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अवैध खनन से नदी-नाले और पुल खतरे में
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राजोरी। जिले में अवैध खनन से जहां नदी नालों को नुकसान पहुंच रहा है वहीं पीएचई का बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हो रहा है। कार्रवाई न करने पर लोगों ने भूविज्ञान और खनन विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार भूविज्ञान और खनन विभाग द्वारा अनुमोदित वैज्ञानिक योजना को जिले में पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है। अधिकांश नदी नालों में बड़े पैमाने पर अवैज्ञानिक और अवैध खनन चल रहा है। इससे सार्वजनिक संपत्तियां जैसे डग वैल, सड़कें, पुल, प्रोटेक्शन वॉल व सिंचाई के लिए बनाई गई नहरें आदि को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिले के गंभीर ब्राह्मणा से लेकर सुंदरबनी तक और खांडली क्षेत्र से लेकर कालाकोट तक सभी नदी नालों में अवैध एवं अवैज्ञानिक खनन धड़ल्ले से जारी है। नदी नालों में खनन के लिए खनन माफिया जेसीबी और पोकलेन मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं। अवैध खनन के चलते संगमबडून, पलमा, दरहाली और कल्लर आदि क्षेत्रों में पीएचई विभाग के स्टोरेज वैल पर बुरा प्रभाव पड़ा है, जिससे विभाग के बुनियादी ढांचे को इतनी अधिक क्षति पहुंची है कि उससे आम जनता को सप्लाई होने वाले पेयजल पर भी प्रभाव पड़ा है। शहर की सुखतोई नदी में करशरमोड़ टंडवाल से लेकर धेरियां तक करीब 500 मीटर इलाके में अवैध खनन किया गया है कि इससे क्षेत्र के पंपिंग स्टेशन व शमशानघाट को खतरा पैदा हो गया है। इतना ही नहीं इसने टंडवाल पुल की नींव को र्भी खतरे में डाल दिया है। आलम यह है कि कई नदी नालों में तो चार से पांच फुट के करीब गहरे गड्ढे बन गए हैं जिससे किसी के भी डूबने की संभावना बढ़ गई है।
रोक लगाने को टीमें गठित की हैं : डीसी
खनन नियमों की बात करें तो बाढ़ तटबंध, सड़क से 50 मीटर तक, पुल, जल जलाशयों, डग वैल के 500 मीटर अपस्ट्रीम डाउनस्ट्रीम खनन प्रतिबंधित है, लेकिन राजोरी में इन सभी नियमों को ताक पर रखकर खनन जारी है। वहीं इस संबंध में डीसी राजोरी एमए असद से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि अवैध खनन के बारे में बहुत शिकायतें मिल रही हैं। इस पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों की एक टीम गठित की गई है, जोकि जमीनी स्तर पर जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी।
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जानकारी के अनुसार भूविज्ञान और खनन विभाग द्वारा अनुमोदित वैज्ञानिक योजना को जिले में पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है। अधिकांश नदी नालों में बड़े पैमाने पर अवैज्ञानिक और अवैध खनन चल रहा है। इससे सार्वजनिक संपत्तियां जैसे डग वैल, सड़कें, पुल, प्रोटेक्शन वॉल व सिंचाई के लिए बनाई गई नहरें आदि को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिले के गंभीर ब्राह्मणा से लेकर सुंदरबनी तक और खांडली क्षेत्र से लेकर कालाकोट तक सभी नदी नालों में अवैध एवं अवैज्ञानिक खनन धड़ल्ले से जारी है। नदी नालों में खनन के लिए खनन माफिया जेसीबी और पोकलेन मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं। अवैध खनन के चलते संगमबडून, पलमा, दरहाली और कल्लर आदि क्षेत्रों में पीएचई विभाग के स्टोरेज वैल पर बुरा प्रभाव पड़ा है, जिससे विभाग के बुनियादी ढांचे को इतनी अधिक क्षति पहुंची है कि उससे आम जनता को सप्लाई होने वाले पेयजल पर भी प्रभाव पड़ा है। शहर की सुखतोई नदी में करशरमोड़ टंडवाल से लेकर धेरियां तक करीब 500 मीटर इलाके में अवैध खनन किया गया है कि इससे क्षेत्र के पंपिंग स्टेशन व शमशानघाट को खतरा पैदा हो गया है। इतना ही नहीं इसने टंडवाल पुल की नींव को र्भी खतरे में डाल दिया है। आलम यह है कि कई नदी नालों में तो चार से पांच फुट के करीब गहरे गड्ढे बन गए हैं जिससे किसी के भी डूबने की संभावना बढ़ गई है।
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रोक लगाने को टीमें गठित की हैं : डीसी
खनन नियमों की बात करें तो बाढ़ तटबंध, सड़क से 50 मीटर तक, पुल, जल जलाशयों, डग वैल के 500 मीटर अपस्ट्रीम डाउनस्ट्रीम खनन प्रतिबंधित है, लेकिन राजोरी में इन सभी नियमों को ताक पर रखकर खनन जारी है। वहीं इस संबंध में डीसी राजोरी एमए असद से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि अवैध खनन के बारे में बहुत शिकायतें मिल रही हैं। इस पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों की एक टीम गठित की गई है, जोकि जमीनी स्तर पर जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी।
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