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Kathua News: श्रीराम कथा सुनने के बाद श्रद्धालुओं ने की सामूृहिक आरती
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नगरोटा गांव में श्री राम कथा के दौरान सामूहिक आरती में भाग लेते भक्त।
श्रीराम कथा के दौरान
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगरोटा गांव में श्रीराम कथा का आयोजन जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का संगीतमय प्रस्तुतिकरण सुनने के लिए उमड़ रहे हैं। शनिवार को कथाव्यास अमू ब्राह्मण सनातनी ने श्रीराम-हनुमान और सुग्रीव के मिलन व बाली वध का प्रसंग सुनाते हुए मित्रता का महत्व बताया।
सातवें दिन कथा के दौरान उन्होंने बताया कि ऋषि मतंग के आश्रम में माता शबरी से भेंट करने के पश्चात श्रीराम और लक्ष्मण पंपा सरोवर के दक्षिण दिशा की तरफ ऋषि मुख पर्वत की ओर महाबली वानर सुग्रीव की खोज में चल पड़ते हैं। जहां उनकी भेंट अंजनी पुत्र हनुमान से होती है। श्रीराम और लक्ष्मण भी अपनी यात्रा का सारा वृत्तांत हनुमान और सुग्रीव को बताते हैं। रावण द्वारा सीता हरण की बात सुनकर हनुमान जी श्रीराम व लक्ष्मण को बताते हैं कि हमारे राजा सुग्रीव की पत्नी भी उनसे छिन चुकी है। अतः वह आपकी वेदना को समझ सकते हैं जिसे आप दोनों एक-दूसरे के लिए कल्याणकारी सिद्ध होंगे।
श्रीराम व लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट होने के पश्चात वे दोनों एक-दूसरे की सहायता करने का वचन देते हैं। सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता होने के पश्चात सुग्रीव श्रीराम से कहते हैं कि हे मित्र हनुमान ने हमें आपकी पत्नी सीता के हरण का सारा वृतांत बताया है इसलिए मैं माता सीता की खोज करने में आपकी पूरी सहायता करूंगा। इसके बाद आप मेरी सहायता कीजिएगा। लेकिन तब श्रीराम कहते हैं कि हे सुग्रीव मैंने आपसे मित्रता की है इसलिए मेरा पहला धर्म यही है कि मैं पहले आपकी समस्या तथा कष्टों का समाधान करूं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगरोटा गांव में श्रीराम कथा का आयोजन जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का संगीतमय प्रस्तुतिकरण सुनने के लिए उमड़ रहे हैं। शनिवार को कथाव्यास अमू ब्राह्मण सनातनी ने श्रीराम-हनुमान और सुग्रीव के मिलन व बाली वध का प्रसंग सुनाते हुए मित्रता का महत्व बताया।
सातवें दिन कथा के दौरान उन्होंने बताया कि ऋषि मतंग के आश्रम में माता शबरी से भेंट करने के पश्चात श्रीराम और लक्ष्मण पंपा सरोवर के दक्षिण दिशा की तरफ ऋषि मुख पर्वत की ओर महाबली वानर सुग्रीव की खोज में चल पड़ते हैं। जहां उनकी भेंट अंजनी पुत्र हनुमान से होती है। श्रीराम और लक्ष्मण भी अपनी यात्रा का सारा वृत्तांत हनुमान और सुग्रीव को बताते हैं। रावण द्वारा सीता हरण की बात सुनकर हनुमान जी श्रीराम व लक्ष्मण को बताते हैं कि हमारे राजा सुग्रीव की पत्नी भी उनसे छिन चुकी है। अतः वह आपकी वेदना को समझ सकते हैं जिसे आप दोनों एक-दूसरे के लिए कल्याणकारी सिद्ध होंगे।
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श्रीराम व लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट होने के पश्चात वे दोनों एक-दूसरे की सहायता करने का वचन देते हैं। सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता होने के पश्चात सुग्रीव श्रीराम से कहते हैं कि हे मित्र हनुमान ने हमें आपकी पत्नी सीता के हरण का सारा वृतांत बताया है इसलिए मैं माता सीता की खोज करने में आपकी पूरी सहायता करूंगा। इसके बाद आप मेरी सहायता कीजिएगा। लेकिन तब श्रीराम कहते हैं कि हे सुग्रीव मैंने आपसे मित्रता की है इसलिए मेरा पहला धर्म यही है कि मैं पहले आपकी समस्या तथा कष्टों का समाधान करूं।

पर्चा दिखाता विनोद।

पर्चा दिखाता विनोद।

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