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पाकसतानियां ने गोली मारी छोड़ी, ओ जालम हमना घरां तू बार वी नी निकलन देता,हम जां तां कित जां
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पुंछ के राजा सुखदेव सिंह अस्पताल में भर्ती पाक गोलाबारी पीडिता को देखते पुलिस अधिकारी
- फोटो : POONCH
पुंछ। पाकिस्तानियां ने गोली मारी छोड़ी, ओ जालम हमना घरां तू बार वी नी निकलन देता, हम जां तां कित जां। यह बातें राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल में पाकिस्तानी गोलाबारी से घायल होकर दर्द से कराह रही सकीना बी ने अमर उजाला द्वारा यह पूछे जाने पर कि जिस समय गोलाबारी हुई तो आप कहां थीं। क्या कर रही थीं। अपना दुखड़ा सुनाते हुए कही।
गोजरी भाषा के सिवा दूसरी कोई भाषा में बात करने में असमर्थ सकीना बी ने कहा कि पाकिस्तानियों ने मुझे गोली मारी दी। वो जालिम हमें हमारे घरों से बाहर तक नहीं निकलने देते। हम जाएं तो कहां जाएं। जैसे ही हम घरों से बाहर निकलते हैं तो पाकिस्तानी सेना हमें निशाना बना कर गोलीबारी शुरू कर देती है। आज भी देर शाम करीब साढ़े पांच बजे मैं रात का खाना बनाने के लिए घर के पास रखी लकड़ियां एकत्र कर रही थी कि तभी अचानक पाकिस्तानी सेना ने मुझे गोली का शिकार बना दिया। मैं वहीं ढेर हो गई। एक तरफ पाकिस्तानी गोलाबारी से परेशान और दूसरी तरफ देश की आजादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग के आगे बसे गांव बगयालदारा की सकीना बी और उसके साथ अस्पताल पहुंची उसके परिवार की अन्य महिलाओं का कहना है कि हमारे लिए तो हर दिन जंग है पाकिस्तानी सेना को जब दिल करता है गोलाबारी शुरू कर देती है। हमारी जीना मुश्किल हो गया है।
दूसरी तरफ आज तक हमारे गांव में सड़क सुविधा नहीं है और न ही कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, जहां गोलाबारी में घायल होने पर मरहम पट्टी उपलब्ध हो सके। गोलाबारी में किसी के घायल होने के बाद हम लोगों सबसे पहले अपने दुपट्टे अथवा बुजुर्गों की पगड़ियां फाड़ कर घायल का खून रोकना पड़ता है। उसके बाद सबसे बड़ी समस्या घायल को अस्पताल पहुंचाने में होती है। गोलाबारी के बीच जान जोखिम में डाल कर उसे कई किलोमीटर दूर नियंत्रण रेखा पर आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए लगाई गई तार फेंसिंग पर बने गेट तक लाना पड़ता है। गोलाबारी के दौरान अकसर वह गेट बंद होने और वहां तैनात जवानों के जान बचाने के लिए बंकरों में होने की वजह से गेट खुलने में भी समय लग जाता है। उसके बाद अगर गोलाबारी में घायल की किस्मत अच्छी हुई तो सड़क पर कोई वाहन मिल गया तो वह अस्पताल पहुंच जाएगा। हम इन हालातों से पूरी तरह तंग आ गए हैं। हमारी सरकार से मांग है कि हमें अपने गांव से निकाल कर किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
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यह आलम जिले में अकेले बगयालदरा गांव का नहीं है बल्कि जिले में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित सैकड़ों गांव का है। जहां लोग पाकिस्तानी गोलाबारी से बुरी तरह परेशान हैं।
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गोजरी भाषा के सिवा दूसरी कोई भाषा में बात करने में असमर्थ सकीना बी ने कहा कि पाकिस्तानियों ने मुझे गोली मारी दी। वो जालिम हमें हमारे घरों से बाहर तक नहीं निकलने देते। हम जाएं तो कहां जाएं। जैसे ही हम घरों से बाहर निकलते हैं तो पाकिस्तानी सेना हमें निशाना बना कर गोलीबारी शुरू कर देती है। आज भी देर शाम करीब साढ़े पांच बजे मैं रात का खाना बनाने के लिए घर के पास रखी लकड़ियां एकत्र कर रही थी कि तभी अचानक पाकिस्तानी सेना ने मुझे गोली का शिकार बना दिया। मैं वहीं ढेर हो गई। एक तरफ पाकिस्तानी गोलाबारी से परेशान और दूसरी तरफ देश की आजादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग के आगे बसे गांव बगयालदारा की सकीना बी और उसके साथ अस्पताल पहुंची उसके परिवार की अन्य महिलाओं का कहना है कि हमारे लिए तो हर दिन जंग है पाकिस्तानी सेना को जब दिल करता है गोलाबारी शुरू कर देती है। हमारी जीना मुश्किल हो गया है।
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दूसरी तरफ आज तक हमारे गांव में सड़क सुविधा नहीं है और न ही कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, जहां गोलाबारी में घायल होने पर मरहम पट्टी उपलब्ध हो सके। गोलाबारी में किसी के घायल होने के बाद हम लोगों सबसे पहले अपने दुपट्टे अथवा बुजुर्गों की पगड़ियां फाड़ कर घायल का खून रोकना पड़ता है। उसके बाद सबसे बड़ी समस्या घायल को अस्पताल पहुंचाने में होती है। गोलाबारी के बीच जान जोखिम में डाल कर उसे कई किलोमीटर दूर नियंत्रण रेखा पर आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए लगाई गई तार फेंसिंग पर बने गेट तक लाना पड़ता है। गोलाबारी के दौरान अकसर वह गेट बंद होने और वहां तैनात जवानों के जान बचाने के लिए बंकरों में होने की वजह से गेट खुलने में भी समय लग जाता है। उसके बाद अगर गोलाबारी में घायल की किस्मत अच्छी हुई तो सड़क पर कोई वाहन मिल गया तो वह अस्पताल पहुंच जाएगा। हम इन हालातों से पूरी तरह तंग आ गए हैं। हमारी सरकार से मांग है कि हमें अपने गांव से निकाल कर किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
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यह आलम जिले में अकेले बगयालदरा गांव का नहीं है बल्कि जिले में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित सैकड़ों गांव का है। जहां लोग पाकिस्तानी गोलाबारी से बुरी तरह परेशान हैं।