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प्रधानमंत्री के मिशन कश्मीर से बदलेगी सियासी तस्वीर

Tue, 03 Jun 2014 04:27 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला,जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला,जम्मू Updated Tue, 03 Jun 2014 04:27 PM IST
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प्रधानमंत्री की मिशन कश्मीर पर अमल से जम्मू-कश्मीर की सियासी तस्वीर बदल सकती है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मोदी की प्राथमिकता के मद्देनजर कार्ययोजना बनाना शुरू किया है। पांच महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कुछ बड़े कदम उठाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

पाक अधिकृत कश्मीर को पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर का नया नाम देना बड़ी रणनीति का हिस्सा है। कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताने की पाकिस्तानी चाल को विफल करने के अलावा भाजपा की नजर अगले विधानसभा चुनाव पर भी है।
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पीओके रिफ्यूजियों की संख्या 12 लाख के करीब है और वे चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

अब तक पीओके में कश्मीर का हिस्सा ही शामिल होने की आम मान्यता रही है। जबकि असलियत यह है कि वर्तमान पीओके में जम्मू संभाग का बड़ा हिस्सा शामिल है।

इसमें जम्मू संभाग का मीरपुर जिला और पुंछ का एक तिहाई हिस्सा शामिल है। मीरपुर जिले की मीरपुर, भिम्बर और कोटली तीन तहसीलों पर पाक का अनधिकृत कब्जा है।

इसी तरह पुंछ जिले के पुलंदरी (रावलाकोट) और बाग तहसीलें भी पीओके में हैं। कश्मीर का सिर्फ मुजफ्फराबाद जिला पीओके में है जो मीरपुर की तुलना में छोटा जिला है। इस तरह पीओके के 8 में से सात हिस्से जम्मू संभाग के ही हैं। नतीजतन पीओके पर बातचीत में जम्मू संभाग के प्रतिनिधियों को शामिल करने का दावा दमदार है।
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अवकाश प्राप्त डीजीपी एमएम खजूरिया कहते हैं कि पाकिस्तान ने दुनिया भर में यह संदेश दिया है कि पीओके में कश्मीर के हिस्से ही हैं जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

केंद्र सरकार की नई पहल से विश्व समुदाय के सामने पाक का दावा झुठलाया जा सकेगा। पीओके रिफ्यूजियों के लिए काम करने वाले संगठन एसओएस इंटरनेशनल के चेयरमैन राजीव चुन्नी का कहना है कि पीओके में जम्मू का रकबा ज्यादा है। मीरपुर में पाकिस्तान ने मंगला डैम बना दिया है। नतीजतन रिफ्यूजियों की जमीन झेलम में डूब गई है। इस कारण इन रिफ्यूजियों का वापस अपनी जमीन पर भेजना संभव नहीं हो सकेगा। लिहाजा यहीं पैकेज देना बेहतर होगा।


अनुच्छेद 370 पर चर्चा और रिफ्यूजियों का नए सिरे से सर्वे कराकर पैकेज देकर मोदी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले वोटों के ध्रुवीकरण को गति देना चाहती है।

गृह मंत्रालय ने रिफ्यूजियों के सर्वे के लिए एजेंसियों को आदेश दे दिए हैं। उधर अनुच्छेद 370 पर चर्चा से जम्मू संभाग में भाजपा का वोट बैंक एकजुट हो सकता है। भाजपा ने मिशन 44 प्लस पर काम शुरू किया है जिसके तहत विधानसभा चुनाव में 44 सीटें जीतकर अपने बूते पर सरकार बनाने का सपना है। हांलाकि यह बहुत आसान नहीं है लेकिन अगर ऐसा होता है तो अनुच्छेद 370 को समाप्त करना आसान हो जाएगा।

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