{"_id":"573c00be4f1c1ba171ac7440","slug":"naeem-akhtar-for-social-audit-of-school-system","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू कश्मीर में स्कूलों के सोशल ऑडिट की जरूरत: नईम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू कश्मीर में स्कूलों के सोशल ऑडिट की जरूरत: नईम
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Wed, 18 May 2016 11:16 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : Sanjay Gupta
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी स्कूलों के बच्चे समाज की हकीकत बयान करते हैं। शिक्षा सुधार के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। अब अवाम को अपनी भूमिका निभानी होगी। इसके लिए स्कूलों के सोशल ऑडिट की जरूरत है, ताकि शिक्षा का स्तर सुधारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े।
विज्ञापन
पुंछ दौरे के दौरान बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल पुंछ और गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल शीशमहल में बच्चों के साथ संवाद में शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने ये बातें कहीं। नईम ने कहा कि स्कूलों के स्टाफ और ढांचागत सुविधाओं को युक्तिसंगत बनाया गया है।
विज्ञापन
इसकी अवाम से सराहना भी मिली, लेकिन इन बदलावों के अधिकतम नतीजे हासिल करने के लिए अवाम को स्कूलों की जवाबदेही तय करनी होगी। स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने के अलावा प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग कक्षाएं और शाम के समय ट्यूशन कक्षाएं लगाने की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी त्रासदी स्कूली शिक्षा को प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्तर पर अलग करना है, जबकि सबसे बेहतर व्यवस्था नर्सरी से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई एक ही स्कूल में करना है, जो निजी स्कूल अपना रहे हैं। शिक्षा की व्यवस्था में इस दीवार को तोड़ने की जरूरत है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मदरसों के आधुनिकीकरण और मदरसों में पढ़ रहे बच्चों का आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्हाेंने बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल पुंछ में हर्बल गार्डन विकसित करने के निर्देश दिए।
बाद में बार कांप्लेक्स में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि प्रतिभाआें की कमी नहीं है। यदि सही दिशा दी जाए तो प्रतिभाएं आसमान छूने से नहीं चूकेंगीं। उन्होंने रियासत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र का जिक्र करते हुए कहा कि पुंछ इसकी खास मिसाल है।