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पेड़ों से बंधी बिजली की तारों से हादसों की आशांका से परेशान हैं ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी,गांव खनेतर बालाकोट के लोगों ने की खम
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फोटो न 1,2 पुंछ जिले के खनेतर बालाकोट में हरे पेडों से बंधी बिजली की मुख्य तारें
- फोटो : POONCH
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पुंछ। जिले की भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित बालाकोट तहसील के ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार पेड़ों से बांध कर खींचे गए हैं। इससे हमेशा किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन से बिजली के खंभे लगवाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विद्युत विभाग के अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से गांव में बिजली की सप्लाई के लिए लोहे अथवा सीमेंट के खंभे लगवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की गई है। इससे बरसात के दिनों में पेड़ों से बंधे तारों से जमीन पर करंट आ जाता है, जिससे कई जानवरों की जान चली जाती है। गांव खनेतर बालाकोट में पेड़ों से बंधे तारों से परेशान ग्रामीणों ने कहा कि बिजली की सप्लाई के लिए सीमेंट के खंभे लगाएं जाएं ताकि पेड़ों से बंधे तार कभी भी जनलेवा साबित हो सकते हैं।
25 साल पहले गांव में आई थी बिजली
ग्रामीणों का कहना है कि काफी संघर्ष के बाद करीब 25 वर्ष पहले हमारे गांव में बिजली की सप्लाई शुरू की गई थी। इसके लिए गांव के निचले क्षेत्रों में लकड़ी के खंभे लगाए गए थे। पहाड़ी पर बसे गांव के ज्यादातर हिस्से में पेड़ों के सहारे बिजली के मुख्य तार खींचे गए हैं। तब कहा गया था कि जल्द ही पोल लगाए जाएंगे, लेकिन आज तक खंभे नहीं लगाए गए हैं।
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करंट से सूख जाते हैं हरे-भरे पेड़
पेड़ से तार बंधे होने के कारण कई बार पेड़ों में करंट दौड़ते रहता है, जिसके चलते हरे-भरे फलदार पेड़ सूख जाते हैं। अब तक दर्जनों पेड़ सूख चुके हैं। आए दिन किसी न किसी ग्रामीण को या जानवरों को करंट का शिकार होना पड़ता है। ग्रामीणों राज्यपाल से मांग की है कि गांवों में बिजली के खंभे लगवाए जाएं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विद्युत विभाग के अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से गांव में बिजली की सप्लाई के लिए लोहे अथवा सीमेंट के खंभे लगवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की गई है। इससे बरसात के दिनों में पेड़ों से बंधे तारों से जमीन पर करंट आ जाता है, जिससे कई जानवरों की जान चली जाती है। गांव खनेतर बालाकोट में पेड़ों से बंधे तारों से परेशान ग्रामीणों ने कहा कि बिजली की सप्लाई के लिए सीमेंट के खंभे लगाएं जाएं ताकि पेड़ों से बंधे तार कभी भी जनलेवा साबित हो सकते हैं।
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25 साल पहले गांव में आई थी बिजली
ग्रामीणों का कहना है कि काफी संघर्ष के बाद करीब 25 वर्ष पहले हमारे गांव में बिजली की सप्लाई शुरू की गई थी। इसके लिए गांव के निचले क्षेत्रों में लकड़ी के खंभे लगाए गए थे। पहाड़ी पर बसे गांव के ज्यादातर हिस्से में पेड़ों के सहारे बिजली के मुख्य तार खींचे गए हैं। तब कहा गया था कि जल्द ही पोल लगाए जाएंगे, लेकिन आज तक खंभे नहीं लगाए गए हैं।
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करंट से सूख जाते हैं हरे-भरे पेड़
पेड़ से तार बंधे होने के कारण कई बार पेड़ों में करंट दौड़ते रहता है, जिसके चलते हरे-भरे फलदार पेड़ सूख जाते हैं। अब तक दर्जनों पेड़ सूख चुके हैं। आए दिन किसी न किसी ग्रामीण को या जानवरों को करंट का शिकार होना पड़ता है। ग्रामीणों राज्यपाल से मांग की है कि गांवों में बिजली के खंभे लगवाए जाएं।