फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Rajouri News ›   bijli

जिले के दूर दराज के गांवों में लकड़ी के खंभे नहीं बदले

विज्ञापन
bijli
राजोरी। पीडीडी ने अभी तक बुद्धल तहसील के गब्बर, केवल गांवों में लकड़ी के खंभे नहीं बदले हैं। हाईटेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) लाइनों के रख-रखाव पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जिले की बुद्धल तहसील के कई गांवों में अभी भी खंभों के स्थान पर लकड़ी के खंभों और पेड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे लोगों और मवेशियों की जान को खतरा है।
विज्ञापन

राजोेरी के बुद्धल कस्बे से 6 किलोमीटर दूर गब्बर और केवल गांव इसका जीता-जागता उदाहरण है। जहां लोग गांवों में बिजली के तार लाने के लिए लकड़ी के खंभे लगाने को मजबूर हैं, जबकि कुछ जगहों पर पेड़ों को बिजली की लाइनों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लोग पांच वर्ष से लोहे के खंभे के स्थान पर लकड़ी के खंभों और पेड़ों का उपयोग कर रहे हैं। क्योंकि बिजली विकास विभाग (पीडीडी) ने गांवों को लोहे के खंभे उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है।
विज्ञापन

सरपंच फारूक इंकलाब ने कहा कि तीन वर्ष से हम सुनते आ रहे हैं कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) के तहत बुद्धल ब्लॉक के लिए कुछ पोल स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन हमें अभी तक एक भी पोल नहीं मिला है। बार-बार शिकायत के बावजूद पीडीडी की ओर से कोई हमारी समस्या का जायजा लेने नहीं आता। यहां तक कि कई बार सार्वजनिक दरबारों में भी इस समस्या को उठाया गया। हमें इन लकड़ी के खंभों को चार माह के भीतर बदलना होगा। क्योंकि सर्दी में जोखिम अधिक होता है। फारूक इंकलाबी ने कहा कि बारिश के दौरान गब्बर, केवल और आसपास के गांवों के निवासी असुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि हरे पेड़ बिजली के शॉक का कारण बन सकते हैं। उन्होंने उपायुक्त से अनुरोध किया कि वे पीडीडी विभाग के अधिकारियों को बिना किसी देरी के बुद्धल प्रखंड में पोल बदलने का निर्देश दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed