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Kathua News: श्री कृष्ण जन्म का उल्लास, बधाई गीतों और जयघोष से गूंजा पंडाल
Sun, 27 Apr 2025 01:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 27 Apr 2025 01:33 AM IST
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श्रीमद् भागवत कथा के दौरान निकाली गई श्रीकृष्ण की झांकी। संवाद
- फोटो : kathua
ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी
कठुआ। ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। शनिवार को जारी कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया गया।
इस मौके पर कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने श्रीमद् भागवत पुराण के दशम स्कन्द में प्रवेश करने के साथ जैसे ही कृष्ण के जन्म की घोषणा की। हर तरफ हर्ष का माहौल उत्पन्न हो गया। कथा स्थल पर कंस के कारागार से लेकर नंदबाबा के दरबार और वासुदेव के आने की झांकी प्रस्तुत की गई तो उपस्थित भक्त भगवान के बाल रूप की भव्य झांकी देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। कथाव्यास के प्रस्तुत भजनों पर झूमे। इस मौके पर कथाव्यास ने मिठाइयों का महाप्रसाद लुटाकर भगवान के जन्म की खुशी व्यक्त की। इसे पाने के लिए कथास्थल पर मौजूद भक्त ललायित दिखे। कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य भक्ति रूपी आंख से ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सभी प्राणियों का परमात्मा का समभाव रहता है। प्राणियों में निष्ठा और विश्वास है तो वह अपने सद्कर्म के बल पर उन्हें प्रत्येक जगहों पर प्राप्त कर सकता है।
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कठुआ। ब्राह्मण सभा में भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। शनिवार को जारी कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया गया।
इस मौके पर कथाव्यास कुलदीप शास्त्री ने श्रीमद् भागवत पुराण के दशम स्कन्द में प्रवेश करने के साथ जैसे ही कृष्ण के जन्म की घोषणा की। हर तरफ हर्ष का माहौल उत्पन्न हो गया। कथा स्थल पर कंस के कारागार से लेकर नंदबाबा के दरबार और वासुदेव के आने की झांकी प्रस्तुत की गई तो उपस्थित भक्त भगवान के बाल रूप की भव्य झांकी देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। कथाव्यास के प्रस्तुत भजनों पर झूमे। इस मौके पर कथाव्यास ने मिठाइयों का महाप्रसाद लुटाकर भगवान के जन्म की खुशी व्यक्त की। इसे पाने के लिए कथास्थल पर मौजूद भक्त ललायित दिखे। कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य भक्ति रूपी आंख से ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सभी प्राणियों का परमात्मा का समभाव रहता है। प्राणियों में निष्ठा और विश्वास है तो वह अपने सद्कर्म के बल पर उन्हें प्रत्येक जगहों पर प्राप्त कर सकता है।
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