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कथा में श्रीराम के विवाह उत्सव का प्रसंग सुनाया
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नौशेरा। रघुनाथ मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में आशुतोष महाराज के शिष्या साध्वी गरिमा भारती ने शुक्रवार को प्रभु श्रीराम के विवाह उत्सव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि ऋषि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम जनकपुरी में सीता स्वयंवर में सम्मिलित होते हैं। शिव धनुष को तोड़कर माता जानकी का वरण करते हैं।
दोनों ही नगरों जनकपुरी और अयोध्या में सभी अति प्रसन्न होते हैं। चारों तरफ खुशियों का माहौल रहता है। सभी एक दूसरे को बधाई देते हैं। साध्वी ने बताया श्रीराम व माता जानकी का विवाह उत्सव अनेक गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य से सराबोर है। यह आत्मा परमात्मा के पवित्र मिलन का प्रतीक है, और ऋषि विश्वामित्र इस मिलन के प्रमुख सूत्रधार हैं। जो एक पूर्ण सतगुरु के प्रतीक हैं। एक पूर्ण सतगुरु की शरण में पहुंचकर एक जिज्ञासु प्रभु के दिव्य एवं अलौकिक ज्योतिर्मय रूप का दर्शन अंतर जगत में प्राप्त करता है। इसके बाद नित्य नियम से ध्यान साधना करता हुआ साधक अपनी मंजिल को प्राप्त करता है। ध्यान मात्र आंखें मूंद कर बैठना नहीं है। अंतर जगत में प्रभु के दिव्य रूप का दर्शन कर उस पर मन को एकाग्र कर बैठना ध्यान कहलाता है।
कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, और आरती के साथ कथा को विराम दिया गया।
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दोनों ही नगरों जनकपुरी और अयोध्या में सभी अति प्रसन्न होते हैं। चारों तरफ खुशियों का माहौल रहता है। सभी एक दूसरे को बधाई देते हैं। साध्वी ने बताया श्रीराम व माता जानकी का विवाह उत्सव अनेक गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य से सराबोर है। यह आत्मा परमात्मा के पवित्र मिलन का प्रतीक है, और ऋषि विश्वामित्र इस मिलन के प्रमुख सूत्रधार हैं। जो एक पूर्ण सतगुरु के प्रतीक हैं। एक पूर्ण सतगुरु की शरण में पहुंचकर एक जिज्ञासु प्रभु के दिव्य एवं अलौकिक ज्योतिर्मय रूप का दर्शन अंतर जगत में प्राप्त करता है। इसके बाद नित्य नियम से ध्यान साधना करता हुआ साधक अपनी मंजिल को प्राप्त करता है। ध्यान मात्र आंखें मूंद कर बैठना नहीं है। अंतर जगत में प्रभु के दिव्य रूप का दर्शन कर उस पर मन को एकाग्र कर बैठना ध्यान कहलाता है।
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कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, और आरती के साथ कथा को विराम दिया गया।