जम्मू-कश्मीर में होगा मंत्रिमंडल विस्तार: तीन कुर्सियां खाली, दावेदार अनेक! उमर सरकार में किसकी चमकेगी किस्मत?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद का विस्तार और फेरबदल अगले सप्ताह किया जाएगा।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार सुबह लोक भवन पहुंचकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से शिष्टाचार व प्रशासनिक बैठक की। मुख्यमंत्री अपने गुपकार स्थित आवास से निकलकर सुबह ठीक 11:00 बजे लोक भवन पहुंचे और 11:15 बजे वहां से रवाना हुए। महज 15 मिनट चली इस संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम बैठक में प्रदेश से जुड़े प्रशासनिक मामलों के अलावा बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।
बैठक के बाद लोक भवन से बाहर आते ही पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीधे तौर पर कहा कि अगले हफ्ते की शुरुआत में मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल तय है।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, ऑनरेबल एलजी साहब पिछले कुछ दिनों के बाद श्रीनगर वापस लौटे हैं। बीच में उनकी तबीयत थोड़ी खराब रही थी, तो मैं चाहता था कि उनकी तबीयत का हाल जानूं। इसके अलावा कई प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दे थे, जिन पर उनसे बात करना और राय लेना जरूरी था। काफी अरसा हो गया था उनसे मिले हुए इसलिए आज वक्त मांगा और मुलाकात की।
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों पर विराम लगाते हुए उमर अब्दुल्ला ने खुद आगे बढ़कर कहा, 'मैं जानता हूं कि आप लोग इसके अलावा किसी और चीज के बारे में नहीं जानना चाहेंगे। आप यह जानना चाहते हैं कि क्या फेरबदल पर बात हुई या नहीं? बिल्कुल हुई। मैंने उनसे मंत्रिमंडल विस्तार के लिए वक्त मांगा है और गुजारिश की है कि अगले हफ्ते के पहले दो-तीन दिनों के भीतर काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स में कुछ तब्दीलियां और विस्तार कर लिया जाए। एलजी साहब इसके लिए समय तय करेंगे और शपथ ग्रहण का सिलसिला पूरा हो जाएगा।
एलजी कार्यालय ने जारी किया बयान
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर बैठक की पुष्टि की गई। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एलजी कार्यालय ने पोस्ट में लिखा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की।
मंत्रिमंडल का समीकरण: 3 पद अब भी खाली
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के कानूनी प्रावधानों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 9 सदस्य (विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 10 प्रतिशत) ही शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में उमर अब्दुल्ला सरकार में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 6 मंत्री कार्यरत हैं, यानी अभी भी 3 पद खाली पड़े हैं।
वर्तमान मंत्रियों के पास एक से अधिक विभागों का प्रभार होने के कारण प्रशासनिक कामकाज के बेहतर बंटवारे के लिए लंबे समय से विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। माना जा रहा है कि इस विस्तार में जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों के बीच क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधते हुए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस संबंध में अंतिम फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
कांग्रेस का रुख
उमर अब्दुल्ला सरकार को बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस पार्टी पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह कैबिनेट में शामिल नहीं होगी। ऐसे में इस विस्तार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अपने विधायकों या समर्थक निर्दलीय विधायकों को ही मंत्री पद मिलने की पूरी संभावना है।