India-Pakistan: मौत से जीत गए रमीज...होश में आते ही टूटा पिता का दिल; पुंछ में गोलाबारी ने ली मासूमों की जान
पुंछ में पाकिस्तानी हमले में अपने जुड़वां बच्चों को खो चुके रमीज खान को 10 दिन बाद होश आया, लेकिन बच्चों की मौत की खबर सुनकर वह टूट गए। पत्नी उरुसा ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पुंछ आए थे, पर अब सब कुछ उजड़ गया।
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गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू के चोपड़ा नर्सिंग होम में भर्ती रमीज खान को 11वें दिन होश आया। उनकी जान बच गई और अब वे पूरी तरह से खतरे से बाहर हैं। उन्हें और उनके परिवार खासकर पत्नी उरुसा खान को खुश होना चाहिए था, पर पति-पत्नी दोनों मिलकर खूब रोए।
उनके पास एक-दूसरे को ढांढस देने के लिए भी शब्द और ताकत नहीं बची। रमीज खान कहते हैं कि मौत को हरा दिया...पर किसके लिए जिंदा रहूं। मेरे जिगर के दोनों टुकड़े चले गए, ये कैसे सहेंगे हम लोग, ये जख्म अब कभी नहीं भरेगा। रह-रहकर माता-पिता की सिसकियों से नर्सिंग होम का सन्नाटा टूटता रहा।
रमीज के जुड़वां बच्चे 12 साल के अयान और की अरुबा की मौत सात मई को हुई थी। उसी दौरान रमीज भी घायल हुए थे। उनके पैर, हाथ और पीठ में गंभीर चोटें आईं थीं। पीठ में स्पिलंटर घुसा था जो लिवर तक पहुंच गया था। उन्हें जीएमसी में भर्ती कराया गया था। वे दस दिन तक आईसीयू में थे। शनिवार को उन्हें होश आया। तब उन्हें खुद के घायल होने और जम्मू जीएमसी में भर्ती होने की जानकारी हुई।
सात मई की दर्दनाक सुबह...नहीं भूलेगी
सात मई की दर्दनाक सुबह हमेशा के लिए जख्म दे गई है। उस दिन सुबह लगातार तीन धमाके हुए। हम कुछ समझ पाते कि जैसे लगा कि हम सब किसी ने बम बरसाया है। मुझे बस इतना याद है कि धमाके हुए और हम सब उसकी चपेट में आए।
मां ने कहा-इतने दिन तक आंसू पीना मुश्किल था
पत्नी उरुसा खान ने कहा कि हमारा सब कुछ लुट गया। पति दस दिनों तक आईसीयू में थे। कुछ कह भी नहीं सकती थी, रो भी नहीं सकती थी। बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव का घर छोड़ पुंछ आए थे। यहां किराए के मकान में रहे थे। क्या पता था कि सब यूं छिन जाएगा। हमारे बच्चे हमसे जुदा हो गए। मेरा जिगरा देखो वह हमें छोड़ कर चले गए। अल्लाह को हमारे बच्चे हमसे ज्यादा प्यारे थे, शायद इसलिए उसने उन्हें हमसे जल्दी छीन लिया है। मैं बाहर जाकर रोती थी, लेकिन जैसे आईसीयू में आती तो चुप हो जाती थी।