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डिजिटल दौर मे भी लोग सड़क सुविधा से मेहरूम
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राजोरी। 21वीं सदी के इस डिजिटल दौर में जहां एक तरफ पूरा देश बहुत आगे निकल रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले की बुद्धल तहसील के दूरदराज के गुलिर गांव के लोग अभी सड़क व अन्य सुविधाओं से महरूम हैं। बुद्धल तहसील मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित गुलिर गांव के लोग आज भी पैदल यात्रा करते हैं। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का सारा सामान खुद ढो रहे हैं। इसी तरह का उदाहरण वीरवार को देखने को मिला, जब एक ट्रांसफार्मर को बल्लियों के सहारे लोग कंधे पर उठाकर ले जाते हुए देखे गए।
गुलिर से बुद्धल आकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों क़ो भी कई प्रकार की दिक्क़तें उठानी पड़ रही हैं। सरकारी पीजी कॉलेज बुद्धल और हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी बिना सड़क संपर्क के बहुत परेशानी से गुजर रहे हैं। ख़ासकर छात्राओं क़ो बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और कई छात्राएं उच्च शिक्षा पूरी ही नहीं करती हैं। पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं। इसके अलावा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी दिक्क़तें उठानी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं को कंधोें पर उठा कर बुद्धल अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर बारिश के दिनों में मरीजोें को पैदल अस्पताल तक लाना संभव नहीं होता है। इतना ही नहीं लोगों को रसोई गैस हो या राशन आदि सब कुछ कंधोें पर ढोना पड़ता है। उक्त गांव में खराब ट्रांसफार्मर बदलने के लिए भी लोगों को अपने कंधोें पर ही ढोना पड़ता है। वीरवार को लोगों ने नया ट्रांसफार्मर गांव में अपने कंधों पर उठा कर पहुंचाया तो रोष प्रकट करते हुए बताया कि गांव के लोगों को मात्र वोट लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई दशक से नेता वोट मांगते समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही दोबारा कभी नजर नहीं आते। उन्होंने उपायुक्त और उपराज्यपाल से गुहार लगते हुए कहा कि जल्द गांव में सड़क सुविधा दी जाए ताकि आम लोगों के साथ-साथ मरीजों को और विद्यार्थी वर्ग को राहत मिल सके।
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गुलिर से बुद्धल आकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों क़ो भी कई प्रकार की दिक्क़तें उठानी पड़ रही हैं। सरकारी पीजी कॉलेज बुद्धल और हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी बिना सड़क संपर्क के बहुत परेशानी से गुजर रहे हैं। ख़ासकर छात्राओं क़ो बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और कई छात्राएं उच्च शिक्षा पूरी ही नहीं करती हैं। पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं। इसके अलावा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी दिक्क़तें उठानी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं को कंधोें पर उठा कर बुद्धल अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर बारिश के दिनों में मरीजोें को पैदल अस्पताल तक लाना संभव नहीं होता है। इतना ही नहीं लोगों को रसोई गैस हो या राशन आदि सब कुछ कंधोें पर ढोना पड़ता है। उक्त गांव में खराब ट्रांसफार्मर बदलने के लिए भी लोगों को अपने कंधोें पर ही ढोना पड़ता है। वीरवार को लोगों ने नया ट्रांसफार्मर गांव में अपने कंधों पर उठा कर पहुंचाया तो रोष प्रकट करते हुए बताया कि गांव के लोगों को मात्र वोट लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई दशक से नेता वोट मांगते समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही दोबारा कभी नजर नहीं आते। उन्होंने उपायुक्त और उपराज्यपाल से गुहार लगते हुए कहा कि जल्द गांव में सड़क सुविधा दी जाए ताकि आम लोगों के साथ-साथ मरीजों को और विद्यार्थी वर्ग को राहत मिल सके।
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