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Kathua News: दिनभर गर्मी से आहत, शाम को बारिश और चली ठंडी हवाएं लेकर आईं राहत
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कठुआ। मंगलवार को 49.6 डिग्री सेल्सियस के रिकाॅर्ड तापमान के बाद बुधवार को भी दिनभर गर्मी ने अपने तेवर दिखाए। दिन का अधिकतम तापमान 46.7 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और जिले के कई हिस्सों में तेज हवाओं के बाद बारिश और हल्की ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। इस दौरान 9 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई है। शाम पांच से छह बजे के बीच तापमान में 24 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो गई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले सात दिनों में अलग अलग स्वास्थ्य संस्थानों में लू से प्रभावित लोग भी इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें लू के मामले तो रिपोर्ट नहीं हुए हैं। अलबत्ता तापमान बढ़ने से सिरदर्द, चक्कर आने, सांस लेने में दिक्कत होना और डायरिया की दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। जीएमसी प्रबंधन के अनुसार सामान्य रूप से जहां ओपीडी में इस तरह के मामले बढ़े हैं, वहीं गंभीर मामला कोई भी रिपोर्ट नहीं हुआ है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी विजय रैना ने बताया कि जिले में अलग-अलग जगह सीएचसी में गर्मी से प्रभावित लोगों के मामले बढ़े हैं लेकिन कोई भी गंभीर मामला नहीं है। लोगों को हिदायतें दी जा रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें और धूप में जाने से परहेज करें।
गर्मी का असर फसलों पर भी देखने को मिला है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि फसलों में सिंचाई को लेकर किसानों को पहले ही हिदायत जारी की गई है। दिन के समय पानी को खेतों में जमा न करने के लिए कहा गया है ताकि गर्मी के प्रभाव से फसलें न जलें।
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समय से पहले ही पिघल गए ग्लेशियर
कठुआ। इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहे कठुआ जिले और आसपास के ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल गए हैं। यही वजह है कि जिले के कुछ दरियाओं का जलस्तर बढ़ चुका है। कठुआ जिले से सटी और हिमाचल से पंजाब और जम्मू कश्मीर की सरहद पर बहने वाले रावी दरिया में भी पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। रंजीत सागर झील में लगातार 11 हजार 287 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया जा रहा है। तीन टरबाइन के चलने के बाद भी बांध में जलस्तर बुधावार शाम पांच बजे 504.32 दर्ज किया गया।
उधर, कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों की बात की जाए तो सरथल समेत नुकनाली और ढग्गर के साथ साथ लोहाई मल्हार के पहाड़ों पर जून महीने के अंत तक रहने वाली बर्फ और ग्लेशियरों का भी नामों निशान पूरी तरह से मिट चुका है। ऐसे में सेवा दरिया और उज्ज में पानी का बहाव काफी कम हो गया है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले सात दिनों में अलग अलग स्वास्थ्य संस्थानों में लू से प्रभावित लोग भी इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें लू के मामले तो रिपोर्ट नहीं हुए हैं। अलबत्ता तापमान बढ़ने से सिरदर्द, चक्कर आने, सांस लेने में दिक्कत होना और डायरिया की दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। जीएमसी प्रबंधन के अनुसार सामान्य रूप से जहां ओपीडी में इस तरह के मामले बढ़े हैं, वहीं गंभीर मामला कोई भी रिपोर्ट नहीं हुआ है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी विजय रैना ने बताया कि जिले में अलग-अलग जगह सीएचसी में गर्मी से प्रभावित लोगों के मामले बढ़े हैं लेकिन कोई भी गंभीर मामला नहीं है। लोगों को हिदायतें दी जा रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें और धूप में जाने से परहेज करें।
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गर्मी का असर फसलों पर भी देखने को मिला है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि फसलों में सिंचाई को लेकर किसानों को पहले ही हिदायत जारी की गई है। दिन के समय पानी को खेतों में जमा न करने के लिए कहा गया है ताकि गर्मी के प्रभाव से फसलें न जलें।
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समय से पहले ही पिघल गए ग्लेशियर
कठुआ। इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहे कठुआ जिले और आसपास के ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल गए हैं। यही वजह है कि जिले के कुछ दरियाओं का जलस्तर बढ़ चुका है। कठुआ जिले से सटी और हिमाचल से पंजाब और जम्मू कश्मीर की सरहद पर बहने वाले रावी दरिया में भी पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। रंजीत सागर झील में लगातार 11 हजार 287 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया जा रहा है। तीन टरबाइन के चलने के बाद भी बांध में जलस्तर बुधावार शाम पांच बजे 504.32 दर्ज किया गया।
उधर, कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों की बात की जाए तो सरथल समेत नुकनाली और ढग्गर के साथ साथ लोहाई मल्हार के पहाड़ों पर जून महीने के अंत तक रहने वाली बर्फ और ग्लेशियरों का भी नामों निशान पूरी तरह से मिट चुका है। ऐसे में सेवा दरिया और उज्ज में पानी का बहाव काफी कम हो गया है।