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Poonch News: पहले बारिश और बर्फबारी में टपकती थीं छतें, अब पक्के मकान में आ रही चैन की नींद
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पुंछ। भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित पुंछ में भी लोगों को केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। पहले जहां बारिश और बर्फबारी में लोगों की छतें टपकती थीं, वहीं अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकानों में वे चैन की नींद सो रहे हैं।
पुंछ जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक वर्ष में 46800 गरीबों के पक्के मकान बने हैं। इससे गरीब परिवारों का जीवन आसान हो गया है। इसको लेकर लाभार्थियों की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद अदा हुए इस योजना में मिलने वाली एक लाख 30 हजार रुपये की राशि को बढ़ाने की मांग की है। पहले जहां प्रधानमंत्री आवास योजना में शहरों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ही पक्के मकान बनाए जाते थे। अब भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर शून्य रेखा के करीब बसने वाली गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों को भी पक्के मकान मिल रहे हैं। इसे लेकर पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर बसे दिगवार मलदेयालां और शून्य रेखा के करीब स्थित नूरकोट जैसे गांव में भी 100 से अधिक पक्के मकान बने हैं। इसके लाभार्थियों जैनब कौसर, वाहिद खान, गुरसागर सिंह, मोहम्मद शरीफ और वली मोहम्मद आदि का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें भी पक्के मकान में रहने का मौका मिलेगा। पहले जब उनके कच्चे मकान थे तो सर्दी के मौसम में बारिश बर्फबारी के दौरान छतें टपकती थीं। इसके कारण जहां कई रातें जागते जागते कट जाती थीं, वहीं गर्मी में सांप घुसने का भी डर रहता था। अब वे अपने मकानों में चैन की नींद सो सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों का कहना है कि सबसे अच्छी बात यह है कि अब पैसा सीधा उनके बैंक खाते में आता है। इससे उन्हें किसी बात की रिश्वत भी नहीं देनी पड़ती है। उधर, प्रधानमंत्री आवास योजना की जिले में स्थिति पर असिस्टेंट कमिश्नर डेवलपमेंट शफीक अहमद का कहना है कि पुंछ जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस वर्ष 49200 घर बनाने का था। इसमें अभी तक 46800 घर बन गए हैं। सभी लाभार्थियों को तीन किस्तों में पैसा अदा कर दिया गया है। वे लोग अपने पक्के मकानों में रह रहे हैं। बाकी के 2400 घरों को भी अगले एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा।
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पुंछ जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक वर्ष में 46800 गरीबों के पक्के मकान बने हैं। इससे गरीब परिवारों का जीवन आसान हो गया है। इसको लेकर लाभार्थियों की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद अदा हुए इस योजना में मिलने वाली एक लाख 30 हजार रुपये की राशि को बढ़ाने की मांग की है। पहले जहां प्रधानमंत्री आवास योजना में शहरों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ही पक्के मकान बनाए जाते थे। अब भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर शून्य रेखा के करीब बसने वाली गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों को भी पक्के मकान मिल रहे हैं। इसे लेकर पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर बसे दिगवार मलदेयालां और शून्य रेखा के करीब स्थित नूरकोट जैसे गांव में भी 100 से अधिक पक्के मकान बने हैं। इसके लाभार्थियों जैनब कौसर, वाहिद खान, गुरसागर सिंह, मोहम्मद शरीफ और वली मोहम्मद आदि का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें भी पक्के मकान में रहने का मौका मिलेगा। पहले जब उनके कच्चे मकान थे तो सर्दी के मौसम में बारिश बर्फबारी के दौरान छतें टपकती थीं। इसके कारण जहां कई रातें जागते जागते कट जाती थीं, वहीं गर्मी में सांप घुसने का भी डर रहता था। अब वे अपने मकानों में चैन की नींद सो सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों का कहना है कि सबसे अच्छी बात यह है कि अब पैसा सीधा उनके बैंक खाते में आता है। इससे उन्हें किसी बात की रिश्वत भी नहीं देनी पड़ती है। उधर, प्रधानमंत्री आवास योजना की जिले में स्थिति पर असिस्टेंट कमिश्नर डेवलपमेंट शफीक अहमद का कहना है कि पुंछ जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस वर्ष 49200 घर बनाने का था। इसमें अभी तक 46800 घर बन गए हैं। सभी लाभार्थियों को तीन किस्तों में पैसा अदा कर दिया गया है। वे लोग अपने पक्के मकानों में रह रहे हैं। बाकी के 2400 घरों को भी अगले एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा।
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