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पाकिस्तानी गोलाबारी से मनकोट सैकटर के गांव दबराज में कई मकान क्षतिग्रस्त
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पुंछ जिले के मनकोट सैक्टर के गांव दबराज में पाकिस्तानी गोलाबारी से हुआ नुकासन और गोलों के टुकडे द
- फोटो : POONCH
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पुंछ। मेंढर सब डिवीजन के मनकोट सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना की चौकियों के साथ ही रिहायशी इलाकों मनकोट, बलनोई, घानी और दबराज आदि गांव को निशाना बना कर 120 एमएम के मोर्टार बरसाए। इससे गांव दबराज में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। जबकि लोगों में दहशत का माहौल बन कर रह गया।
गोलाबारी से डरे दबराज के ग्रामीणों सुलतान मोहम्मद, मोहम्मद खालिद और मोहम्मद हफीज का कहना है कि सुबह तड़के डेढ़ बजे से छह बजे तक पाकिस्तान ने हमारे गांव में इतनी गोलाबारी की मानों इलाके में युद्ध छिड़ गया हो। पाकिस्तानी सेना ने हमारे गांव को निशाना बना कर 120 एमएम के मोर्टार दागे हैं। इससे कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इतना ही नहीं गांव में कोई भी मकान सुरक्षित नहीं बचा है जो क्षतिग्रस्त नहीं हुए हैं वह गोलों के धमाकों से हिल गए है। वह कभी भी गिर जाएंगे। इन लोगों का कहना है कि हमारे बुजुर्गों का कहना है कि इतने बड़े गोले तो 1965 और 1971 की जंग में नहीं चले जो आज पाकिस्तानी सेना ने हमारे गांव पर चलाए हैं। गोलाबारी इतनी जोरदार थी कि मारे डर के हमारे घरों में बच्चे और महिलाएं रोने लगीं। हमने मकानों के नीचे बने पशुओं के भाड़े में करीब सात घंटे से अधिक बिताए और गोलाबारी थमने ही हम वहां से निकले हैं, लेकिन बच्चे अभी भी डरे हुए हैं।
पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से परेशान गांव दबराज के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और केंद्र सरकार से गांव में हर घर के पास निजी बंकर निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में केंद्र सरकार की तरफ कुछ सामुदायिक बंकरों का निर्माण कराया गया है जो स्वागत योग्य कदम है परंतु सामुदायिक बंकर हमारे घरों से दो से पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं। जहां गोलाबारी के दौरान कोई भी नहीं पहुंच सकता है। क्योंकि गोलाबारी के दौरान हमें एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाने का मौका नहीं मिलता तो सामुदायिक बंकर तक कैसे पहुंच सकते हैं। अगर हर घर के पास निजी बंकर होगा तो हम लोगों की जान बच जाएगी।
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गोलाबारी से डरे दबराज के ग्रामीणों सुलतान मोहम्मद, मोहम्मद खालिद और मोहम्मद हफीज का कहना है कि सुबह तड़के डेढ़ बजे से छह बजे तक पाकिस्तान ने हमारे गांव में इतनी गोलाबारी की मानों इलाके में युद्ध छिड़ गया हो। पाकिस्तानी सेना ने हमारे गांव को निशाना बना कर 120 एमएम के मोर्टार दागे हैं। इससे कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इतना ही नहीं गांव में कोई भी मकान सुरक्षित नहीं बचा है जो क्षतिग्रस्त नहीं हुए हैं वह गोलों के धमाकों से हिल गए है। वह कभी भी गिर जाएंगे। इन लोगों का कहना है कि हमारे बुजुर्गों का कहना है कि इतने बड़े गोले तो 1965 और 1971 की जंग में नहीं चले जो आज पाकिस्तानी सेना ने हमारे गांव पर चलाए हैं। गोलाबारी इतनी जोरदार थी कि मारे डर के हमारे घरों में बच्चे और महिलाएं रोने लगीं। हमने मकानों के नीचे बने पशुओं के भाड़े में करीब सात घंटे से अधिक बिताए और गोलाबारी थमने ही हम वहां से निकले हैं, लेकिन बच्चे अभी भी डरे हुए हैं।
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पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से परेशान गांव दबराज के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और केंद्र सरकार से गांव में हर घर के पास निजी बंकर निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में केंद्र सरकार की तरफ कुछ सामुदायिक बंकरों का निर्माण कराया गया है जो स्वागत योग्य कदम है परंतु सामुदायिक बंकर हमारे घरों से दो से पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं। जहां गोलाबारी के दौरान कोई भी नहीं पहुंच सकता है। क्योंकि गोलाबारी के दौरान हमें एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाने का मौका नहीं मिलता तो सामुदायिक बंकर तक कैसे पहुंच सकते हैं। अगर हर घर के पास निजी बंकर होगा तो हम लोगों की जान बच जाएगी।
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