{"_id":"30-34076","slug":"Rajouri-34076-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"पशुओं के लिए इस्तेमाल हो रही मुगल सराय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पशुओं के लिए इस्तेमाल हो रही मुगल सराय
Rajouri
Updated Tue, 04 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजोरी। सरकार की विधायक सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों के बाद भी मुगलों की ऐतिहासिक सराय को विकसित नहीं किया जा सका है। इस कारण यह सराय पशुओं को रखने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। सराय में मुगलों द्वारा तैयार किया ढांचा भी पूरी तरह से नष्ट हो गया है। मुगलों ने मुगल रोड पर कई तरह की यादगार संपत्ति छोड़ दी थी, जिसे सरकार बचाने में असफल हुई।
मुगल रोड पर हीरपोरा, सोख, अलियाबाद, चंडीमढ़ और थंडापानी जो सराय हैं, मुगलों द्वारा विशेष रूप से इस्तेमाल की जाती थीं, लेकिन मौजूदा समय में इनकी हालत बदतर हो गई है। इन दिनों मुगल रोड खुला हुआ है। गुज्जर बक्करवाल समुदाय के लोग राजोरी-पुंछ से कश्मीर के लिए निकल रहे हैं। इसलिए इन सरायों को अपने पशुओं के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मुगल रोड के आसपास रहने वाले लोगों का मानना है कि मुगल रोड खुलने से न सिर्फ लोग मुगल स्थलों की जानकारी ले रहे हैं, बल्कि लोगों को यहां रहने वाले वन्यजीवों की भी जानकारी मिल रही है।
राजोरी पुंछ, थन्नामंडी और दूसरे क्षेत्रों से मुगल रोड के जरिये कश्मीर जाने वाले कुछ गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के लोगों से बात करने पर जमील अहमद, शाहिद खान ने बताया कि मुगल रोड पर बनी इस सराय में रोज शाम छह बजे के बाद आकर रुकना पड़ता है। इसके सिवा उनके पास कोई चारा भी नहीं।
विज्ञापन
विधायकों ने की थी सिफारिश
करीब आठ महीने पहले रियासत के विधायकों के एक दल ने कश्मीर से राजोरी तक का सफर वाया मुगल रोड किया था। तब विधायकों ने कुछ समय इन सरायों में बिताया था। वे इससे इतने प्रभावित हुए थे कि सरकार से इन सरायों को विकसित करने के लिए विशेष योजना बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है।
राजोरी विकास प्राधिकरण की ओर से इन सरायों को विकसित करने के लिए योजना बनाई गई है। फिलहाल अभी इसकी जानकारी नहीं कि योजना कहां तक पहुंची है। जल्द ही इस दिशा में कार्य तेज किया जाएगा।
सौजन्य शर्मा, निदेशक, पर्यटन विभाग
विज्ञापन
मुगल रोड पर हीरपोरा, सोख, अलियाबाद, चंडीमढ़ और थंडापानी जो सराय हैं, मुगलों द्वारा विशेष रूप से इस्तेमाल की जाती थीं, लेकिन मौजूदा समय में इनकी हालत बदतर हो गई है। इन दिनों मुगल रोड खुला हुआ है। गुज्जर बक्करवाल समुदाय के लोग राजोरी-पुंछ से कश्मीर के लिए निकल रहे हैं। इसलिए इन सरायों को अपने पशुओं के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मुगल रोड के आसपास रहने वाले लोगों का मानना है कि मुगल रोड खुलने से न सिर्फ लोग मुगल स्थलों की जानकारी ले रहे हैं, बल्कि लोगों को यहां रहने वाले वन्यजीवों की भी जानकारी मिल रही है।
विज्ञापन
राजोरी पुंछ, थन्नामंडी और दूसरे क्षेत्रों से मुगल रोड के जरिये कश्मीर जाने वाले कुछ गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के लोगों से बात करने पर जमील अहमद, शाहिद खान ने बताया कि मुगल रोड पर बनी इस सराय में रोज शाम छह बजे के बाद आकर रुकना पड़ता है। इसके सिवा उनके पास कोई चारा भी नहीं।
विज्ञापन
विधायकों ने की थी सिफारिश
करीब आठ महीने पहले रियासत के विधायकों के एक दल ने कश्मीर से राजोरी तक का सफर वाया मुगल रोड किया था। तब विधायकों ने कुछ समय इन सरायों में बिताया था। वे इससे इतने प्रभावित हुए थे कि सरकार से इन सरायों को विकसित करने के लिए विशेष योजना बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है।
राजोरी विकास प्राधिकरण की ओर से इन सरायों को विकसित करने के लिए योजना बनाई गई है। फिलहाल अभी इसकी जानकारी नहीं कि योजना कहां तक पहुंची है। जल्द ही इस दिशा में कार्य तेज किया जाएगा।
सौजन्य शर्मा, निदेशक, पर्यटन विभाग