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पंजाब राजी, पर रियासत पीछे खींच रही कदम

Wed, 11 May 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/कठुआ
ब्यूरो,अमर उजाला/कठुआ Updated Wed, 11 May 2016 01:51 AM IST
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Punjab persuaded , pull back jk
शाहपुर कंडी परियोजना - फोटो : अमर उजाला

पानी और बिजली को लेकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब सरकार के बीच चार दशक से चल रहे अटपटे समझौतों में सुधार का सही समय आ चुका है। खींचतान को खत्म करने के लिए गेंद जम्मू-कश्मीर सरकार के पाले में है।

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जम्मू कश्मीर सरकार की सभी शर्तों को पंजाब सरकार मानने के लिए राजी हो गई है, लेकिन जम्मू कश्मीर सरकार के कदम अभी भी किन्हीं कारणों से पीछे हैं। राज्य सरकार के कन्नी काटने से ढाई वर्ष से 2300 करोड़ की पंजाब सरकार की शाहपुर कंडी परियोजना अधर में है। इसके साथ ही रंजीत सागर बांध से जम्मू-कश्मीर के हिस्से की बिजली और सिंचाई व्यवस्था पर भी रोड़ा अड़ा हुआ है।
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सरकारी सूत्रों की मानें तो जम्मू-कश्मीर में दो वर्षों सरकार की अस्थिरता की वजह से मामला लटका हुआ है, लेकिन अब भाजपा और पीडीपी गठबंधन फिर से सत्ता में है, ऐसे में इस मामले को निपटाने का यही सही समय है।
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यदि इस बार पंजाब ने ढाई साल से लटकी शाहपुर कंडी परियोजना पर हाथ खींच लिए तो जम्मू-कश्मीर के लिए लखनपुर से विजयपुर तक सिंचाई की व्यवस्था कर पाना टेढ़ी खीर साबित होगा। यूं तो रावी दरिया के पानी से रावी-तवी नहर के जरिए 32 हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र लखनपुर से विजयपुर तक सिंचाई का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में मात्र तीस फीसदी पानी ही इस इलाके को मिल पाता है।

वर्ष 1979 में रंजीत सागर बांध को बनाने से पहले जम्मू-कश्मीर और पंजाब सरकार के बीच समझौते के कुछ पहलू आज भी दोनों राज्यों के बीच खटास पैदा कर रहे हैं। हालांकि, समझौता दोनों राज्यों की सहूलियत के लिए किया गया था, लेकिन इसने जम्मू-कश्मीर के हक को ताक पर रख दिया।

बांध बनने के बाद बीस फीसदी बिजली खरीद को लेकर हुआ समझौता सबसे हैरान करने वाला था। जम्मू-कश्मीर ने जिस समझौते पर वर्ष 1979 में हामी भरी थी, उसके अनुसार बांध से बीस फीसदी उत्पादन का हक जम्मू-कश्मीर का है, लेकिन यह हक बसबार रेट पर बिजली खरीद कर ही हासिल किया जा सकता है।

सूत्रों की मानें तो आम तौर पर जितनी कीमत सरकार बिजली के लिए चुकाती रही है उसके लिहाज से रंजीत सागर बांध से बिजली खरीदना महंगा था। इसके चलते यह समझौता धरा का धरा रहा गया।

हालांकि, हिमाचल सरकार ने समय रहते अनुबंध में सुधार करा लिया और वर्तमान में बसबार रेट पर हिमाचल के हिस्से की बिजली में से 4.6 फीसदी बिजली मुफ्त मिल रही है। इसी तरह से यदि जम्मू-कश्मीर भी बीस फीसदी बिजली की खरीद की जगह दस फीसदी मुफ्त बिजली हासिल करने का समझौता कर ले तो सौदा नुकसान का नही होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती की कवायद भी ठंडे बस्ते में: एक वर्ष पहले शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर सरकार में तालमेल बनने का सिलसिला शुरू हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को पंजाब के मुख्यमंत्री ने पत्र लिखकर नए सिरे से समझौता करने और वर्ष 2004 में पंजाब कैबिनेट में पास हुए वाटर टर्मिनेशन एक्ट को लेकर भी सफाई दी थी।


साथ ही उन्होंने समझौते को लेकर हाथ बढ़ाते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार की मंशा जानने की कोशिश की। इसके बाद विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की श्रीनगर में उच्च स्तरीय बैठक भी हुई, लेकिन अक्तूबर के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए चल रहा काम लटकता चला गया। मुफ्ती के निधन के बाद राज्य में सरकार की अस्थिरता में शाहपुर कंडी परियोजना को भी अधर में ला दिया।

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