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ऐतिहासिक दिन पर क्यों दूर रखा मीडिया को: उमर 

Tue, 05 Apr 2016 01:03 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Tue, 05 Apr 2016 01:03 PM IST
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omar questions keeping out electronic media from oath ceremony
उमर अब्दुल्ला नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष हैंं। - फोटो : Amar Ujala

नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह की लाइव टेलिकास्ट की अनुमति से निजी चैनलों को वंचित रखने पर सवाल उठाया है। उन्होंने इसे एक ‘अभूतपूर्व ढकोसला आदेश’ ठहराया।

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उमर ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को टैग कर ट्वीट किया ‘जाहिर तौर पर केवल डीडी और एएनआई न्यूज की ओवी वैन को महबूबा मुफ्ती के शपथ ग्रहण समारोह को कवर करने के लिए अनुमति दी गई’।
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उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा राज्य में इससे पूर्व कभी नहीं हुआ। ट्वीट में लिखा है, निश्चित रूप से यह वर्ष 2009 या 2015 का मामला नहीं था। पता नहीं मीडिया मैनेजरों द्वारा ऐसा क्यों किया गया। विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस का मानना है कि राज्य में मौजूदा सरकार स्थिर नहीं रहेगी। नेकां प्रवक्ता जुनैद अज़ीम मट्टू के अनुसार मीडिया में पहले भी बातें आ रही थीं कि पीडीपी में गुट बन रहे हैं। 

महबूबा पार्टी को बचाने के लिए दिल्ली गई थीं। सोमवार को चार विधायकों को नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किये जाने के बाद महबूबा ने खुद साबित कर दिया कि आज पीडीपी दो गुटों बट गई है। इससे साफ़ होता है कि एक स्थिर सरकार नहीं देखने को मिलेगी।

मट्टू के अनुसार पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा और अन्य पार्टी नेताओं द्वारा यह कहा गया था कि जब तक उन्हें भाजपा की ओर से जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए विश्वास बहाली के उपायों (सीबीएम) का आश्वासन नहीं मिलता तब तक वह सरकार नहीं बनाएंगे। 


लेकिन बाद में महबूबा दिल्ली गईं और अमित शाह समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करने के बाद बिना किसी आश्वासन और किसी नई पहल के सरकार बनाने को तैयार हो गईं। एक खास दिन पर हमारा यह सवाल बनता है कि आखिर ऐसा क्या मिला कि वह अपनी कही हुई बातों से हटकर सरकार बनाने को तैयार हो गईं।

इलेक्ट्रानिक मीडिया को समारोह से दूर रखने जाने पर उन्होंने कहा कि आते आते ही सरकार अपना रूप दिखाने लगी है। ऐसा पहले कभी नहीं देखने को मिला। मट्टू का कहना है कि मीडिया को दूर रखने के पीछे क्या यह कारण था कि वहां कुछ नारे बुलंद किए जाएंगे। या फिर पीडीपी लीडर कुछ गलत बयानी करेंगे या फिर पीडीपी में पड़ रही फूट दिखाई देगी। अगर पीडीपी इसे ऐतिहासिक दिन बता रही है तो आखिर मीडिया को दूर क्यों रखा गया।

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