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अस्थायी कर्मचारियों को तीन साल से वेतन नहीं
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कठुआ। पिछले तीन सालों से लंबित पड़े वेतन के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे जल शक्ति विभाग के जरूरतमंद कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन जल्द जारी किए जाने की मांग जिला विकास परिषद के नगरी ब्लॉक सदस्य संदीप मजोत्रा ने की है। सोमवार को दर्जनों कर्मचारियों के साथ पहले उन्होंने उपायुक्त राहुल यादव को समस्या की जानकारी दी, और फिर जल शक्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता को लिखित ज्ञापन देकर सभी जरूरतमंद कर्मचारियों की समस्या का समाधान किए जाने की मांग की।
संदीप मजोत्रा ने कहा कि जिले में जल आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए काफी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों को नियुक्त किया है। लेकिन, इनमें से काफी संख्या में कर्मियों के रिकार्ड को विभाग ने आज तक आनलाइन नहीं किया। जिसके कारण वर्तमान समय में लगभग 200 के करीब कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले तीन साल से वेतन के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई। आज महंगाई आसमान छू रही है। ऐसे में इन परिवारों का बिना वेतन गुजारा कर पाना असंभव हो गया है।
कर्मचारियों की इन्हीं समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखते हुए संदीप ने समाधान की मांग की है। इसके बाद उपायुक्त ने उन्हें इस पर कार्रवाई के लिए विभाग के कार्यकारी अभियंता के पास भेजा। संदीप ने कहा कि कर्मचारियों की समस्या पहले से उनके संज्ञान में थी, लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए उन्होंने इस मसले पर आवाज उठाना ठीक नहीं समझा। आज भी वह कर्मचारियों की इस मांग से प्रशासन को अवगत कराने के लिए काफी सीमित संख्या में आए हैं, और सभी औपचारिकता शांतिपूर्वक की हैं। अगर इस सबके बावजूद प्रशासन कर्मचारियों को राहत देने के लिए पहल नहीं करता, तो 15 दिनों के बाद वह अपनी अगली कार्रवाई पर विचार करेंगे।
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संदीप मजोत्रा ने कहा कि जिले में जल आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए काफी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों को नियुक्त किया है। लेकिन, इनमें से काफी संख्या में कर्मियों के रिकार्ड को विभाग ने आज तक आनलाइन नहीं किया। जिसके कारण वर्तमान समय में लगभग 200 के करीब कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले तीन साल से वेतन के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई। आज महंगाई आसमान छू रही है। ऐसे में इन परिवारों का बिना वेतन गुजारा कर पाना असंभव हो गया है।
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कर्मचारियों की इन्हीं समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखते हुए संदीप ने समाधान की मांग की है। इसके बाद उपायुक्त ने उन्हें इस पर कार्रवाई के लिए विभाग के कार्यकारी अभियंता के पास भेजा। संदीप ने कहा कि कर्मचारियों की समस्या पहले से उनके संज्ञान में थी, लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए उन्होंने इस मसले पर आवाज उठाना ठीक नहीं समझा। आज भी वह कर्मचारियों की इस मांग से प्रशासन को अवगत कराने के लिए काफी सीमित संख्या में आए हैं, और सभी औपचारिकता शांतिपूर्वक की हैं। अगर इस सबके बावजूद प्रशासन कर्मचारियों को राहत देने के लिए पहल नहीं करता, तो 15 दिनों के बाद वह अपनी अगली कार्रवाई पर विचार करेंगे।
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