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उच्च शिक्षा में कोरोना के कारण आईं चुनौतियों पर चर्चा
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राजोरी। उच्च शिक्षा पर कोविड-19 के प्रभाव पर दो सप्ताह का सुविधा विकास प्रक्रिया बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय राजोेरी में शुरू हआ। जिसमें चुनौतियां, रणनीतियां और नवाचार पर चर्चा हुई। उक्त कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर हास्पिटैलिटी एंड टूरिज्म की ओर से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना और कोविड -19 महामारी के कारण उच्च शिक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।
बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अकबर मसूद ने कार्यक्रम के सफल समापन पर केंद्र को बधाई दी। प्रोफेसर अकबर ने कहा कि ऐसे समय में जब कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा एक बड़ी कठिनाई से गुजर रही है।
बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय ने अकादमिक उन्नति के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में स्थानांतरित होकर बदले हुए परिदृश्य को सफलतापूर्वक निभाया है। प्रोफेसर अकबर ने उल्लेख किया कि शिक्षण और सीखने के आभासी प्रक्रिया के लिए संकाय सदस्यों के उन्मुखीकरण की आवश्यकता है। प्रोफेसर अकबर ने छात्रों को विश्व स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नवीनतम साधनों और विधियों को अपनाने के लिए संकाय को प्रोत्साहित किया। वहीं इस अवसर पर प्रोफेसर इकबाल परवेज ने आयोजन के लिए केंद्र के प्रयासों की सराहना की। प्रोफेसर इकबाल ने उल्लेख किया कि शिक्षण और सीखने का मिश्रित तरीका शिक्षा का भविष्य है। इससे पहले डा. दानिश इकबाल रैना उपनिदेशक सेंटर फॉर हास्पिटैलिटी एंड टूरिज्म और एफडीपी के संयोजक ने संक्षिप्त रिपोर्ट पेश की। संकट के समय में शिक्षकों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी महामारी ज्ञान प्रदान करने और आत्मसात करने में बाधक नहीं हो सकती है। डा. परवेज अब्दुल्ला ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे और कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित उत्साह के लिए प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। एफडीपी को भारत और विदेशों से भारी भागीदारी प्राप्त हुई। इस अवसर पर डा. कफी अहमद, डा. जतिंदर कुमार, डा. विनय कुमार बीजीएसबीयू के संकाय सदस्य और शोध विद्वान मौजूद रहे।
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बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अकबर मसूद ने कार्यक्रम के सफल समापन पर केंद्र को बधाई दी। प्रोफेसर अकबर ने कहा कि ऐसे समय में जब कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा एक बड़ी कठिनाई से गुजर रही है।
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बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय ने अकादमिक उन्नति के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में स्थानांतरित होकर बदले हुए परिदृश्य को सफलतापूर्वक निभाया है। प्रोफेसर अकबर ने उल्लेख किया कि शिक्षण और सीखने के आभासी प्रक्रिया के लिए संकाय सदस्यों के उन्मुखीकरण की आवश्यकता है। प्रोफेसर अकबर ने छात्रों को विश्व स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नवीनतम साधनों और विधियों को अपनाने के लिए संकाय को प्रोत्साहित किया। वहीं इस अवसर पर प्रोफेसर इकबाल परवेज ने आयोजन के लिए केंद्र के प्रयासों की सराहना की। प्रोफेसर इकबाल ने उल्लेख किया कि शिक्षण और सीखने का मिश्रित तरीका शिक्षा का भविष्य है। इससे पहले डा. दानिश इकबाल रैना उपनिदेशक सेंटर फॉर हास्पिटैलिटी एंड टूरिज्म और एफडीपी के संयोजक ने संक्षिप्त रिपोर्ट पेश की। संकट के समय में शिक्षकों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी महामारी ज्ञान प्रदान करने और आत्मसात करने में बाधक नहीं हो सकती है। डा. परवेज अब्दुल्ला ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे और कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित उत्साह के लिए प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। एफडीपी को भारत और विदेशों से भारी भागीदारी प्राप्त हुई। इस अवसर पर डा. कफी अहमद, डा. जतिंदर कुमार, डा. विनय कुमार बीजीएसबीयू के संकाय सदस्य और शोध विद्वान मौजूद रहे।
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