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Kathua News: काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर तैयार हो रहा प्राचीन चौंरी शिव मंदिर
Sun, 25 May 2025 12:59 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 25 May 2025 12:59 AM IST
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बनी के चौंरी मंदिर चल रहा निर्माण कार्य। संवाद
- फोटो : kathua
- गर्भ गृह का आज से शुरू होगा काम, सितंबर तक पूरा हो जाएगा निर्माण
- दो करोड़ तीस लाख की लागत से किया जा रहा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में मार्बल से तैयार हो रहे चौंरी शिव मंदिर का निर्माण सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसे बनारस के काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। रविवार से मंदिर के गर्भ गृह का काम शुरू हो जाएगा।
बनी से लगभग 17 किलोमीटर दूर चांदल पंचायत में प्राचीन चौंरी शिव मंदिर का निर्माण अब अंतिम चरण की ओर बढ़ चला है। गर्भ गृह का शिलान्यास रविवार को किया जाएगा। अब तक इसके निर्माण में 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मंदिर के निर्माण के लिए मकराना से मार्बल के अब तक 35 ट्राले आ चुके हैं, जबकि पांच से छह ट्राले मार्बल और लगने की उम्मीद है। मंदिर की यह परियोजना 2.30 करोड़ रुपये के अनुमान से तैयार की जा रही है। बता दें कि मंदिर के प्राचीन महत्व को बरकरार रखने के लिए प्राचीन शिवलिंग को गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा। वहीं, नमृदा नदी से नमृदेश्वर शिवलिंग की स्थापना मंदिर के परिसर में की जाएगी।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण करने वाला सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है नक्शा
अयोध्या में श्रीराम मंदिर को तैयार कर रहे सोमपुरा परिवार के ललित सोमपुरा ने कांथल के चौंरी शिव मंदिर का नक्शा तैयार किया है। यह मंदिर जिले का पहला पूरी तरह से मार्बल से बना भव्य शिव मंदिर होगा। ललित सोमपुरा की टीम गर्भ गृह का काम शुरू होने से पहले बनी पहुंच गई है और अगले कुछ ही दिन में वह खुद निर्माण की देखरेख करेंगे।
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500 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास 500 साल पुराना है। मंदिर का संबंध कैलाश मणिमहेश से है, जो चंबा जिला के भरमौर में स्थित है। मणिमहेश यात्रा में जिस रात को कुड का आयोजन होता है उसी रात चौंरी के शिव मंदिर में भी कुड और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। चांदल से छह किलोमीटर की दूरी पर सड़क संपर्क से जुड़ा यह मंदिर जिले में ऐतिहासिक नक्शे के आधार पर पहला मंदिर बनने जा रहा है।
कोट
चौंरी का शिव मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। मान्यता है कि कैलाश मणिमहेश को जाते समय भगवान शिव ने कुछ समय इस स्थान पर विश्राम किया था। कांथल पंचायत के लोगों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। उपमंडल के अन्य लोग भी इस धर्म कर्म के लिए आगे आए हैं।
अशोक ललहाल, अध्यक्ष मंदिर ट्रस्ट
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- दो करोड़ तीस लाख की लागत से किया जा रहा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में मार्बल से तैयार हो रहे चौंरी शिव मंदिर का निर्माण सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसे बनारस के काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। रविवार से मंदिर के गर्भ गृह का काम शुरू हो जाएगा।
बनी से लगभग 17 किलोमीटर दूर चांदल पंचायत में प्राचीन चौंरी शिव मंदिर का निर्माण अब अंतिम चरण की ओर बढ़ चला है। गर्भ गृह का शिलान्यास रविवार को किया जाएगा। अब तक इसके निर्माण में 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मंदिर के निर्माण के लिए मकराना से मार्बल के अब तक 35 ट्राले आ चुके हैं, जबकि पांच से छह ट्राले मार्बल और लगने की उम्मीद है। मंदिर की यह परियोजना 2.30 करोड़ रुपये के अनुमान से तैयार की जा रही है। बता दें कि मंदिर के प्राचीन महत्व को बरकरार रखने के लिए प्राचीन शिवलिंग को गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा। वहीं, नमृदा नदी से नमृदेश्वर शिवलिंग की स्थापना मंदिर के परिसर में की जाएगी।
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अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण करने वाला सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है नक्शा
अयोध्या में श्रीराम मंदिर को तैयार कर रहे सोमपुरा परिवार के ललित सोमपुरा ने कांथल के चौंरी शिव मंदिर का नक्शा तैयार किया है। यह मंदिर जिले का पहला पूरी तरह से मार्बल से बना भव्य शिव मंदिर होगा। ललित सोमपुरा की टीम गर्भ गृह का काम शुरू होने से पहले बनी पहुंच गई है और अगले कुछ ही दिन में वह खुद निर्माण की देखरेख करेंगे।
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500 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास 500 साल पुराना है। मंदिर का संबंध कैलाश मणिमहेश से है, जो चंबा जिला के भरमौर में स्थित है। मणिमहेश यात्रा में जिस रात को कुड का आयोजन होता है उसी रात चौंरी के शिव मंदिर में भी कुड और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। चांदल से छह किलोमीटर की दूरी पर सड़क संपर्क से जुड़ा यह मंदिर जिले में ऐतिहासिक नक्शे के आधार पर पहला मंदिर बनने जा रहा है।
कोट
चौंरी का शिव मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। मान्यता है कि कैलाश मणिमहेश को जाते समय भगवान शिव ने कुछ समय इस स्थान पर विश्राम किया था। कांथल पंचायत के लोगों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। उपमंडल के अन्य लोग भी इस धर्म कर्म के लिए आगे आए हैं।
अशोक ललहाल, अध्यक्ष मंदिर ट्रस्ट