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भक्त हनुमान ने लंका पहुंच कर सीता माता का लगाया पता
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नौशेरा ठाकुरद्वारा में चल रही रामलीला का दृश्य
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नौशेरा। श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर संतोषदास मौनी महाराज की देखरेख में अयोध्या से आए कलाकारों की टीम हर रोज ठाकुरद्वारा में रामलीला कर रही है। वीरवार रात्रि रामलीला मंचन में हनुमान जी सीता माता की खोज करते-करते अशोक वाटिका पहुंचते हैं। जहां सीता माता की आज्ञा पाकर हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाने जाते हैं। वहां राक्षसों के रोके जाने पर लड़ाई होती है। हनुमान जी ने रावण के पुत्र अक्षय कुमार समेत कई राक्षसों का वध किया।
हनुमान जी ने रावण को बहुत समझाया, लकिन रावण नहीं माना। रावण की आज्ञा से हनुमान जी की पूंछ में आग लगाकर पूरी लंका में घुमाया। हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी। मात्र एक भगवान के परम भक्त विभीषण की कुटिया ही बची। जहां भगवान की भक्ति और भगवान राम नाम का जाप होता था। रामलीला का मंचन को देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। इसके बाद रामजी की आरती गाई गई।
नौशेरा में रामकथा के समापन पर हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की वर्षा
हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
नौशेरा। ठाकुरद्वारा में चल रही रामकथा के समापन पर शुक्रवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया व भारत के विभिन्न हिस्सों से संत महात्माओं ने सैकड़ों की संख्या में पधार कर नौशेरा की धरती को पावन किया। श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर संतोष दास मुनि महाराज की देखरेख में चल रही श्रीराम कथा में श्रीश्री 1008 इंद्रेश्वरानंद सरस्वती ने प्रवचनों में कहा कि केवट ने जब नाव में बिठा कर रामजी को गंगा पार किया और रामजी जब केवट को उतरती में देने के लिए अंगूठी देने लगे तब केवट ने प्रभु राम से कहा, रामजी मैंने तुम्हें गंगा पार किया है। तुम मुझे भवसागर से पार करना, गंगा पार कर राम लक्ष्मण सीता, पंचवटी में पहुंचे, व्यक्ति जब बहुत दुखी हो उसको सत्संग सुनाइए। सत्संग सभी दुखों का नाश एवं मुक्ति दिलाता है। रामजी ने भरत को संत की उपाधि दी। रामजी ने वनवास के दौरान जंगल में चुन-चुन कर राक्षसों का वध किया और ऋषि-मुनियों की रक्षा की। इसलिए हम सबको राष्ट्रीय की रक्षा के लिए कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रभु राम विनी की कुटिया में पहुंचते हैं और बिलिनी भावविभोर होकर प्रभु का वर्षों से इंतजार कर रही थी। बिल्ली ने प्रभु को फूलों की सेज पर बिठाया और रामजी की सेवा करने के लिए घर में रखे हुए बेर बिलनी चख चख कर रामजी को खिलाती है, राम जी बिलनी के जूठे बेर बड़े प्रेम से खाते हैं।
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कथा समापन पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा राम मंदिर ठाकुरद्वारा मंदिर के साथ-साथ पूरे नगर में की गई। प्रशासन ने हजारों की संख्या में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए। इस मौके पर एडिशनल डीसी सुखदेव सिंह सम्याल भी उपस्थित रहे।
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हनुमान जी ने रावण को बहुत समझाया, लकिन रावण नहीं माना। रावण की आज्ञा से हनुमान जी की पूंछ में आग लगाकर पूरी लंका में घुमाया। हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी। मात्र एक भगवान के परम भक्त विभीषण की कुटिया ही बची। जहां भगवान की भक्ति और भगवान राम नाम का जाप होता था। रामलीला का मंचन को देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। इसके बाद रामजी की आरती गाई गई।
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नौशेरा में रामकथा के समापन पर हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की वर्षा
हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
नौशेरा। ठाकुरद्वारा में चल रही रामकथा के समापन पर शुक्रवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया व भारत के विभिन्न हिस्सों से संत महात्माओं ने सैकड़ों की संख्या में पधार कर नौशेरा की धरती को पावन किया। श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर संतोष दास मुनि महाराज की देखरेख में चल रही श्रीराम कथा में श्रीश्री 1008 इंद्रेश्वरानंद सरस्वती ने प्रवचनों में कहा कि केवट ने जब नाव में बिठा कर रामजी को गंगा पार किया और रामजी जब केवट को उतरती में देने के लिए अंगूठी देने लगे तब केवट ने प्रभु राम से कहा, रामजी मैंने तुम्हें गंगा पार किया है। तुम मुझे भवसागर से पार करना, गंगा पार कर राम लक्ष्मण सीता, पंचवटी में पहुंचे, व्यक्ति जब बहुत दुखी हो उसको सत्संग सुनाइए। सत्संग सभी दुखों का नाश एवं मुक्ति दिलाता है। रामजी ने भरत को संत की उपाधि दी। रामजी ने वनवास के दौरान जंगल में चुन-चुन कर राक्षसों का वध किया और ऋषि-मुनियों की रक्षा की। इसलिए हम सबको राष्ट्रीय की रक्षा के लिए कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रभु राम विनी की कुटिया में पहुंचते हैं और बिलिनी भावविभोर होकर प्रभु का वर्षों से इंतजार कर रही थी। बिल्ली ने प्रभु को फूलों की सेज पर बिठाया और रामजी की सेवा करने के लिए घर में रखे हुए बेर बिलनी चख चख कर रामजी को खिलाती है, राम जी बिलनी के जूठे बेर बड़े प्रेम से खाते हैं।
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कथा समापन पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा राम मंदिर ठाकुरद्वारा मंदिर के साथ-साथ पूरे नगर में की गई। प्रशासन ने हजारों की संख्या में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए। इस मौके पर एडिशनल डीसी सुखदेव सिंह सम्याल भी उपस्थित रहे।