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ठेकेदार ने पंचायत घर में जड़ा ताला
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ठेकेदार ने भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए बुद्धल अप्पर राजनगर पंचायत घर को झढ़ा ताला
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राजोरी। महबूबा मुफ्ती की सरकार के दौरान जिले में चीफ मिनिस्टर कमिटमेंट स्कीम (सीएमसीएस) के तहत पंचायत घरों के निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराने में विफल रहने के कारण, कई ठेकेदारों को उनके भुगतान के लिए भटकना पड़ रहा है।
ऐसे ही एक मामले में बीडीओ कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिलने पर ठेकेदार ने जिले के गब्बर पंचायत घर अपर राजनगर के निर्माणाधीन भवन में ताला लगा दिया है। ठेकेदार नजीर अहमद (पूर्व सरपंच राजनगर) ने बताया कि चीफ मिनिस्टर कमिटमेंट स्कीम के तहत 20.91 लाख रुपये की परियोजना लागत के साथ पंचायत घर भवन अपर राजनगर का शेष निर्माण कार्य मेरे पक्ष में आवंटित किया गया था। स्लैब स्तर तक के भवन के निर्माण पर करीब 12.75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। ठेकेदार के अनुसार जब संबंधित बीडीओ, जेई और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रूरल इंजीनियरिंग विंग (आरईडब्ल्यू) के कार्यालय से संपर्क किया गया तो यह पता चला कि महबूबा मुफ्ती की सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए धन जारी नहीं करा पाई थी और सरकार टूट गई थी।
सरपंच शाबिर अहमद ने बताया कि उक्त पंचायत प्रतिनिधियों के पास बीडीसी और डीडीसी के साथ अपनी आधिकारिक बैठकें करने के लिए कोई जगह नहीं है। यहां तक कि पंचायत का रिकॉर्ड रखने के लिए एक दुकान किराए पर ली है और किराए का भुगतान करने के लिए कोई धन नहीं है।
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जेई गुलाम कादिर ने बताया कि हर प्रयास के बावजूद ठेकेदार नज़ीर अहमद को देय भुगतान करने के बिलों को जमा नहीं किया जा सका। क्योंकि अभी तक कोई धनराशि जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ठेकेदार, पंचायत के निर्वाचित सदस्यों, स्थानीय राजनीतिक, सामाजिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बाद मामले को उच्च अधिकारियों के साथ उठाया गया था। उसके बाद फरवरी 2019 के महीने में तत्कालीन एसई आरईडब्ल्यू जम्मू ने अपने कार्यालय पत्र से संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की मांग की थी ताकि ऐसी परियोजनाओं के निर्माण के लिए लंबित परियोजना योजना के तहत धनराशि जारी की जा सके।
28.48 लाख रुपये की संशोधित लागत के साथ राजनगर अपर पंचायत घर के लिए डीपीआर लगभग 18 अन्य कार्यों की डीपीआर के साथ भेजी गई थी । लेकिन आज तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के प्रशासन द्वारा धनराशि जारी नहीं की गई है ।
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क्या कहते हैं अधिकारी
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। इसमें न तो ठेकेदार और न ही संबंधित इंजीनियरों (जेई और एईई) ने मेरे कार्यालय से संपर्क किया है। मैं संबंधित इंजीनियरों से पूछताछ करूंगा कि इस मामले में क्या किया जा सकता है।
-नूर अली, एक्सईएन, आरईडब्ल्यू
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ऐसे ही एक मामले में बीडीओ कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिलने पर ठेकेदार ने जिले के गब्बर पंचायत घर अपर राजनगर के निर्माणाधीन भवन में ताला लगा दिया है। ठेकेदार नजीर अहमद (पूर्व सरपंच राजनगर) ने बताया कि चीफ मिनिस्टर कमिटमेंट स्कीम के तहत 20.91 लाख रुपये की परियोजना लागत के साथ पंचायत घर भवन अपर राजनगर का शेष निर्माण कार्य मेरे पक्ष में आवंटित किया गया था। स्लैब स्तर तक के भवन के निर्माण पर करीब 12.75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। ठेकेदार के अनुसार जब संबंधित बीडीओ, जेई और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रूरल इंजीनियरिंग विंग (आरईडब्ल्यू) के कार्यालय से संपर्क किया गया तो यह पता चला कि महबूबा मुफ्ती की सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए धन जारी नहीं करा पाई थी और सरकार टूट गई थी।
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सरपंच शाबिर अहमद ने बताया कि उक्त पंचायत प्रतिनिधियों के पास बीडीसी और डीडीसी के साथ अपनी आधिकारिक बैठकें करने के लिए कोई जगह नहीं है। यहां तक कि पंचायत का रिकॉर्ड रखने के लिए एक दुकान किराए पर ली है और किराए का भुगतान करने के लिए कोई धन नहीं है।
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जेई गुलाम कादिर ने बताया कि हर प्रयास के बावजूद ठेकेदार नज़ीर अहमद को देय भुगतान करने के बिलों को जमा नहीं किया जा सका। क्योंकि अभी तक कोई धनराशि जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ठेकेदार, पंचायत के निर्वाचित सदस्यों, स्थानीय राजनीतिक, सामाजिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बाद मामले को उच्च अधिकारियों के साथ उठाया गया था। उसके बाद फरवरी 2019 के महीने में तत्कालीन एसई आरईडब्ल्यू जम्मू ने अपने कार्यालय पत्र से संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की मांग की थी ताकि ऐसी परियोजनाओं के निर्माण के लिए लंबित परियोजना योजना के तहत धनराशि जारी की जा सके।
28.48 लाख रुपये की संशोधित लागत के साथ राजनगर अपर पंचायत घर के लिए डीपीआर लगभग 18 अन्य कार्यों की डीपीआर के साथ भेजी गई थी । लेकिन आज तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के प्रशासन द्वारा धनराशि जारी नहीं की गई है ।
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क्या कहते हैं अधिकारी
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। इसमें न तो ठेकेदार और न ही संबंधित इंजीनियरों (जेई और एईई) ने मेरे कार्यालय से संपर्क किया है। मैं संबंधित इंजीनियरों से पूछताछ करूंगा कि इस मामले में क्या किया जा सकता है।
-नूर अली, एक्सईएन, आरईडब्ल्यू