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चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) राजोरी ने 2 अनाथ बच्चों को एसओएस गांव भेजा
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राजोरी। जिले की कोटरंका सब डिवीजन के दूरदराज क्षेत्र के दो नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति ने एसओएस गांव जम्मू में भेज कर उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
जानकारी के अनुसार, कंडी गांव के दो बच्चों के माता पिता की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी। वे दोनों बच्चे अपने किन्हीं परिजनों के पास रह रहे थे। समिति ने दोनों बच्चों के बारे में जानकारी ली और दोनों के परिजनों से संपर्क किया। परिजनों की लिखित मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चों को एसओएस गांव भेजा गया।
इस अवसर पर बाल कल्याण समिति की कार्यकारी अध्यक्ष अनुराधा शर्मा ने बताया कि दोनों अनाथ बच्चों को एसओएस गांव भेजने के पूरे मामले को किशोर न्याय अधिनियम के मानदंडों के अनुसार अंजाम दिया गया है। सीनियर सह कार्यकर्ता मीना सिंह के नेतृत्व में एसओएस गांव की टीम दोनों बच्चों को लेने के लिए समिति कार्यालय पहुंची, जहां दोनों को एसओएस टीम को सौंपने से पहले समिति ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज किए।
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क्या है एसओएस गांव
एसओएस चिल्ड्रन विलेज एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संगठन है। संगठन जरूरतमंद बच्चों को मानवीय और विकासात्मक सहायता प्रदान करता है और उनके हितों और अधिकारों की रक्षा करता है। बता दें कि जम्मू में एसओएस चिल्ड्रन विलेज ने अपनी गतिविधियों की शुरुआत वर्ष 1998 में की थी। वर्तमान में गांव में परिवार आधारित देखभाल कार्यक्रम के तहत 12 परिवार के घरों में सौ से अधिक बच्चे रह रहे हैं। इन बच्चों को नौ एसओएस माताओं की देखरेख में रखा जाता है, और पांच अन्य एसओएस महिलाएं सहायता करती हैं। यहां के बच्चे नियमित स्कूलों और कॉलेजों में जाते हैं। सभी बच्चों के शैक्षणिक परिणामों ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है। न केवल उन्हें अपनी पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, बल्कि उन्हें अन्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
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जानकारी के अनुसार, कंडी गांव के दो बच्चों के माता पिता की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी। वे दोनों बच्चे अपने किन्हीं परिजनों के पास रह रहे थे। समिति ने दोनों बच्चों के बारे में जानकारी ली और दोनों के परिजनों से संपर्क किया। परिजनों की लिखित मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चों को एसओएस गांव भेजा गया।
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इस अवसर पर बाल कल्याण समिति की कार्यकारी अध्यक्ष अनुराधा शर्मा ने बताया कि दोनों अनाथ बच्चों को एसओएस गांव भेजने के पूरे मामले को किशोर न्याय अधिनियम के मानदंडों के अनुसार अंजाम दिया गया है। सीनियर सह कार्यकर्ता मीना सिंह के नेतृत्व में एसओएस गांव की टीम दोनों बच्चों को लेने के लिए समिति कार्यालय पहुंची, जहां दोनों को एसओएस टीम को सौंपने से पहले समिति ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज किए।
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क्या है एसओएस गांव
एसओएस चिल्ड्रन विलेज एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संगठन है। संगठन जरूरतमंद बच्चों को मानवीय और विकासात्मक सहायता प्रदान करता है और उनके हितों और अधिकारों की रक्षा करता है। बता दें कि जम्मू में एसओएस चिल्ड्रन विलेज ने अपनी गतिविधियों की शुरुआत वर्ष 1998 में की थी। वर्तमान में गांव में परिवार आधारित देखभाल कार्यक्रम के तहत 12 परिवार के घरों में सौ से अधिक बच्चे रह रहे हैं। इन बच्चों को नौ एसओएस माताओं की देखरेख में रखा जाता है, और पांच अन्य एसओएस महिलाएं सहायता करती हैं। यहां के बच्चे नियमित स्कूलों और कॉलेजों में जाते हैं। सभी बच्चों के शैक्षणिक परिणामों ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है। न केवल उन्हें अपनी पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, बल्कि उन्हें अन्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।