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Poonch News: गर्मी बढ़ने के साथ गुलजार होने लगा ऐतिहासिक झरना नूरी छम्ब
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पुंछ। जिले को कश्मीर से जोड़ने वाली ऐतिहासिक मुगल रोड के करीब स्थित सुरनकोट तहसील के गांव बैहरामगल्ला और चंडीमाड़ा के बीच स्थित ऐतिहासिक झरना नूरी छम्ब गर्मी बढ़ने के साथ ही गुलजार होने लगा है। यहां पर्यटक गर्मी से राहत पाने एवं नूरी छम्ब झरने की फुहारों का आनंद प्राप्त करने के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि यहां सुविधाओं की कमी से लोगों को निराश एवं परेशान होना पड़ता है।
नूरी छंब आने वाले लोगों में कमलदीप, विनय बख्शी, विशाल टंडन, इमरान, नीलिका सूरी, रश्मि आदि का कहना है कि सब लोग बड़े शोक से इस स्थान को देखने और यहां प्रकृति की गोद में समय बिताने आते हैं, परंतु नूरी छम्ब के आस पास बैठने के लिए ढंग का कोई स्थान भी नहीं है। नूरी छम्ब के पास पार्क के नाम पर एक छोटी की जगह है जिसमें एक हट बनाई गई है जो चारों तरफ से खुली है और उसमें मुश्किल से दस लोग बैठ सकते हैं। बारिश से बचने के लिए यहां यहां न कोई हट बनी है न ही कोई शैड। कहने को पर्यटन विभाग नूरी छम्ब को विकसित करने के दावे करता है परंतु जमीन पर विकास का कोई भी काम नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ने एक कैफटेरिया एवं टीआरसी का निर्माण करवाया है, परन्तू वह नूरी छंब से पांच सो मीटर दूर है जहां तक यहां से पैदल जाना पड़ता है। लोग तो इस स्थान को देखने आते हैं फिर सुविधाएं भी यहीं होनी चाहिए। एक दो वर्षों में बैहरामगल्ला से नूरी छंब तक सड़क तो पहुंची है लेकिन सड़क से झरने तक के 100 मीटर के पैदल रास्ते की भी हालत खस्ता है जहां पर चलने से जूते कपड़े सब गंदे हो जाते हैं।
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छम्ब के आसपास पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है और न ही आसपास कोई दुकान है। हमारी जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग है कि नूरी छंब के आस पास सुविधाएं स्थापित की जाएं।
इतिहास - नूरी छम्ब का संबंध मुगल बादशाह जहंगीर की बेगम नूरजहां से बताया जाता है। कहा जाता है कि यह झरना नूरजहां का सबसे प्रिय झरना था। लाहौर से गर्मी के दिनों में कश्मीर आते जाते समय मुगल बादशाह जहांगीर अपनी बेगम के साथ कई दिनों तक इस स्थान पर ठहरते थे।
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नूरी छंब आने वाले लोगों में कमलदीप, विनय बख्शी, विशाल टंडन, इमरान, नीलिका सूरी, रश्मि आदि का कहना है कि सब लोग बड़े शोक से इस स्थान को देखने और यहां प्रकृति की गोद में समय बिताने आते हैं, परंतु नूरी छम्ब के आस पास बैठने के लिए ढंग का कोई स्थान भी नहीं है। नूरी छम्ब के पास पार्क के नाम पर एक छोटी की जगह है जिसमें एक हट बनाई गई है जो चारों तरफ से खुली है और उसमें मुश्किल से दस लोग बैठ सकते हैं। बारिश से बचने के लिए यहां यहां न कोई हट बनी है न ही कोई शैड। कहने को पर्यटन विभाग नूरी छम्ब को विकसित करने के दावे करता है परंतु जमीन पर विकास का कोई भी काम नहीं हुआ है।
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उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ने एक कैफटेरिया एवं टीआरसी का निर्माण करवाया है, परन्तू वह नूरी छंब से पांच सो मीटर दूर है जहां तक यहां से पैदल जाना पड़ता है। लोग तो इस स्थान को देखने आते हैं फिर सुविधाएं भी यहीं होनी चाहिए। एक दो वर्षों में बैहरामगल्ला से नूरी छंब तक सड़क तो पहुंची है लेकिन सड़क से झरने तक के 100 मीटर के पैदल रास्ते की भी हालत खस्ता है जहां पर चलने से जूते कपड़े सब गंदे हो जाते हैं।
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छम्ब के आसपास पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है और न ही आसपास कोई दुकान है। हमारी जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग है कि नूरी छंब के आस पास सुविधाएं स्थापित की जाएं।
इतिहास - नूरी छम्ब का संबंध मुगल बादशाह जहंगीर की बेगम नूरजहां से बताया जाता है। कहा जाता है कि यह झरना नूरजहां का सबसे प्रिय झरना था। लाहौर से गर्मी के दिनों में कश्मीर आते जाते समय मुगल बादशाह जहांगीर अपनी बेगम के साथ कई दिनों तक इस स्थान पर ठहरते थे।