल जीवन मिशन के पहले चरण के दौरान जिला राजोरी के थन्नामंडी, बुद्धल, न्यू लम्बेड़ी, सेरी और किला दरहाल शामिल हैं। उक्त क्षेत्रों के हर घर को 2020 के अंत तक 100 प्रतिशत नल के पानी के कनेक्शन से जौड़ा जाना है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे इस संबंध में डीपीआर तैयार करें और 31 दिसंबर 2019 तक या उससे पहले प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करना जल जीवन मिशन के सफल कार्यान्वयन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसे आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन परियोजनाओं पर काम के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परियोजनाओं के लिए होने वाले निर्माण कार्य उपयुक्त और टिकाऊ होने चाहिए। इसके अलावा अधिकारियों को मासिक लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए सर्वोत्तम संभव प्रयास करने को कहा गया। कमिश्नर सेक्रेटरी ने राजोरी डिवीजन और नौशेरा डिवीजन में पीएचई (सिविल) की योजनाओं को पूरा करने के लिए 15 मार्च 2020 तक की समय सीमा तय की है। उन्होंने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर को सिंचाई योजनाओं के लिए उपयुक्त डीपीआर बनाने के लिए भी कहा ताकि जिले की मांग को पूरा किया जा सके।
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इस दौरान आयोजित बैठक में डीसी राजोरी मोहम्मद नजीर शेख ने बताया कि 13.27 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) की वर्तमान पानी की मांग के बदले जिले में वर्तमान पानी की उपलब्धता 6.75 एमजीडी है, मतलब मौजूदा समय में राजोरी को 6.55 एमजीडी पानी कम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पीने के पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपलब्ध जल संसाधनों को टैप करने की आवश्यकता है। वहीं पीएचई (सिविल) की साहसी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए साहू को बताया गया कि जिले में पीएचई (सिविल) की 61 योजनाएं हैं, जिसमें राजोरी डिवीजन में 29 और नौशेरा डिवीजन में 32 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से राजोरी जिले में 25 योजनाओं पर काम चल रहा है। वहीं पीएचई मकेनिकल के बारे में बताया गया कि 43 योजनाओं पर काम किया जा रहा है जिसमें से 32 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। बाकी योजनाओँ का काम मशीनरी की खरीद के बाद शुरू होगा।
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बुद्धल में बनाई जा रही अनस सिंचाई नहर के बारे में बताया गया कि नहर की कुल लंबाई 6933 मीटर है और इस परियोजना पर वर्ष 2020 तक काम पूरा हो जाएगा। बैठक के दौरान कर्मचारियों और मशीनरी की कमी, खराब हो चुके पाइपों के प्रतिस्थापन के लिए धन की कमी सहित विभाग के प्रमुख मुद्दों के संबंध में एक विस्तृत चर्चा भी की गई। बैठक के दौरान साहू ने कहा कि राजौरी जिला जल जीवन मिशन के तहत तीन चरणों में कवर किया जाएगा और जल जीवन मिशन के पहले चरण के दौरान जिला राजोरी के थन्नामंडी, बुद्धल, न्यू लम्बेड़ी, सेरी और किला दरहाल शामिल हैं। उक्त क्षेत्रों के हर घर को 2020 के अंत तक 100 प्रतिशत नल के पानी के कनेक्शन से जौड़ा जाना है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे इस संबंध में डीपीआर तैयार करें और 31 दिसंबर 2019 तक या उससे पहले प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करना जल जीवन मिशन के सफल कार्यान्वयन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसे आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन परियोजनाओं पर काम के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परियोजनाओं के लिए होने वाले निर्माण कार्य उपयुक्त और टिकाऊ होने चाहिए। इसके अलावा अधिकारियों को मासिक लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए सर्वोत्तम संभव प्रयास करने को कहा गया। कमिश्नर सेक्रेटरी ने राजोरी डिवीजन और नौशेरा डिवीजन में पीएचई (सिविल) की योजनाओं को पूरा करने के लिए 15 मार्च 2020 तक की समय सीमा तय की है। उन्होंने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर को सिंचाई योजनाओं के लिए उपयुक्त डीपीआर बनाने के लिए भी कहा ताकि जिले की मांग को पूरा किया जा सके।
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