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Kathua News: त्रिलोचन नाथ महादेव मंदिर में गूंजा हर-हर महादेव
Tue, 11 Jul 2023 01:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 11 Jul 2023 01:22 AM IST
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- बिल्व पत्र, धतूरा, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से किया शिवलिंग का जलाभिषेक
बसोहली। सावन के पहले सोमवार को त्रिलोचन नाथ महादेव मंदिर में शिव भक्तों की कतारें लगी रही। भक्तों ने मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक किया। सुबह से ही लाइनें लगना शुरू हो गई थी। बेल पत्र, धतूरा, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए।
श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। वहीं बसोहली के नीलकंठ महादेव मंदिर में भी शिवभक्त पहुंचे। यहां उन्होंने जलाभिषेक के बाद विशेष पूजा-अर्चना की। बसोहली से दो किलोमीटर दूर स्थित त्रिलोचन नाथ मंदिर पांडवों के समय का बताया जाता है। मध्यकालीन समय की कला का यह एक सुंदर नमूना है। यह मंदिर चूना पत्थर के खंडों से निर्मित है। मंदिर के ऊपरी भाग पर गर्भगृह मौजूद है और द्वार के चौखटों के ऊपर कमल पंखुड़ियां एवं अन्य कलाकृतियां मौजूद हैं। इस मंदिर की दीवारों पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की आकृतियां बनी हुई हैं। मंदिर के ऊपरी भाग पर ब्रह्मा, विष्णु व महेश सहित देवताओं की आकृतियां हैं।
इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग आप शंभू है। बताया जाता है कि साथ लगते खेतों में हल चलाते समय किसान को धरती से यह शिवलिंग मिला था। इसके बाद इसे मंदिर में स्थापित किया गया। इस शिवलिंग का आकार कम ज्यादा होता रहता है। हर सोमवार व शनिवार को भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है जो चार प्रहर तक चलती है। वहीं, सावन माह के हर सोमवार यहां भंडारे होते हैं।
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बसोहली। सावन के पहले सोमवार को त्रिलोचन नाथ महादेव मंदिर में शिव भक्तों की कतारें लगी रही। भक्तों ने मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक किया। सुबह से ही लाइनें लगना शुरू हो गई थी। बेल पत्र, धतूरा, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए।
श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। वहीं बसोहली के नीलकंठ महादेव मंदिर में भी शिवभक्त पहुंचे। यहां उन्होंने जलाभिषेक के बाद विशेष पूजा-अर्चना की। बसोहली से दो किलोमीटर दूर स्थित त्रिलोचन नाथ मंदिर पांडवों के समय का बताया जाता है। मध्यकालीन समय की कला का यह एक सुंदर नमूना है। यह मंदिर चूना पत्थर के खंडों से निर्मित है। मंदिर के ऊपरी भाग पर गर्भगृह मौजूद है और द्वार के चौखटों के ऊपर कमल पंखुड़ियां एवं अन्य कलाकृतियां मौजूद हैं। इस मंदिर की दीवारों पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की आकृतियां बनी हुई हैं। मंदिर के ऊपरी भाग पर ब्रह्मा, विष्णु व महेश सहित देवताओं की आकृतियां हैं।
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इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग आप शंभू है। बताया जाता है कि साथ लगते खेतों में हल चलाते समय किसान को धरती से यह शिवलिंग मिला था। इसके बाद इसे मंदिर में स्थापित किया गया। इस शिवलिंग का आकार कम ज्यादा होता रहता है। हर सोमवार व शनिवार को भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है जो चार प्रहर तक चलती है। वहीं, सावन माह के हर सोमवार यहां भंडारे होते हैं।
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