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राजोरी शहर व आस पास के इलाकों मे बिजली सप्लाई आँख मिचोनी से हुई बहाल
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राजोरी ग्रिड स्टेशन द्वद्ग एमईएस कर्मी काम करते हुए
- फोटो : RAJOURI
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राजोरी। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई बिजली समस्या उस समय बहाल हो गई जब सेना की एमईएस ने राजोरी में बिजली बहाल करने के लिए जवाहर नगर स्थित ग्रिड स्टेशन पर मोर्चा संभाला। रविवार की रात्रि को करीब 10:30 बजे सेना की एमईएस ने ग्रिड स्टेशन पर पहुंचकर कामकाज संभाला। करीब 2 घंटे बाद जवाहर नगर और कुछ अन्य वार्डोें में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
एमईएस के कर्मचारी और इंजीनियर आराम से नहीं बैठे। वह अन्य फीडर को चार्ज करके बिजली आपूर्ति करने के काम में जुटे रहे। सोमवार सुबह होते-होते राजोेरी में कुछ और वार्डों में बिजली आपूर्ति को बहाल कर दिया गया। वहीं सेना की एमईएस ने दोपहर तक जवाहर नगर के 7 में से 5 फीडर को रिचार्ज करके आपूर्ति बहाल कर दी, जबकि 2 फीडर पर काम जारी रहा। सेना की एमईएस द्वारा मोर्चा संभालते ही राजोरी में बिजली समस्या का समाधान कुछ हद तक हो गया, लेकिन अभी भी आपूर्ति पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाई।
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पहाड़ी इलाके अभी भी अंधेरे में डूबे
जिले के पहाड़ी इलाकोें में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कामकाज की देखभाल करने के लिए उपायुक्त विकास कुंडल ने विशेष टीमें गठित की हैं। समाचार लिखे जाने तक किसी भी पहाड़ी इलाके में बिजली बहाल नहीं की जा सकी। जिले के पहाड़ी इलाके जैसे थन्नामंडी, दरहाल, कोटरंका, बुद्धल, मंजाकोट सभी करीब 72 घंटे से अंधेरे में डूबे हैं। हालांकि प्रशासन के आदेश पर विभिन्न रिसीविंग स्टेशनों पर राजस्व विभाग पुलिस ने आपूर्ति बहाल करने के कामकाज की देखरेख तो शुरू कर दी है। उक्त पहाड़ी इलाकों में ठंड के चलते आपूर्ति ठप होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल अभी भी जारी
मांगोें के समर्थन में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। कर्मचारियों व अधिकारियों ने एक्सईएन कार्यालय में धरना प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी करने के लिए उनको लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए ग्रिड स्टेशन सेना के हवाले तो कर दिए है, लेकिन यदि सेना द्वारा बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान कोई हादसा होता है, किसी ट्रांसफार्मर को या बिजली की एचटी लाइन को कोई नुकसान पहुंचता है या किसी व्यक्ति की जान पर खतरा बनता है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मैनपावर की कमी के चलते आपूर्ति बहाल करना संभव नहीं हो पर रहा है।
-संदीप सेठ, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर
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एमईएस के कर्मचारी और इंजीनियर आराम से नहीं बैठे। वह अन्य फीडर को चार्ज करके बिजली आपूर्ति करने के काम में जुटे रहे। सोमवार सुबह होते-होते राजोेरी में कुछ और वार्डों में बिजली आपूर्ति को बहाल कर दिया गया। वहीं सेना की एमईएस ने दोपहर तक जवाहर नगर के 7 में से 5 फीडर को रिचार्ज करके आपूर्ति बहाल कर दी, जबकि 2 फीडर पर काम जारी रहा। सेना की एमईएस द्वारा मोर्चा संभालते ही राजोरी में बिजली समस्या का समाधान कुछ हद तक हो गया, लेकिन अभी भी आपूर्ति पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाई।
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पहाड़ी इलाके अभी भी अंधेरे में डूबे
जिले के पहाड़ी इलाकोें में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कामकाज की देखभाल करने के लिए उपायुक्त विकास कुंडल ने विशेष टीमें गठित की हैं। समाचार लिखे जाने तक किसी भी पहाड़ी इलाके में बिजली बहाल नहीं की जा सकी। जिले के पहाड़ी इलाके जैसे थन्नामंडी, दरहाल, कोटरंका, बुद्धल, मंजाकोट सभी करीब 72 घंटे से अंधेरे में डूबे हैं। हालांकि प्रशासन के आदेश पर विभिन्न रिसीविंग स्टेशनों पर राजस्व विभाग पुलिस ने आपूर्ति बहाल करने के कामकाज की देखरेख तो शुरू कर दी है। उक्त पहाड़ी इलाकों में ठंड के चलते आपूर्ति ठप होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल अभी भी जारी
मांगोें के समर्थन में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। कर्मचारियों व अधिकारियों ने एक्सईएन कार्यालय में धरना प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी करने के लिए उनको लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए ग्रिड स्टेशन सेना के हवाले तो कर दिए है, लेकिन यदि सेना द्वारा बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान कोई हादसा होता है, किसी ट्रांसफार्मर को या बिजली की एचटी लाइन को कोई नुकसान पहुंचता है या किसी व्यक्ति की जान पर खतरा बनता है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मैनपावर की कमी के चलते आपूर्ति बहाल करना संभव नहीं हो पर रहा है।
-संदीप सेठ, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर