{"_id":"5eb4725c8ebc3e904b44c478","slug":"tufail-family-narrow-escaped-from-pakistan-shelling132","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में बाल बाल बचा तुफेल हुसैन का परिवार,चार महीनों की बच्ची घंटों रही बेहोश,गांव सोकड़ के ग्रामीणों ने पानी से किया रोजे का इफतार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में बाल बाल बचा तुफेल हुसैन का परिवार,चार महीनों की बच्ची घंटों रही बेहोश,गांव सोकड़ के ग्रामीणों ने पानी से किया रोजे का इफतार
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- फोटो : AMAR UJALA
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पुंछ।वीरवार को पाकिस्तानी सेना ने दिन भर जिले के कस्बा,कीरनी,शाहपुर सैकटरों के दर्जन भर गांव को अपनी नापाक हरकत का निशाना बनाया।जिस दोरान नियंत्रण रेखा पर शाहपुर सैक्टर के आखिरी गांव सोकड़ को निशाना बना कर पाकिस्तानी सेना ने पचास से अधिक मोर्टार दागे जोकि लोगों के घरों उपर और आस पास आ कर गिरे जिससे गांव के करीब छह मकानों को नुकसान पहुंचा।वहीं इस गोलाबारी के दोरान गांव निवासी तुफेल हुैसन का परिवार उस समय बालबाल बच गया जब उसके मकान के उपर और आस पास करीब चार पाकिस्तानी गोले आ गिरे।जिनके टुकड़े मकान की खिड़की को तोड़ते हुए उस कमरे के अंदर बिखर गए जिस कमरे में तुफेल,उसकी पत्नी और चार महीने की बेटी पलंग पर बैठे हुए थे।तुफेल का कहना हैकि शायद हमें खुदा ने बचा लिया जिसका हमने रोजा रखा हुआ था।शाम करीब तीन बजे एक के बाद एक करके चार गोले मकान के उपर और आस पास आ कर गिरने लगे तो हमें लगा कि आज हमारा बचना मुशकिल है एक गोला तो खिड़की तोड़ कर कमरे में आ गिरा और उसके टुकड़ों ने कमरे में रखी अलमारी,ट्रंक,दिवारों छत के पंखे और जिस पलंग पर हम बैठे थे उसके बिस्तर में सुरख कर दिए पर उपर वाले ने हमारी जान बख्श दी मुझे चेहरे पर हल्की सी चोट आई और मेरी पत्नी को कम में चोट आई परन्तू उसकी गोद में सो रही चार महीने की मेरी नन्ही परी पाकिस्तानी गोलों के धमकों से बेहोश हो गई तो मेरी पत्नी जोर जोर से रोने लगी तभी मैने उससे बच्ची को लेकर बच्चे के हार्ट को हाथों से पम्प करना शुरू कर दिया जिसके बाद करीब बीस मिंट बाद बच्ची को होश आया तो उसके रोने की आवाज निकली।गांव सोकड़ में ऐसा हाल सिर्फ तुफेल के परिवार का ही नहीं है बल्कि हर घर के आस पास इसी प्रकार का माहोल है।दोपहर 11बजे शुरू हुई गोलाबारी में यह लोग जान बचाने के लिए घर के अंदर जहां दुबके थे शाम सात बजे तक वहीं से हिल भी नहीं पाए।ऐसे मे गांव सोकड़ के सभी लोगों ने पानी पी कर ही रोजा इफतारी की है।गांव निवासी जफर का कहना हैकि मेरी आयू चालिस साल है यहां आए दिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलाबारी की जाती है लेकिन जिस प्रकार से आज गोलाबारी हुई है हमारे बचने की कोई उमीद ही नहीं थी जो जहां था वहीं रह गया रोजा रखने के बावजूद हमें इफतारी के लिए खान बनाने तक का भी मोका नहीं मिला है जैसे ही इफतारी का समय हुआ तो गोलाबारी भी कुछ थमी तो हमने पानी का एक एक घूंट पी कर रोजा खोला है।गांव सोकड़ के ग्रामीणों के दिलों में जहां पाकिस्तान के प्रति रोष व्याप्त है वहीं उनमें क्षेत्र के पंचायत के चुने हुए नुमांईदों और प्रशासन से भी गिला हैकि उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।ग्रामीणों का आरोप हैकि जहां नियंत्रण रेखा से छह से आठ किलो मीटर दूर के गांव में केन्द्र की तरफ से मंजूर बंकर बनाए गए हैं वहीं पाकिस्तानी सेना की चोकियों के सामने स्थित होने के बाद भी उन्हें आज तक बंकर नहीं मिल पाया है गांव में नीचे की तरफ एक समुदायिक बंकर बन रहा है जोकि अभी अधूर है।गंाव के लोगों का कहना हैकि गोलाबारी में जहां हम एक कमरे से दूसरे कमरे में नहीं जा पाते हैं तो पहाड़ी गांव में पाकिस्तानी सेना की चोकियों के सामने से भाग कर कोई समुदायिक बंकर तक कैसे पहुंच सकता है।इस लिए गांव में हर घर के पास बंकर बनाया जाए
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पुंछ जिले के आखिरी गांव सोकड़ में पाकिस्तानी गोलाबारी से हुए नुकसान को दिखाता तो फेल हुसैन
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पुंछ जिले के आखिरी गांव सोकड़ में पाकिस्तानी गोलाबारी से हुए नुकसान को दिखाता तो फेल हुसैन