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Kathua News: विद्यार्थी 15 किमी दूर जाकर हासिल कर रहे उच्च शिक्षा

Wed, 14 May 2025 02:08 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Wed, 14 May 2025 02:08 AM IST
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Students forced to go 15 km away for higher education
राजकीय हाई स्कूल अप्पर रजवालता। संवाद - फोटो : kathua
मौजूदा समय में कक्षा 1 से 10 तक 53 विद्यार्थी ग्रहण कर रहे शिक्षा
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामकोट। राजकीय हाई स्कूल अपर रजवालता में दसवीं करने के बाद स्थानीय विभिन्न इलाकों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए परेशानियों का सामना कर रहे हैं। लड़के और लड़कियों के इस स्कूल में मौजूदा समय में कक्षा 1 से 10 तक 53 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
स्कूल के तहत कुल सात फीडिंग स्कूल आते हैं, जिनमें मिडिल स्कूल बुंधार, प्राइमरी स्कूल त्रोंगल, एनपीएस बांदी, एनपीएस सिंबली, एनपीएस खिम्ब्ली, एनपीएस पंजीरी, एनपीएस चैला के मौजूदा स्तर में 100 से अधिक पढ़ रहे विद्यार्थी बाद में पढ़ाई के लिए राजकीय हाई स्कूल रजवालता में आगे बढ़ाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि साल 1964 में स्कूल राजकीय प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित हुआ था, जिसके 20 साल बाद स्कूल का दर्जा बढ़ाकर 1984 में मिडिल स्कूल बना दिया गया और साल 2014 में स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे हाई स्कूल में तब्दील कर दिया। मगर विभिन्न नजदीकी इलाकों रजवालता, मस्तगढ़, चरोटा, कढू, नवल, सिंबली, रूट खिम्बली और गुड़ा के विद्यार्थी दसवीं करने के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा गुजरू या राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल रामकोट के इलाकों में जाने को मजबूर हैं। इससे वह परेशानियों से दो चार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में बड़ी संख्या में लड़कियां शिक्षा ग्रहण करती हैं। दसवीं करने के बाद कोई विकल्प नहीं होने के चलते वह उच्च शिक्षा के लिए वंचित रह जाती हैं। दूरदराज के इलाकों में सड़क संपर्क भी उचित मौजूद नहीं हैं। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के 15 से 20 किलोमीटर दूर राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा और रामकोट पहुंचने के लिए आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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स्थानीय निवासी प्रकाश चंद, करनैल सिंह, अजीत सिंह, सतपाल शर्मा, मोहिंदर कुमार, रतन चंद, करतार सिंह, मंगल सिंह, दीवान सिंह और बलदेव सिंह ने बताया कि स्कूल का दर्जा नहीं बढ़ने से स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उनका आवागमन में ही पूरा दिन निकल जाता है।
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