Jammu Kashmir News: 'मोटी पगार' सरकार से और मदद आतंकियों की, अब नहीं बचेंगे 'पड़ोसी' के छिपे गुर्गे
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में सरकारी खजाने से मोटी पगार लेकर ‘पड़ोसी’ यानी पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहे 'गुर्गे' अब बच नहीं सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सख्त निर्देशों के बाद अब जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और उनके ओवरग्राउंड वर्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू होने जा रही है। जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस ऐसे सरकारी महकमों पर रहेगा, जहां से कर्मियों द्वारा आतंकियों को मदद पहुंचाई जाती है। ये 'गुर्गे' एकाएक पुलिस की नजर में नहीं आते, क्योंकि इन्होंने खुद को घाटी की मुख्य धारा वाले लोगों में शामिल कर रखा है। वन, ट्रांसपोर्ट, राजस्व और जेल महकमे में आतंकियों के लिए 'ओवरग्राउंड' वर्कर का काम करने वाले लोगों की संख्या अच्छी खासी है। जम्मू-कश्मीर में विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) के गठन को मंजूरी दी गई है। इस एजेंसी को आतंकी मामलों की सामान्य जांच के लिए अलावा एक अहम खुफिया मिशन पर लगाया जाएगा। टारगेट किलिंग के अतिरिक्त आतंकियों को किसी भी तरह से मदद पहुंचाने वालों को तलाशना इस एजेंसी का प्रमुख टास्क होगा।
एसआईए के गठन को मंजूरी
सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 'यूएपीए' और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराधों की जांच एवं अभियोजन के लिए विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) के गठन को मंजूरी प्रदान की है। पिछले दिनों घाटी में हुई सिविलियन या टारगेट किलिंग को लेकर जम्मू कश्मीर प्रशासन ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी सकते में आ गई थी। हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने करीब तीन सप्ताह तक चले ऑपरेशन में कई ऐसे आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है, जो टारगेट किलिंग में शामिल रहे हैं। जेएंडके पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, पिछले दिनों हुई टारगेट किलिंग में भले ही पीछे से जैश, लश्कर या हिज्बुल जैसे आतंकी संगठनों का हाथ रहा हो, लेकिन घाटी में वे सभी वारदातें उनके स्थानीय गुर्गों द्वारा अंजाम दी गई थीं। मौजूदा समय में जब सीमा पार से घुसपैठ पर रोक लगी है तो पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई ने ओवरग्राउंड वर्कर को सक्रिय कर दिया है। ये आतंकियों को फुल सपोर्ट मुहैया कराते हैं। कश्मीर में टारगेट किलिंग और हैंड ग्रेनेड फेंकना, ऐसी सभी आतंकी गतिविधियाँ ओवरग्राउंड वर्कर के जरिए की जा रहीं हैं।
एसआईए को मिले ये खास अधिकार
जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा के बाद एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में यह स्वीकार किया था कि घाटी में ओवरग्राउंड वर्कर पर नियंत्रण करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने जेलों से चल रहे आतंकियों के नेटवर्क पर भी चिंता जाहिर की थी। जेलों पर तैनात स्टाफ आतंकियों की मदद कर रहा है। इसे रोकने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। नतीजा, अब जम्मू कश्मीर की जेलों में बंद खूंखार कैदियों को यूपी की जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है। जेएंडके पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तर्ज पर गठित की जा रही विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) का सबसे बड़ा टास्क विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तर की एजेंसियों के बीच समन्वय करना रहेगा। ओवरग्राउंड वर्कर या आतंकियों के दूसरे मददगारों को पकड़ने के लिए लंबा चौड़ा फाइल वर्क न करना पड़े, इसके लिए एसआईए को विशेष शक्तियां प्रदान की गई हैं। एसआईए किसी भी अपराध के संदर्भ में, जिसे वह जांच योग्य समझे, स्वयं उसका संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कर सकती है। हालांकि ऐसे केस में एसआईए को पहले जेएंडके पुलिस के महानिदेशक को सूचित करना होगा।
एसआईए कर्मियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहण भत्ता
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एसआईए का फायदा यह रहेगा कि इसकी मदद से आतंकियों के नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी। इस जांच टीम में अधिकांश ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनके पास 'इंटेलिजेंस' का अच्छा खासा अनुभव है। जम्मू-कश्मीर पुलिस में सीआईडी शाखा के प्रमुख को ही एसआईए का पदेन निदेशक बनाया जाएगा। इस एजेंसी में जो भी लोग शामिल होंगे, उन्हें बड़ा टास्क मिलेगा। ओवरग्राउंड वर्कर को तलाशना और आतंकियों के दूसरे गुर्गों को सबूतों सहित पकड़ना, इसके लिए एसआईए स्टाफ को उनके मूल वेतन के आधार पर 25 फीसदी का विशेष प्रोत्साहण भत्ता प्रदान किया जाएगा। यह सब करने के पीछे पुलिस महकमे का प्रयास है कि किसी तरह घाटी में आतंकी नेटवर्क खत्म हो जाए। जेएंडके पुलिस ने अभी तक कई बार यह प्रयास किया है कि सरकारी महकमों में आतंकियों का कोई मददगार न हो, लेकिन अभी तक बड़ी सफलता हाथ नहीं लग सकी। गत दिनों दर्जनभर कर्मियों पर गाज गिरी है, लेकिन अभी विभागों में ओवरग्राउंड वर्कर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। एसआईए चूंकि इंटेलिजेंस एवं जांच, दोनों काम करेगी, इसलिए उम्मीद है कि इससे आतंकियों का नेटवर्क तोड़ा जा सकेगा। सुरक्षा एजेंसियों के सामने इस वक्त बड़ी चुनौती ओवरग्राउंड वर्कर हैं। अगर इन्हें जड़ से खत्म कर दिया जाता है तो घाटी को आतंकवाद से मुक्ति मिलने में भी देर नहीं लगेगी।