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गोलाबारी के डर से खुले आसमान तले नालों में बिताई रात
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पुंछ। शुक्रवार की देर शाम से पाकिस्तानी सेना की तरफ से जिले में नियंत्रण रेखा से सटे रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी करने से इस्लामाबाद गांव के ग्रामीणों ने अपने घरों को छोड़ कर नालो एवं पहाड़ों के बीच खाली जगह में जा छुपे। गांव के बाहर इसी प्रकार रात के अंधरे में भारी सर्दी के बावजूद खुले आसमान के नीचे छुपे हुए ग्रामीणों मोहम्मद मुंशी, इकरार अहमद, मोहम्मद यासिर आदि का कहना था कि पाकिस्तान की तरफ से शुक्रवार को अब तक की सबसे खतरनाक गोलाबारी की गई। पाकिस्तानी फौज लगातार ग्रामीणों के घरों को निशाना बना कर गोलाबारी कर रही थी, जिससे वे अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे आड़ में छुपने को मजबूर हुए।
ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर पक्के हैं, जहां गोला गिरने पर घर के अंदर मौजूद किसी के भी बचने की कोई उम्मीद नहीं रह जाती है। ऐसे में वे पहाड़ की आड़ में छुपने को मजबूर हुए। पाकिस्तानी सेना गांव में ग्रामीणों के घरों को ही सबसे ज्यादा टारगेट कर रही थी, इसलिए ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नाले अथवा पहाड़ी की आड़ वाले क्षेत्र में गोला गिरने के बहुत कम चांस हैं। लोगों का कहना था कि उनके पास अब तक एक भी बंकर नहीं हैं, जहां वे गोलाबारी से बचने के लिए छुप सकें। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री आए दिन पाकिस्तान को 56 इंच का सीना दिखाते हैं, एक रात वे यदि गोलाबारी के बीच एलओसी के लोगों के साथ बिताएं तो उनको जमीनी हकीकत पता चलेगी, जिसके बाद वे 56 इंच का सीना दिखाना भूल जाएंगे। ग्रामीणों ने गुस्से में कहा कि पाकिस्तान की नापाक हरकत से उनका जीना मुहाल हो चुका है। ऐसे में इस तरह के जुमले से उनके दिल को चोट पहुंचती है। अब हालत यह हो गई है कि वे न तो अपने खेतों में काम कर सकते हैं और न रात में अपने घरों में आराम कर सकते हैं। एलओसी के लोग चाहते हैं कि एक बार पाक से आर-पार की जंग हो जाए, ताकि रोज-रोज वे मरते हुए जिंदगी बिताने को न मजबूर हों।
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ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर पक्के हैं, जहां गोला गिरने पर घर के अंदर मौजूद किसी के भी बचने की कोई उम्मीद नहीं रह जाती है। ऐसे में वे पहाड़ की आड़ में छुपने को मजबूर हुए। पाकिस्तानी सेना गांव में ग्रामीणों के घरों को ही सबसे ज्यादा टारगेट कर रही थी, इसलिए ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नाले अथवा पहाड़ी की आड़ वाले क्षेत्र में गोला गिरने के बहुत कम चांस हैं। लोगों का कहना था कि उनके पास अब तक एक भी बंकर नहीं हैं, जहां वे गोलाबारी से बचने के लिए छुप सकें। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री आए दिन पाकिस्तान को 56 इंच का सीना दिखाते हैं, एक रात वे यदि गोलाबारी के बीच एलओसी के लोगों के साथ बिताएं तो उनको जमीनी हकीकत पता चलेगी, जिसके बाद वे 56 इंच का सीना दिखाना भूल जाएंगे। ग्रामीणों ने गुस्से में कहा कि पाकिस्तान की नापाक हरकत से उनका जीना मुहाल हो चुका है। ऐसे में इस तरह के जुमले से उनके दिल को चोट पहुंचती है। अब हालत यह हो गई है कि वे न तो अपने खेतों में काम कर सकते हैं और न रात में अपने घरों में आराम कर सकते हैं। एलओसी के लोग चाहते हैं कि एक बार पाक से आर-पार की जंग हो जाए, ताकि रोज-रोज वे मरते हुए जिंदगी बिताने को न मजबूर हों।
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