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गेहूं की फसल पर येलोरस्ट का हमला
कठुआ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 01:51 AM IST
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बेइमान मौसम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम की सबसे अधिक मार इस बार किसानों को पड़ने वाली है। जनवरी माह के दूसरे सप्ताह से चल रहे घने कोहरे ने जराई और आसपास के इलाकों में सैकड़ों एकड़ फसल पर अपना वार किया है।
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जिला में 58 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। ऐसे में खतरा पूरे जिले पर मंडरा है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल और कृषि विज्ञान केंद्र की टीम ने जराई इलाके का दौरा करने के बाद इसकी पुष्टि की है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमरीश वैद के अनुसार वैज्ञानिकों की टीम ने दौरा कर पाया है कि जराई इलाके की गेहूं की फसल में येलोरस्ट के लक्षण पनप गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से धूप न खिलने और तापमान में भारी गिरावट जारी रहने से येलोरस्ट का हमला शुरू हो गया है।
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ऐसे में किसानों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। गेहूं की फसल को येलोरस्ट से बचाने के लिए टिल्ट दवा (25 ईसी), प्रोपीकोनाजोल का एक मिलीलीटर दवा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। मैदानी इलाकों में मौसम की बेरुखी से किसानों की चिंता का बढ़ना लाजमी है।
ऐसा मौसम येलोरस्ट को दावत देकर किसानों की मेहनत को चौपट करने के लिए काफी है। हवा में नमी की मात्रा अधिक रहने और धूप नहीं होने का सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से पारा लुढ़कने और आर्द्रता बढ़ने का असर फसलों पर पड़ना शुरू हो गया है।
आम तौर पर बारिश से हवा में नमी की मात्रा अधिक रहने और तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने से फसल के बीमारी की चपेट में आने की आशंका रहती है। समय पर रोकथाम न की गई तो यह 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल चौपट कर सकता है।