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Kathua News: बरात में लापता हुए तीन लोगों की तलाश में चलाया सर्च ऑपरेशन
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लोहाई मल्हार इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाते सुरक्षा बल।
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ/बिलावर। मलाड़ से शाम चार बजे मल्हार के सुरग के लिए बरात निकली। सब लोग खुश थे। बरात में कुल 35 लोग शामिल थे जिनमें से हम सात लोग साथ-साथ चल रहे थे। इनमें मेरा भाई योगेश, भांजा वरुण और दर्शन सिंह भी शामिल थे। शाम सात बजे तक अंधेरा हो गया। तब तक मलाड़ हाई स्कूल के पास पहुंचने वाले थे। चूंकि कच्चा रास्ता था सब आगे पीछे चल रहे थे। यहीं से योगेश, वरुण और दर्शन सिंह की दूरी कुछ कदम की बढ़ गई। इसके बाद आगे घने जंगल का इलाका था। सब टार्च लेकर चलते गए।
यह बातें लापता हुए योगेश के भाई अक्षय ने बताईं। लापता हुए लोगाें में दूल्हे का सगा भाई और दो अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भाई बृजेश की बरात में सभी लोग एक साथ निकले थे। बकौल अक्षय, वो भी अंधेरे जंगल में टार्च के सहारे चलते हुए भटक गए थे। और रात 11 बजे के लगभग सुरग पहुंचे जहां बरात को पहुंचना था। यहां पहुंचकर अपने साथ आए लोगों के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वरुण, दर्शन सिंह और योगेश नहीं पहुंचे हैं।
अक्षय ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा कि शायद उनकी तरह वे भी जंगल में भटक गए हों और देरी से पहुंचें। या फिर कहीं रात में शरण ले ली हो। लेकिन सुबह तक भी जब यह लोग नहीं पहुंचे तो चिंता बढ़ने लगी। अक्षय ने बताया कि लापता हुए लोगाें में ध्यौता निवासी 35 वर्षीय दर्शन सिंह, मढून निवासी 28 वर्षीय योगेश सिंह, और ध्यौता निवासी 14 वर्षीय वरुण बरात के साथ गए थे। फिलहाल शुक्रवार को तीन दिन की शादी की रस्मों को जैसे तैसे पूरा किया गया है।
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ड्रोन और खोजी कुत्तों की भी ली मदद, इलाके के लोगों में खौफ
लापता हुए लोगों की तलाश में एसओजी की ओर से सर्च ऑपरेशन की शुरुआत की गई। सीआरपीएफ और सेना ने भी विभिन्न इलाकों को खंगालने का काम किया। जंगल के इलाके में लापता लोगों की तलाश के लिए जहां ड्रोन से मदद ली गई वहीं खोजी कुत्तों को भी काम पर लगाया गया है।
तीन बरातियों के अचानक लापता होने से इलाके में खौफ का माहौल है और लोग सहमे हुए हैं। अचानक बरात में गए तीन लोगों के जंगल से लापता होने के मामले को लोग आतंकी एंगल से भी जोड़ रहे हैं। स्थानीय करनैल सिंह ,रमेश कुमार और अन्य लोगों ने बताया कि 16 फरवरी को कोहग गांव के दो लोगों के शव बाथर गांव से मिले थे। लगभग 20 दिन बाद एक बार फिर इस प्रकार की घटना से क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल होता जा रहा है।
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15 फरवरी को बाथर में मिले थे दो ग्रामीणों के शव
15 फरवरी को कोहग गांव के दो लोग तरड़ी की सब्जी निकालने के लिए अपने गांव से सेट कमाड इलाके के जंगल की तरफ दोपहर के समय निकले थे। लेकिन 16 फरवरी की सुबह दोनों के शव बाथर गांव से मिले थे। कोहग गांव से विपरीत दिशा में 15 किलोमीटर की दूरी पर दो लोगों के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी लेकिन 20 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक दोनों लोगों की हत्या को अंजाम देने वालों का कोई पता नहीं चल पाया है। लगभग तीन दिन पूर्व इसी इलाके में सुरक्षा बलों को तीन संदिग्ध दिखाई देने की सूचना मिली थी जिसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया था लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली थी। उधर, पुलिस भी हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है।
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जुलाई में बदनौता हमले के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय हैं आतंकी
पिछले लगभग आठ महीने से इलाके में आतंकियों की सक्रियता जारी है। वर्ष 2024 के जुलाई महीने में आतंकियों ने बदनौता इलाके में सेना के काफिले पर हमला किया था हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद इसी साल भटोडी इलाके में आतंकवादियों ने रात के समय सेना के कैंप पर फायरिंग की और अंधेरे का फायदा उठाते हुए आतंकी जंगल की तरफ भाग निकले थे। कोहग इलाके में वर्ष 2024 के सितंबर में महीने में सुरक्षा बलों की आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी जिसमें सुरक्षा वालों ने एक आतंकवादी को मौत के घाट उतारा था। अन्य आतंकी तभी से फरार चल रहे हैं और इलाके के जंगलाें में छिपकर लगातार चुनौती बने हुए हैं।
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कठुआ/बिलावर। मलाड़ से शाम चार बजे मल्हार के सुरग के लिए बरात निकली। सब लोग खुश थे। बरात में कुल 35 लोग शामिल थे जिनमें से हम सात लोग साथ-साथ चल रहे थे। इनमें मेरा भाई योगेश, भांजा वरुण और दर्शन सिंह भी शामिल थे। शाम सात बजे तक अंधेरा हो गया। तब तक मलाड़ हाई स्कूल के पास पहुंचने वाले थे। चूंकि कच्चा रास्ता था सब आगे पीछे चल रहे थे। यहीं से योगेश, वरुण और दर्शन सिंह की दूरी कुछ कदम की बढ़ गई। इसके बाद आगे घने जंगल का इलाका था। सब टार्च लेकर चलते गए।
यह बातें लापता हुए योगेश के भाई अक्षय ने बताईं। लापता हुए लोगाें में दूल्हे का सगा भाई और दो अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भाई बृजेश की बरात में सभी लोग एक साथ निकले थे। बकौल अक्षय, वो भी अंधेरे जंगल में टार्च के सहारे चलते हुए भटक गए थे। और रात 11 बजे के लगभग सुरग पहुंचे जहां बरात को पहुंचना था। यहां पहुंचकर अपने साथ आए लोगों के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वरुण, दर्शन सिंह और योगेश नहीं पहुंचे हैं।
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अक्षय ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा कि शायद उनकी तरह वे भी जंगल में भटक गए हों और देरी से पहुंचें। या फिर कहीं रात में शरण ले ली हो। लेकिन सुबह तक भी जब यह लोग नहीं पहुंचे तो चिंता बढ़ने लगी। अक्षय ने बताया कि लापता हुए लोगाें में ध्यौता निवासी 35 वर्षीय दर्शन सिंह, मढून निवासी 28 वर्षीय योगेश सिंह, और ध्यौता निवासी 14 वर्षीय वरुण बरात के साथ गए थे। फिलहाल शुक्रवार को तीन दिन की शादी की रस्मों को जैसे तैसे पूरा किया गया है।
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ड्रोन और खोजी कुत्तों की भी ली मदद, इलाके के लोगों में खौफ
लापता हुए लोगों की तलाश में एसओजी की ओर से सर्च ऑपरेशन की शुरुआत की गई। सीआरपीएफ और सेना ने भी विभिन्न इलाकों को खंगालने का काम किया। जंगल के इलाके में लापता लोगों की तलाश के लिए जहां ड्रोन से मदद ली गई वहीं खोजी कुत्तों को भी काम पर लगाया गया है।
तीन बरातियों के अचानक लापता होने से इलाके में खौफ का माहौल है और लोग सहमे हुए हैं। अचानक बरात में गए तीन लोगों के जंगल से लापता होने के मामले को लोग आतंकी एंगल से भी जोड़ रहे हैं। स्थानीय करनैल सिंह ,रमेश कुमार और अन्य लोगों ने बताया कि 16 फरवरी को कोहग गांव के दो लोगों के शव बाथर गांव से मिले थे। लगभग 20 दिन बाद एक बार फिर इस प्रकार की घटना से क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल होता जा रहा है।
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15 फरवरी को बाथर में मिले थे दो ग्रामीणों के शव
15 फरवरी को कोहग गांव के दो लोग तरड़ी की सब्जी निकालने के लिए अपने गांव से सेट कमाड इलाके के जंगल की तरफ दोपहर के समय निकले थे। लेकिन 16 फरवरी की सुबह दोनों के शव बाथर गांव से मिले थे। कोहग गांव से विपरीत दिशा में 15 किलोमीटर की दूरी पर दो लोगों के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी लेकिन 20 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक दोनों लोगों की हत्या को अंजाम देने वालों का कोई पता नहीं चल पाया है। लगभग तीन दिन पूर्व इसी इलाके में सुरक्षा बलों को तीन संदिग्ध दिखाई देने की सूचना मिली थी जिसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया था लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली थी। उधर, पुलिस भी हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है।
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जुलाई में बदनौता हमले के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय हैं आतंकी
पिछले लगभग आठ महीने से इलाके में आतंकियों की सक्रियता जारी है। वर्ष 2024 के जुलाई महीने में आतंकियों ने बदनौता इलाके में सेना के काफिले पर हमला किया था हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद इसी साल भटोडी इलाके में आतंकवादियों ने रात के समय सेना के कैंप पर फायरिंग की और अंधेरे का फायदा उठाते हुए आतंकी जंगल की तरफ भाग निकले थे। कोहग इलाके में वर्ष 2024 के सितंबर में महीने में सुरक्षा बलों की आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी जिसमें सुरक्षा वालों ने एक आतंकवादी को मौत के घाट उतारा था। अन्य आतंकी तभी से फरार चल रहे हैं और इलाके के जंगलाें में छिपकर लगातार चुनौती बने हुए हैं।