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Kathua News: मौसम की पहली धुंध ने रोकी वाहनों की रफ्तार, जनजीवन रहा प्रभावित
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- शहर में निर्धारित समय के बाद खुला बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। दो दिन हुई बारिश के बाद छाए कोहरे से जनजीवन प्रभावित दिखा। मौसम की पहली धुंध ने वाहनों की रफ्तार रोक दी। वहीं, अधिकतम तापमान में आई सात डिग्री से ज्यादा की गिरावट ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। धुंध के कारण जिले के मैदानी इलाकों में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक प्रभावित रही।
मैदानी इलाकों में सोमवार की सुबह से हर ओर कोहरे का आलम देखने को मिला। इस वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग और लिंक मार्गों पर वाहन रेंगते रहे। दृष्यता कम होने से इस दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर अपने वाहनों को चलाना पड़ा। पूरा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। सुबह करीब 11 बजे तक चली सर्द हवाओं ने शाम चार बजने के साथ एक फिर जोर पकड़ा जिसने लोगों को कांपने पर मजबूर कर दिया। मौसम में आए बदलाव से बढ़ी ठंड से निजात पाने के लिए कठुआ के विभिन्न चौक चौराहे, घरों और दुकानों पर लोग अलाव सेंकते नजर आए।
भीषण ठंड का असर शहर के सार्वजनिक स्थलों पर साफ दिखाई दिया। जहां अन्य दिनों के मुकाबले लोगों की उपस्थिति आधी ही दिखाई दी। भीषण ठंड का असर शहर के बाजार पर भी देखने को मिला। जहां आम दिनों में सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच खुल जाने वाली दुकानें भी करीब एक घंटा देरी से खुली। शाम को एक बार फिर ठंड का प्रकोप बढ़ने के कारण सात बजते ही दुकानों के बंद होने का क्रम शुरू हो गया। कड़ाके की ठंड के कारण श्रमिक वर्ग को दिन भर ठिठुरते हुए अपने काम को निपटाना पड़ा। जबकि नौकरी पेशा लोग भी काम पर देरी से पहुंचे। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी ठंड का आलम यह रहा कि किसान अपने खेतों का काम निपटाने के बजाए अलाव सेंकते नजर आए।
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कोहरे के कारण हाइवे पर सुबह दृश्यता लगभग 100 मीटर तक रही। जबकि कठुआ के निचले इलाके के ग्रामीण क्षेत्रों में तो दृश्यता 50 मीटर तक ही रही। दोपहर के समय इसमें कुछ सुधार हुआ लेकिन शाम होने के साथ स्थिति सुबह की तरह ही हो गई। दिन भर सूर्य देव का दर्शन न होने के कारण ठिठुरन बढ़ गई है। चल रही सर्द हवाएं लोगों को कंपकंपा रही हैं। पहाड़ों पर धूप और बादलों का दौर जारी
जिले के मैदानों में कोहरे की मार के बीच मौसम बिगड़ने का असर आंशिक रूप से पहाड़ों पर भी दिखा। बर्फ पिघलने का दौर शुरू होने के बीच धूप और बादलों के आने जाने का सिलसिला दिन भी जारी रहा। पहाड़ी इलाकों में लोग पशुओं के लिए चारे को सुखाने और जरूरी खरीदारी में व्यस्त दिखाई दिए।
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फसल के लिए फायदेमंद है यह मौसम
इस मौसम में होने वाली बारिश कंडी के उन किसानों के लिए वरदान बन कर आई है, जिन्होंने अभी तक गेहूं की बिजाई नही की है। हालांकि किसानों को अभी गेहूं की बिजाई करने से बचने की जरूरत है। क्योंकि नए साल के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना है। इसके बाद किसान गेहूं की बिजाई का काम कर सकते हैं। बस उन्हें नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले बीज की मात्रा में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, निचले इलाके में पड़ने वाला कोहरा गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होगा।
डॉ. विशाल महाजन, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ।
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बच्चों को ठंड से बचाए रखें
सर्दी के मौसम में बच्चों में बोंकलाइटिस, निमोनिया और वायरल इंफेक्शन की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है। इससे कई बार प्रभावित मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। लिहाजा बच्चों को ठंड से बचाए रखने की जरूरत है। जबकि बीमार होने की अवस्था में तुरंत चिकित्सकीय सलाह ली जानी चाहिए। वहीं ऐसे व्यस्क जो दमा या ब्लड प्रेशर के मरीज हैं उन्हें भी ठंड से बचने की जरूरत है। ऐसे मरीज डॉक्टर की ओर से बताई गई दवाओं का नियमित रूप से लेते रखने की जरूरत है।
डाॅ. गंगा राम, सीनियर रेजीडेंट एंड चाइल्ड स्पेशलिस्ट जीएमसी कठुआ
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। दो दिन हुई बारिश के बाद छाए कोहरे से जनजीवन प्रभावित दिखा। मौसम की पहली धुंध ने वाहनों की रफ्तार रोक दी। वहीं, अधिकतम तापमान में आई सात डिग्री से ज्यादा की गिरावट ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। धुंध के कारण जिले के मैदानी इलाकों में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक प्रभावित रही।
मैदानी इलाकों में सोमवार की सुबह से हर ओर कोहरे का आलम देखने को मिला। इस वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग और लिंक मार्गों पर वाहन रेंगते रहे। दृष्यता कम होने से इस दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर अपने वाहनों को चलाना पड़ा। पूरा जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। सुबह करीब 11 बजे तक चली सर्द हवाओं ने शाम चार बजने के साथ एक फिर जोर पकड़ा जिसने लोगों को कांपने पर मजबूर कर दिया। मौसम में आए बदलाव से बढ़ी ठंड से निजात पाने के लिए कठुआ के विभिन्न चौक चौराहे, घरों और दुकानों पर लोग अलाव सेंकते नजर आए।
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भीषण ठंड का असर शहर के सार्वजनिक स्थलों पर साफ दिखाई दिया। जहां अन्य दिनों के मुकाबले लोगों की उपस्थिति आधी ही दिखाई दी। भीषण ठंड का असर शहर के बाजार पर भी देखने को मिला। जहां आम दिनों में सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच खुल जाने वाली दुकानें भी करीब एक घंटा देरी से खुली। शाम को एक बार फिर ठंड का प्रकोप बढ़ने के कारण सात बजते ही दुकानों के बंद होने का क्रम शुरू हो गया। कड़ाके की ठंड के कारण श्रमिक वर्ग को दिन भर ठिठुरते हुए अपने काम को निपटाना पड़ा। जबकि नौकरी पेशा लोग भी काम पर देरी से पहुंचे। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी ठंड का आलम यह रहा कि किसान अपने खेतों का काम निपटाने के बजाए अलाव सेंकते नजर आए।
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कोहरे के कारण हाइवे पर सुबह दृश्यता लगभग 100 मीटर तक रही। जबकि कठुआ के निचले इलाके के ग्रामीण क्षेत्रों में तो दृश्यता 50 मीटर तक ही रही। दोपहर के समय इसमें कुछ सुधार हुआ लेकिन शाम होने के साथ स्थिति सुबह की तरह ही हो गई। दिन भर सूर्य देव का दर्शन न होने के कारण ठिठुरन बढ़ गई है। चल रही सर्द हवाएं लोगों को कंपकंपा रही हैं। पहाड़ों पर धूप और बादलों का दौर जारी
जिले के मैदानों में कोहरे की मार के बीच मौसम बिगड़ने का असर आंशिक रूप से पहाड़ों पर भी दिखा। बर्फ पिघलने का दौर शुरू होने के बीच धूप और बादलों के आने जाने का सिलसिला दिन भी जारी रहा। पहाड़ी इलाकों में लोग पशुओं के लिए चारे को सुखाने और जरूरी खरीदारी में व्यस्त दिखाई दिए।
फसल के लिए फायदेमंद है यह मौसम
इस मौसम में होने वाली बारिश कंडी के उन किसानों के लिए वरदान बन कर आई है, जिन्होंने अभी तक गेहूं की बिजाई नही की है। हालांकि किसानों को अभी गेहूं की बिजाई करने से बचने की जरूरत है। क्योंकि नए साल के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना है। इसके बाद किसान गेहूं की बिजाई का काम कर सकते हैं। बस उन्हें नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले बीज की मात्रा में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, निचले इलाके में पड़ने वाला कोहरा गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होगा।
डॉ. विशाल महाजन, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ।
बच्चों को ठंड से बचाए रखें
सर्दी के मौसम में बच्चों में बोंकलाइटिस, निमोनिया और वायरल इंफेक्शन की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है। इससे कई बार प्रभावित मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। लिहाजा बच्चों को ठंड से बचाए रखने की जरूरत है। जबकि बीमार होने की अवस्था में तुरंत चिकित्सकीय सलाह ली जानी चाहिए। वहीं ऐसे व्यस्क जो दमा या ब्लड प्रेशर के मरीज हैं उन्हें भी ठंड से बचने की जरूरत है। ऐसे मरीज डॉक्टर की ओर से बताई गई दवाओं का नियमित रूप से लेते रखने की जरूरत है।
डाॅ. गंगा राम, सीनियर रेजीडेंट एंड चाइल्ड स्पेशलिस्ट जीएमसी कठुआ
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मेडिकल कॉलेज के अस्पताल परिसर में ठंडा पड़ा अलाव संवाद

मेडिकल कॉलेज के अस्पताल परिसर में ठंडा पड़ा अलाव संवाद