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जान बचाने के लिए घरों में बनाए बंकर

Thu, 24 Oct 2013 10:32 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्रा/भारत-पाक
राघवेंद्र नारायण मिश्रा/भारत-पाक Updated Thu, 24 Oct 2013 10:32 AM IST
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people made bunkers in their homes to save life in jammu

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के मंगलवार के कश्मीर दौरे के तुरंत बाद से पाकिस्तान ने सीमा पर ताबड़तोड़ गोलाबारी शुरू कर दी है।

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खौफ का आलम यह है कि हर पल जान सांसत में रहती है और लोगों को अपने घरों में ही मौत की आहट सुनाई देने लगी है।

सीमा पार से रात भर गोले बरसते हैं, महिलाएं और बच्चे सहमे हैं। बचने के लिए लोग अब पक्के घरों के आंगन खोदकर बंकर तैयार कर रहे हैं।

शिंदे की यात्रा के दौरान भी पाक के रॉकेट लांचर गरजते रहे और वापसी के बाद तो पाकिस्तान ने सारी सीमाएं तोड़ दीं। सीमा पर चार दर्जन भारतीय अग्रिम चौकियों पर पाक की ओर से भारी गोलाबारी हुई। रिहायशी इलाके भी निशाने पर रहे।
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बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया, जबकि सात जख्मी हुए हैं। आरएसपुरा और कानाचक में दो ग्रामीण भी घायल हुए हैं। मवेशियों को भी गोले झेलने पड़ रहे हैं। पाकिस्तान ने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
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अमर उजाला की टीम ने एक दर्जन सीमांत गांवों का दौरा किया। आरएसपुरा के विधिपुर से लेकर अरनियां के पिंडी चारका कलां तक हर गांव में दहशत पसरी हुई है। खेतों में बासमती धान की लहलहाती फसल ग्रामीण काट नहीं पा रहे हैं।

पिंडी चारका कलां से पाक सीमा महज कुछ सौ मीटर दूर है। इस गांव के लोग रात भर पाकिस्तानी गोलों की धमक के गवाह हैं। किसान रमेश सिंह कहते हैं यही हाल रहा तो गांव में कोई नहीं रहेगा। रात के साढ़े बारह बजे उनके आंगन में पाक गोला गिरा और चारा काटने की मशीन को तोड़ गया।


गोले के छर्रे कूलर, खिड़कियों, और दीवारों पर धंस गए। परिवार ने खौफ में रात गुजारी। सुबह मजदूर बुलवाकर आंगन में ही बंकर के लिए गड्ढा खुदवाया ताकि गोलों से परिवार को बचाया जा सके। इसी गांव के किशन लाल सुबह छह बजे अपनी दुकान का शटर उठा ही रहे थे कि पाकिस्तानी सेना का गोला आ गिरा।

किशनलाल की कनपटी और गले के बाएं हिस्से में छर्रे धंस गए हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे किशन ने बताया कि अब गांव छोड़ने की मजबूरी पैदा हो गई है। अब्दुल्लियां गांव के सरपंच वचनलाल कहते हैं कि शाम होते ही पाकिस्तानी बंदूकें मौत बरसाने लगती हैं।

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