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अलगाववादियों की सुरक्षा वापस लेने पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट

Fri, 22 Nov 2019 01:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 22 Nov 2019 01:40 AM IST
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Latest report sought from government on withdrawal of security of separatists
jammu high court

अलगाववादियों से सुरक्षा वापस लेने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से ताजा रिपोर्ट मांगी है। दीवाकर शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। अलगाववादियों और हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा वापस लेने की मांग रखी थी। वीरवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। सरकार से मामले पर ताजा रिपोर्ट मांगी। 

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दीवाकर ने अलगाववादियों के साथ देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वालों की सुरक्षा भी वापस लेने की मांग भी याचिका में की थी। अगली सुनवाई तक यह रिपोर्ट पेश करनी होगी। याचिका में कहा गया है कि 1990 के बाद से ही जम्मू कश्मीर में युद्ध जैसे हालात हैं। देश की रक्षा करने वाली सेना और अन्य सुरक्षाबलों के खिलाफ यह लोग खतरा बने हुए हैं। 
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सेना पर हमले हो रहे हैं। सरहद पर भी हमले हो रहे हैं और देश के भीतर भी इन देशद्रोहियों के एजेंट हमले कर रहे हैं। खासतौर पर कश्मीर में मौजूद सुरक्षाबलों पर हमले हो रहे हैं। सुरक्षाबलों के खिलाफ अलगाववादी दिक्कतें पैदा करते आए हैं। बावजूद इसके सरकार इनके रहने, खाने पीने, आने जाने, मेडिकल, सुरक्षा पर करोड़ों खर्च करती है। 
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लोगों की खून पसीने की कमाई इन पर खर्च हो रही
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार लोगों से टैक्स वसूलती है। इससे जमा होने वाला पैसा इन लोगों पर खर्च कर देती है। लोगों के खून पसीने की कमाई ऐसे लोगों पर खर्च होती है, जो देश के जवानों का खून बहाते हैं। यह लोग देश की एकता और अखंडता के दुश्मन हैं। ऐसे लोगों पर सरकारी पैसा क्यों खर्च हो। बेशक आतंकियों से निपटने के लिए यह सरकार की नीति हो, लेकिन लोगों का पैसा इन पर खर्च करने की कोई नीति नहीं हो सकती। इन लोगों ने हमेशा ही देश के साथ जम्मू कश्मीर के विलय का विरोध किया है। जो राष्ट्र की एकता के लिए खतरा है।

कश्मीर में हिंसा की वजह भी यह 
कश्मीर में बड़े स्तर पर होने वाली हिंसा का कारण भी यह लोग हैं। जिसके चलते हजारों लोग और सुरक्षाबलों की जान चली जाती है। बावजूद इसके यह गतिविधियां लगातार जारी हैं। यह लोग युवाओं को उकसाते हैं। उनको पत्थर मारने के लिए कहते हैं। जिससे जान और संपत्ति का नुकसान होता है। 


यूनिफार्म पहनें सरकारी कर्मी
याचिका में भी यह कहा गया कि सरकारी कर्मी के लिए यूनिफार्म अनिवार्य की जानी चाहिए। इससे पता लग सकेगा कि कौन सरकारी कर्मी है और कौन नहीं। बहुत बार ऐसा होता है कि पता ही नहीं चलता कि सरकारी कर्मी कौन है। 

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