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भगवान परशुराम जयंती का पर्व हुआ शुरू, महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

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The festival of Lord Parshuram Jayanti started, women took out the Kalash Yatra
श्रीमद् भगवत कथा के शुभारंभ से पूर्व निकाली गई कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु। संवाद - फोटो : KATHUA
कठुआ। आगामी तीन मई को होने वाले भगवान परशुराम की जयंती समारोह का श्रीमद्भागवत कथा के साथ आगाज हो गया है। बुधवार को ब्राह्मण सभा की ओर से श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।
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बैंडबाजे के साथ निकाली गई कलश यात्रा में शामिल भक्तों की और से लगाए जा रहे जयघोष और भजन कीर्तन से माहौल भक्ति में हो गया। कलश यात्रा शहर के मुखर्जी चौक से होती हुई प्राचीन बावलियों पर पहुंची। जहां पूजा अर्चना के साथ कलशों को बावली के पवित्र जल से भरा गया और वापस कथा स्थल पर आकर यात्रा संपन्न हुई। जहां विधि विधान से पूजन के उपरांत पवित्र कलशों की स्थापना की गई। पहले दिन की कथा के दौरान कथा व्यास मनोहर लाल शास्त्री ने अपने प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत पुराण की महत्ता समझाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने वाले मानव के जीवन में एक जन्म नहीं अपितु हमारे कई जन्मों के पापों का नाश करने की क्षमता है। इसका श्रवण करने से हमारे अंदर शुभ कर्मों का उदय होता है। कथा के श्रवण मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होकर शांत व स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी को कष्टों की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान हरिद्वार में किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। कथा व्यास ने कहा कि भगवत कथा के श्रवण मात्र से हमारे कई-कई जन्मों के सभी पाप मिट जाते हैं। भगवान विष्णु कहते हैं कि जो मेरी कथा कहता है और इसका श्रवण करता है, उसके इस लोक के सभी कष्टों का वह हरण करते हैं और अंत में उसे बैकुंठ में निवास मिलता है। अंत में प्रसाद वितरण और आरती के साथ कथा संपन्न हुई। इस मौके पर ब्राह्मण सभा के प्रधान रजनी कांत शर्मा के अलावा राबिन शर्मा, मास्टर अमरनाथ बलोत्रा, सुरेंद्र शर्मा, इंजीनियर वीरेंद्र शर्मा, सुषमा शर्मा आदि उपस्थित रही।
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