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Kathua News: पेशी के दौरान पुलिसकर्मियों से मारपीट कर भागने के प्रयास का आरोपी बरी

Thu, 28 Aug 2025 12:34 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Thu, 28 Aug 2025 12:34 AM IST
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The accused of trying to escape by assaulting the policemen during the hearing was acquitted
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और भागने के प्रयास मामले में आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे मामले को सिद्ध करने में विफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है और घटना के समय मौजूद स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने एक तथ्य का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी ने उसी दिन कोर्ट पेशी के दौरान न्यायाधीश से शिकायत की गई थी। जिसके बाद न्यायाधीश को मामले की जांच के लिए थाना प्रभारी को आदेश दिया था।
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कोर्ट में दायर पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी मनोज कुमार पुत्र मोहन लाल खजूरिया निवासी वार्ड 1 कठुआ पर आरोप है कि उसने 12 अगस्त 2015 को कोर्ट पेशी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट कर मौके से भागने का प्रयास किया गया था। दरअसल आरोपी वर्ष 2010 से एक हत्या करने व हत्या के प्रयास के एक मामले में जिला जेल से नियमित पेशी के लिए कोर्ट में लाया गया था। शिकायतकर्ता ने अनुसार, घटना के दिन कोर्ट परिसर में आरोपी ने हेड कांस्टेबल रामदास को निजी अंगों पर लात मारी और अन्य पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की। इस घटना के बाद पुलिस ने आरपीसी धारा 353 और 332 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ 17 नवंबर 2015 को आरोप पत्र दायर किए गए थे। जिसमें उसने सभी आरोपों से इंकार किया और मुकदमे का दावा किया। जिसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले के समर्थन में 11 गवाहों में से नौ गवाहों से पूछताछ की। कोर्ट सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने बाद कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए। किसी ने कहा कि मारपीट का मामला कोर्ट परिसर के भीतर और किसी ने घटना को कोर्ट परिसर के बाहर का बताया। इसके अलावा कोर्ट ने टिप्पणी की कि घटना के समय मौजूद स्वतंत्र गवाहों को अभियोजन पक्ष ने एक भी शामिल नहीं किया गया। जबकि उसी दिन आरोपी ने पहले से चल रहे मामले में न्यायाधीश को शिकायत भी गई थी। जिसके बाद कोर्ट ने माना कि पुलिस ने आरोपी को झूठे मामले में फंसाया गया हो सकता है और आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी की जमानत और व्यक्तिगत बांड को भी खारिज करने का निर्देश दिया।
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