वीके सिंह के बयान से कश्मीर के नेताओं की बांछें खिलीं
- पीडीपी, नेकां और अलगाववादियों ने किया स्वागत
- नईम ने कहा, बातचीत में सभी हितधारकों को शामिल करना जरूरी
- उमर बोले, शुक्र है केंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ
विस्तार
केंद्रीय मंत्री वीके सिंह द्वारा अलगाववादियों और पाकिस्तानी नेताओं के बीच खींची लकीर पर दिए गए बयान से कश्मीर के नेताओं की बांछें खिल गई हैं। अलगाववादियों, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने इसका स्वागत किया है।
केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने संसद में 28 अप्रैल को एक लिखित बयान दिया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और तथाकथित कश्मीरी ‘नेता’ भारतीय नागरिक हैं। इसलिए भारत में किसी भी देश के प्रतिनिधि के साथ उनकी बैठकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
पीडीपी नेता नईम अख्तर ने कहा कि हमने हमेशा यह कहा है कि जम्मू-कश्मीर का मसला विकसित विधि द्वारा ही हल किया जा सकता है और सभी हितधारकों को इसमें शामिल करने की आवश्यकता है। यह बात बहुत अच्छी पहल है।
नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब इन्होंने हुर्रियत को लेकर बातचीत का सिलसिला तोड़ा था, उसी दिन हमने कहा था कि आप गलत कर रहे हो। शुक्र है कि उन्हें (केंद्र) अपनी गलती का अहसास हुआ।
हमें एक नई शुरुआत करनी है
हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि हमारे लिए यह कोई मसला नहीं है कि हमें बुलाया जाए या नहीं। हमारे लिए अहम यह है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा जो वादे किए गए हैं और 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, उन पर वह अमल करे।
साथ ही राज्य के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाए। हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि ‘देर आए दुरुस्त आए’। उन्हें खुशी है कि आखिरकार भारत सरकार को यह एहसास हुआ कि उनके द्वारा खींची गई लकीर राजनीतिक और कूटनीतिक मसलों में नहीं चलती।
कश्मीर का मसले में यहां के लोगों को शामिल करना जरूरी है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति को दोहराना होगा, जिसमें उन्होंने कहा था कि हमें एक नई शुरुआत करनी है। मीरवाइज ने यह भी कहा कि हुर्रियत ने कभी यह नहीं कहा कि भारत-पाकिस्तान बातचीत में वह थर्ड पार्टी हैं, मसला हमारा है, इसलिए हम प्राइमरी पार्टी हैं।