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धरा पर अधर्म, पापाचार, दुराचार बढ़ता है तब प्रभु का अवतरण होता है
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से चल रही श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु।
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नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से त्रियाठ में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के नजदीक चल रही श्रीराम कथा में श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सौम्या भारती ने बुधवार को श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग सुनाया। साध्वी ने बताया कि जब-जब धरा पर धर्म की हानि होती है, धरा पर अधर्म, पापाचार, दुराचार बढ़ता है, तब प्रभु का अवतरण होता है।
कथा वाचिक ने कहा कि प्रभु का जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य और अलौकिक होते हैं, जिन्हें साधारण बुद्धि से नहीं समझा जा सकता है। प्रभु की दिव्य लीलाओं को समझने के लिए दिव्य ज्ञान की आवश्यकता है। एक पूर्ण सतगुरु जब मनुष्य के जीवन में आता है, ऐसा ही दिव्य ज्ञान दिव्य दृष्टि का उन्मूलन कर अंतर में प्रभु का दर्शन करवा कर प्रकट कर देता है। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि जब उन्हें विमल विलोचन प्राप्त हुआ, तब ही अंतर्मन का अंधकार दूर हुआ। उसके बाद ही प्रभु राम के चरित्र को मैंने जाना और जो प्रभु मेरे लिए रहस्य थे। प्रभु दर्शन अध्यात्म का प्रथम एवं अनिवार्य पड़ाव है, जिसे जीवन में एक संत के बिना पूरा करना असंभव माना गया है।
प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, अशोक कुमार सरपंच सरियो, बोधराज शर्मा त्रियाठ, सीमा देवी सरपंच त्रियाठ, राज कुमार, सुषमा शर्मा अध्यापिका रेन्सू, श्याम लाल शर्मा त्रियाठ इत्यादि विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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कथा वाचिक ने कहा कि प्रभु का जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य और अलौकिक होते हैं, जिन्हें साधारण बुद्धि से नहीं समझा जा सकता है। प्रभु की दिव्य लीलाओं को समझने के लिए दिव्य ज्ञान की आवश्यकता है। एक पूर्ण सतगुरु जब मनुष्य के जीवन में आता है, ऐसा ही दिव्य ज्ञान दिव्य दृष्टि का उन्मूलन कर अंतर में प्रभु का दर्शन करवा कर प्रकट कर देता है। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि जब उन्हें विमल विलोचन प्राप्त हुआ, तब ही अंतर्मन का अंधकार दूर हुआ। उसके बाद ही प्रभु राम के चरित्र को मैंने जाना और जो प्रभु मेरे लिए रहस्य थे। प्रभु दर्शन अध्यात्म का प्रथम एवं अनिवार्य पड़ाव है, जिसे जीवन में एक संत के बिना पूरा करना असंभव माना गया है।
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प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, अशोक कुमार सरपंच सरियो, बोधराज शर्मा त्रियाठ, सीमा देवी सरपंच त्रियाठ, राज कुमार, सुषमा शर्मा अध्यापिका रेन्सू, श्याम लाल शर्मा त्रियाठ इत्यादि विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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